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शुक्रवार, 8 मार्च 2013

महिला दिवस और रंगों का मेल ?

         
         महिला संगठन की 8 मार्च की मेरी पत्नी की सामूहिक मीटिंग में अधिक से अधिक रंग-बिरंगी साडी पहन कर शामिल होने का ड्रेसकोड सामने आया । यूँ तो इसमें कोई खास बात नहीं लगी किन्तु आज महिला-दिवस के अवसर पर जब दैनिक भास्कर न्यूज पेपर हाथ में आया तो यहाँ भी महिला सशक्तीकरण को रंगों से कुछ इस प्रकार से जुडा हुआ पढने में आया-


हरा रंग - जिन्दगी का प्रतीक
एक लीडर की जिजीविषा ही उसे आगे बढाती है.
स्त्री जिंदगी की मुश्किलों का सामना करना और उन्हे हराना बखूबी जानती है ।

बैंगनी रंग - रहस्य का प्रतीक
लीडर को रहस्य छुपाने का हुनर भी आना चाहिये.
स्त्री इस हुनर में पारंगत है । मन में कई रहस्य छुपाकर रख सकती है ।

नीला रंग - सच का प्रतीक
सच्चाई लीडर को कठिन परिस्थिति में भी मजबूत रखती है.
स्त्री सच का सामना करना जानती है और उसके लिये लडना भी ।

नारंगी रंग - प्रतिबद्धता का प्रतीक
प्रतिबद्धता, लीडर बनने के लिये सबसे बडी आवश्यकता.
स्त्री बचपन से ही प्रतिबद्ध, इसलिये उसमें यह गुण रचा-बसा होता है ।

जामुनी रंग - पूर्वाभास का प्रतीक
पूर्वाभास मुश्किलों से जूझने में मदद करता है.
स्त्री की छठी इन्द्री तेज होती है जो हर खतरे को सबसे पहले भांप लेती है ।


       निस्संदेह महिला सशक्तीकरण को इस प्रकार इन रंगों से जोड कर देखा गया है किन्तु फिर भी दिमाग में यह रहस्य कायम ही रह जाता है कि इस प्रस्तुति अथवा इस दिन के लिये (जैसे महिला मंडल की मीटिंग में बहुरंगी ड्रेसकोड के रुप में) रंगों को अतिरिक्त महत्व आखिर क्यों दिया गया ? जबकि पुरुषों की भी ऐसी अनेक विशेषताएँ दैनंदिनी जीवन में उसे उन्नति की ओर आगे बढाने में देखी व गिनी जाती हैं ।

      क्या विद्व पाठकों में कोई टिप्पणी के माध्यम से इस दिन हेतु रंगों के विशेष उल्लेख के सुस्पष्ट कारणों पर रोशनी डाल सकते हैं ?

      महिला सशक्तीकरण दिवस पर विशेष शुभकामनाओं सहित...

5 टिप्पणियाँ:

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

रंग बिरंगी भाव भरी है दुनिया सारी..

शालिनी कौशिक ने कहा…

thanks

vandana gupta ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा शनिवार (9-3-2013) के चर्चा मंच पर भी है ।
सूचनार्थ!

Pallavi saxena ने कहा…

"नारी" के चरित्र में ही जीवन के सारे रंग भर दिये हैं ईश्वर ने इसलिए "नारी" के बिना हर घर आगन सुना है, हर रिश्ता बेगाना, फिर उसकी तुलना तो किसी भी चीज़ से की ही नहीं जा सकती केवल इन्द्र धनुष के रंगों को उसके चरित्र का एक पहलू या प्रतीक ही बताया जा सकता है।

रविकर ने कहा…

nice

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