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सोमवार, 27 जून 2011

जीवन सूत्र


सोचिये : जो भी मेरे पास है, मेरे लिये खास है.

हमारी तीन महत्वपूर्ण संपत्तियां हैं - 
 शरीर, संयम और आत्मविकास.
 
कोई भी काम सिर्फ काम चलाने के लिये नहीं बल्कि आगे बढने के लिये कीजिए.
 
यदि आप पूरी जिन्दगी के लिये खुशी चाहते हैं तो अपने काम से प्यार करना सीखिए.
 
असफलता वह अवसर है जब आप 
पूरी समझदारी से दोबारा शुरुआत कर सकते हैं.
 
 खुश रहना भी एक आदत है और लगन से मेहनत करना भी.
 
कोल्हू का बैल सारा दिन घूमता रहता है किन्तु रहता वहीं का वहीं है.
 
पढे-लिखे होने से अच्छा है पढते-लिखते रहना.
 
दलदल में रहोगे तो तैरना नहीं सीखोगे.
 
अपनी ख्वाईशों को पूरा करने की कोशिश जरुर कीजिये,
ताकि भविष्य में ये खेद न रहे कि आपने कोशिश ही नहीं की.

सीधी बातचीत मित्रता बनाये रखने का श्रेष्ठ तरीका है.
 
हर दिन की शुरुआत सुखद, संतुष्ट व सुखी नजरिए से कीजिये, 
आपका दिन सुखद व सफल गुजरेगा.
 
सौजन्य : अहा जिन्दगी (धर्मेन्द्र दकलिया, बीकानेर (राज.)

15 टिप्पणियाँ:

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

दलदल में रहकर तैरना नहीं हो पाता है, बहुत आभार।

Sunil Kumar ने कहा…

बहुत अच्छे सन्देश, आभार

सतीश सक्सेना ने कहा…

सत्यम शिवम् सुन्दरम ...

निर्मला कपिला ने कहा…

सार्थक सन्देश। आभार।

ajit gupta ने कहा…

बहुत अच्‍छे विचार।

दर्शन कौर धनोए ने कहा…

बहुत सुंदर विचार है सुशील जी ...काफी दिनों बाद आई हूँ और माफ़ी की भी हकदार हूँ ...क्रपीया माफ़ करे...धन्यवाद !

Dr (Miss) Sharad Singh ने कहा…

अच्छे विचार...

डॉ टी एस दराल ने कहा…

ज्ञानवर्धक बातें ।
पालन करें तो जिंदगी बदल जाए ।

वीना ने कहा…

प्रयास करना बहुत जरूरी है...
बहुत बढ़िया संदेश...

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

Sunder Sandeh dete shabd....

Udan Tashtari ने कहा…

उम्दा संदेश!!!

Arunesh c dave ने कहा…

अच्छे सूत्र है कुछ को ही अपना लिया जाय तो जीवन खुशहाल हो जायेगा

mridula pradhan ने कहा…

har vichar prernadayak.....

devendra gautam ने कहा…

Achchhe sutrwaky hain.Koi amal kare to...

RAJEEV KULSHRESTHA ने कहा…

सार्थक प्रेरक वाणी

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