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रविवार, 17 अप्रैल 2011

चतुर नौनिहाल...!



        हमारे तीन वर्षीय पोते मा. हनी जिनके जन्मदिन पर कुछ दिनों पूर्व आप सभीने शुभकामनाएँ भेजी थीं दो दिन पूर्व अपने चाचा के साथ घूमने निकले । एरोड्रम घर से बमुश्किल एक किलोमीटर से भी कम की ही दूरी पर है और घूमने के दौरान एरोप्लेन को बहुत नीचे से देखने की उनकी हसरत अक्सर पूरी हो जाती है किन्तु उस दिन प्लेन की आवाजाही का दूर-दूर तक नामो निशान नहीं दिख रहा था और हनी मास्टर जिद पर अडे थे कि एलोप्लेन बुलवाओ । 

         चाचा ने जब पांसा डाला कि अब तुझे प्लेन देखना है या आईस्क्रीम खाने चलना है तो जनाब पूरी मासूमियत से बोलते हैं "वा तो फिल अबी आईस्क्लीम खाने चलते हैं एलोप्लेन देखने बाद में आ जाएँगे ।"

                  ऐसे ही हमारे पडौसी के चार वर्षीय पोते के यहाँ एक दिन उनकी मम्मी को किटीपार्टी में जाना था और दादी को एक शादी में । उनसे पूछा गया कि मम्मी के साथ जाना है या दादी के साथ तो वे तपाक से बोले दादी के साथ । जब उनके पापा ने पूछा आज दादी के साथ क्यों मम्मी के साथ क्यों नहीं ? तो जनाब फरमाते हैं किटीपार्टी में तो एक बार ही कोल्डड्रिंक मिलेगी और शादी में तो कितनी भी बार मैं कोल्डड्रिंक पीने के साथ मिठाई भी खा सकूँगा ।


7 टिप्पणियाँ:

Shah Nawaz ने कहा…

:-) बच्चे मन के सच्चे!

दर्शन कौर धनोए ने कहा…

yah bhi khub rhi ?

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

बात में तो दम है।

डॉ टी एस दराल ने कहा…

बच्चे भी बड़े उस्ताद होते हैं ।

Patali-The-Village ने कहा…

बच्चे मन के सच्चे|धन्यवाद|

Dr (Miss) Sharad Singh ने कहा…

मानना पड़ेगा कि बच्चे बड़ों से अधिक बुद्धिमान होते हैं...

ajit gupta ने कहा…

इन बच्‍चों को आप कम मत समझना, यह अच्‍छे अच्‍छे समझदारों के कान काट लेते हैं। सारा मनोविज्ञान इन्‍हें आता है।

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