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बुधवार, 12 जनवरी 2011

कहाँ है मानवता ?

        मध्य-प्रदेश के शहडौल जिले के अनूपपुर में एक युवती के जहर खा लेने पर उसे अस्पताल ले जाने के लिये उसका गरीब पिता अपनी पुत्री के निष्चेष्ट शरीर को जैसे-तैसे सायकल पर लादकर अस्पताल तक ले जाने की मदद की गुहार के साथ उसे लेकर पुलिस थाने पहुँचा । लेकिन पुलिसकर्मियों ने एम्बुलेन्स बुलवाने या शासकीय वाहन में उस युवती को अस्पताल पहुँचानने की अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड लिया ।

        परेशान पिता उसी स्थिति में उस युवती को सायकल पर लादे हुए क्षेत्र के नेता और फिर समाजसेवी के पास मदद की गुहार लगाने पहुँचा लेकिन वहाँ से भी उसे निराशा ही मिली । आखिर 14 किलोमीटर की दूरी उसी स्थिति में तय करने के बाद वह अपनी पुत्री को अस्पताल लेकर जा पाया । जहाँ डाक्टरों ने उस युवती को मृत घोषित कर दिया ।

        क्या यह सम्भव नहीं था कि समय पर यदि चिकित्सा सुविधा मिल जाती तो शायद उस युवती की जान बच जाती ।

        ऐसे नाजुक समय पर भी इन्सानियत से मुँह फेर लेना मानवता के किस दायरे में गिना जा सकता है ? 


8 टिप्पणियाँ:

deepak saini ने कहा…

धिक्कार है ऐसे लोगो पर।
ये चाहते तो उस युवती की जान बच सकती थी।

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

शर्म आनी चाहिये, ऐसे लोगों को।

उपेन्द्र ' उपेन ' ने कहा…

afsos.......... aaj ka samaj kis disha men ja raha hai........

ajit gupta ने कहा…

एक नजर से देखने पर तो इंसानियत की मौत ही दिखायी देती है लेकिन कभी-कभी ऐसे प्रकरणों के पीछे का सत्‍य और कुछ भी होता है।

दर्शन कौर धनोए ने कहा…

सुशिल जी , ऐसी अवहेलना मानव समाज मे व्याप्त है ,जहा इंसानियत शर्मसार होती रहती है | और फिर गाँवों का माहोल जहा गरीब इन्सान की कोई वेल्यु ही नही होती -?-इसकी जगह कोई नेता या बड़ा आफिसर होता तो यही पुलिस नाचती रहती--मै खुद'मनासा'जेसे छोटे से गाँव मे ४साल रही हु और ऐसी धटनाओ की मूक द्रष्टा रही हु ---:(

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

राजनीति हो या व्यापार, जब आप आदमी को जीवन का सही मक़सद और जीवन गुज़ारने की सही रीत नहीं बता पाएंगे तो वह ग़लत ही तो करेगा। आज ग़लतियों का अंबार है और उन ग़लतियों को आज परंपरा का नाम दिया जा चुका है जैसे कि पूस के महीने में नवविवाहित हिंदू दंपत्ति न अपने किसी रिश्तेदार के जा सकते हैं और न ही आप में शारीरिक आनंद ले-दे सकते हैं। आखि़र क्या औचित्य है ऐसे आडंबर का ?

Kajal Kumar ने कहा…

अकल्पनीय.

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

इंसान की बर्फ होती संवेदनाओं की बानगी है यह घटना......

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