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गुरुवार, 3 मार्च 2011

चित्र-5. अब दिल्ली दूर नहीं.



ये गधा गधों का लीडर
कहता है कि दिल्ली जाकर
मांगें सब अपने कौम की मैं मनवाकर आउंगा
नहीं तो, घास न खाउंगा ।


12 टिप्पणियाँ:

Udan Tashtari ने कहा…

दिल्ली में तो सब परिवार के मिल ही जायेंगे इसको.

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

घोड़ों को घास नहीं, गधे च्यवनप्रास खायें।

Deepak Saini ने कहा…

wah wah wah wah
ha ha ha ha ha

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा…

सचमुच।

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ब्‍लॉगवाणी: ब्‍लॉग समीक्षा का एक विनम्र प्रयास।

डॉ टी एस दराल ने कहा…

गधे के दिन फिर गए , आदमी के लद गए ! ! !

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

दिल्ली में खूब साथी मिलेंगें ....

V!Vs ने कहा…

hahahah sach me mast h.

Dr (Miss) Sharad Singh ने कहा…

गधा आखिर गधा ही निकला...दिल्ली में भी भला किसी की मांगे पूरी हुई है....

mridula pradhan ने कहा…

wah. mazedaar.

कुमार राधारमण ने कहा…

ये तो फोटो ऑफ द ईयर है हुज़ूर!

कुश्वंश ने कहा…

गधे के दिन फिर गए,गधों का लीडर,दिल्ली में खूब घास है

JALES MEERUT ने कहा…

हँसीं उडाता घोड़ों की अब खोता है ,
क्या आजादी का मतलब ये होता है ?
अमरनाथ 'मधुर'

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