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रविवार, 2 अक्तूबर 2011

10 टिप्पणियाँ:

डॉ टी एस दराल ने कहा…

चूड़ियों को बोझ जो उठा न सके , अब खंज़र लिए घुमते हैं ।
सचमुच ज़माना बदल गया है ।

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

यही इतिहास बन भी रहे हैं।

ajit gupta ने कहा…

पता नहीं क्‍या हो रहा है आजकल?

Dr Varsha Singh ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति के लिए आपको हार्दिक बधाई।

Dr (Miss) Sharad Singh ने कहा…

Really what a tragedy !...Heart touching composition

acer ने कहा…

Ik Khuwahish He Dil Main Janam
Kuch Pagal Kuch Anjani Si

acer ने कहा…

Ik Khuwahish He Dil Main Janam
Kuch Pagal Kuch Anjani Si

Deepak Saini ने कहा…

मिलन का ये कैसा मंजर है
एक हाथ में फूल, दूजे में खंजर है

अनुपमा पाठक ने कहा…

ये कैसा रंग जिंदगी का...
दुखद स्थिति से परीचित कराते चित्र!

chicha.in ने कहा…

hii.. Nice Post

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