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रविवार, 14 अप्रैल 2013

जिन्दगी का फलसफा...


कालेज लाईफ होती है रिलायन्स की तरह,
 
करलो दुनिया मुट्ठी में...



बेचलर लाईफ है एअरटेल की तरह,

ऐसी आजादी और कहाँ...



एंगेजमेंट के बाद है आईडिया की तरह,

जो बदल दे आपकी जिन्दगी...


शादी के बाद हो जाती हच की तरह,

जहाँ भी आप जाएँ, नेटवर्क हमेशा साथ...


बच्चों के आगमन के बाद तो BSNL की तरह,

सभी लाईनें व्यस्त हैं...


जीवन के हर पडाव में आनन्दित रहने का प्रयास करें.


क्योंकि जो आज है वो कल नहीं रहेगा...
 


टेस्ट करें या वेस्ट करें


इसे तो ऐसे ही चलते रहना है...


जीवन चलने का नाम...

6 टिप्पणियाँ:

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

बहुत खूब, जीवन का दार्शनिक पक्ष बड़े हल्के में बता दिये।

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

बहुत खूब, जीवन का दार्शनिक पक्ष बड़े हल्के में बता दिये।

सरिता भाटिया ने कहा…

बहुत खूब जिंदगी का फलसफा पढ़ कर मजा आ गया
पधारें मेरे अंगना
http://guzarish6688.blogspot.in/

manoj jaiswal ने कहा…

बेहद सुन्दर सर,यही जिंदगी के रंग है।

सरिता भाटिया ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि क़ी चर्चा सोमवार [15.4.2013]के चर्चामंच1215 पर लिंक क़ी गई है,
अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए पधारे आपका स्वागत है | सूचनार्थ..

CS Devendra K Sharma "Man without Brain" ने कहा…

hahaha

badhiya

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