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शनिवार, 23 मार्च 2013

सच्चाई - जिन्दगी और मौत की...


जिन्दा थे तो किसी ने पास बैठाया नहीं,
अब सभी मेरे चारों ओर बैठे जा रहे हैं.

पहले कभी किसी ने मेरा हाल न पूछा,
अब सभी आंसू बहाए जा रहे हैं.

एक रुमाल भी भेंट नहीं किया, जब हम जिन्दा थे,
अब शालें और कपडे उपर से उढाए जा रहे हैं.

सबको पता है कि ये शालें और कपडे इसके काम के नहीं,
पर फिर भी दुनियादारी निभाए जा रहे हैं.

कभी किसी ने एक वक्त का खाना तक नहीं खिलाया,
अब देशी घी मेरे मुँह में डाले जा रहे हैं.

जिन्दगी में एक कदम भी साथ न चल सका कोई,
अब फूलों से सजाकर कंधे पर उठाये जा रहे हैं.

आज पता चला कि मौत जिन्दगी से बेहतर है,
हम तो बेवजह ही जिन्दगी की चाह किये जा रहे थे.

4 टिप्पणियाँ:

शालिनी कौशिक ने कहा…

एक एक बात सही कही है आपने happy holi . आभार अमिताभ बच्चन :सामाजिक और फ़िल्मी शानदार शख्सियत .महिला ब्लोगर्स के लिए एक नयी सौगात आज ही जुड़ें WOMAN ABOUT MAN

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

जीवन तो जीने को मिला है..

Ratan singh shekhawat ने कहा…

एक बार एक मित्र ने समाज के बारे में चर्चा करते हुए कहा- यह समाज बस इसी एक दिन अंतिम यात्रा निकालने में काम आता बाकि तो पूरी जिन्दगी व्यक्ति को तंग ही करता है|

एक विरोधाभासी स्वभाव वाला राजा

काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…

:(

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