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बुधवार, 9 फ़रवरी 2011

अनमोल बोल - 2. ईश-आस्था.

       ईश-आस्था.

 ईश्वर न काबा में है और न काशी में । वह तो घट-घट में व्याप्त है, हर दिल में मौजूद है-

जब तुझसे न सुलझे तेरे 
उलझे हुए धंधे

भगवान के इन्साफ पे सब 
छोड दे बंदे,

खुद ही तेरी मुश्किल को वो 
आसान करेगा

जो तू नहीं कर पाया वो 
भगवान करेगा.

         ईश्वर बडे-बडे साम्राज्यों से विमुख हो सकता है, किन्तु छोटे-छोटे पुष्पों से कभी खिन्न नहीं होता ।


12 टिप्पणियाँ:

पी.सी.गोदियाल "परचेत" ने कहा…

जब तुझसे न सुलझे तेरे
उलझे हुए धंधे


भगवान के इन्साफ पे सब
छोड दे बंदे,
हम तो कभी से यही किये बैठे है सर जी, बहुत सुन्दर !

Deepak Saini ने कहा…

अपना भी सब भगवान के इंसाफ पे ही चल रहा है
बहुत अच्छा

Dr (Miss) Sharad Singh ने कहा…

‘ईश्वर बडे-बडे साम्राज्यों से विमुख हो सकता है, किन्तु छोटे-छोटे पुष्पों से कभी खिन्न नहीं होता ।’

बहुत सही लिखा आपने।

सदा ने कहा…

बहुत ही सही कहा है आपने ।

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

बहुत बड़ा सच कहा आपने।

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा…

सुंदर विचार, आभार।

---------
समाधि द्वारा सिद्ध ज्ञान।
प्रकृति की सूक्ष्‍म हलचलों के विशेषज्ञ पशु-पक्षी।

ज्ञानचंद मर्मज्ञ ने कहा…

आद.सुशील जी,
चार पंक्तियों में आपने पूरे जीवन का सार उड़ेल कर रख दिया

ZEAL ने कहा…

मन कों सुकून देती एक बेहतरीन पोस्ट !
आभार सुशील जी ।

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

बहुत सुंदर.....

उपेन्द्र ' उपेन ' ने कहा…

सच , बहुत ही अनमोल वचन............. सुंदर प्रस्तुति.

Tarkeshwar Giri ने कहा…

भगवान के इन्साफ पे सब
छोड दे बंदे,

बिलकुल सही कहा हैं आपने.

bhagat ने कहा…

EXCELLENT, VERY POSITIVE

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