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शुक्रवार, 29 मार्च 2013

अब भी कायम है दुनिया में भरोसा


अब भी पेडों के भरोसे पक्षी
सब कुछ छोड जाते हैं

बसंत के भरोसे वृक्ष
बिल्कुल रीत जाते हैं

पतवारों के भरोसे नाव
सागर भी लांघ जाती है

बरसात के भरोसे बीज
धरती में समा जाते हैं



 और

अनजान पुरुष

के पीछे

सदा के लिये 

स्त्री चल देती है. 

8 टिप्पणियाँ:

प्रतिभा सक्सेना ने कहा…

भरोसे पर ही दुनिया क़ायम है,यह न हो तो सब बिखर जाए!

पी.सी.गोदियाल "परचेत" ने कहा…

वाकई बड़े पते की बात कही आपने, एक पल को सोचने लगे !

vandana gupta ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा शनिवार (30-3-2013) के चर्चा मंच पर भी है ।
सूचनार्थ!

अजय कुमार झा ने कहा…

सच आपने तो भरोसे पर भरपूर भरोसा दिला दिया । प्रकृति से लेकर मानव तक सब भरोसे के भरोसे ही चल रहे हैं । गजब के विचार

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

विश्वास जीवन को जीवन्त रखता है।

Manav Mehta 'मन' ने कहा…

बहुत बढ़िया

Pratibha Verma ने कहा…

बहुत सुन्दर....होली की हार्दिक शुभकामनाएं ।।
पधारें कैसे खेलूं तुम बिन होली पिया...

Kalipad "Prasad" ने कहा…


भरोसे से आज तक काम होते आये है भविष्य में क्या होगा पता नहीं
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