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सोमवार, 22 अप्रैल 2013

तेरे बिन सूने नयन हमारे...

            बाल्यावस्था से वृद्धावस्था तक और इन्सानों से लगाकर पशु-पक्षियों तक अपने प्रेम का इजहार करती बोलती तस्वीरें, प्रेम की अभिव्यक्ति में पगी विभिन्न दोहावलियों के साथ...


मीरा देखी राधा देखी, प्रेम में बारम्बार
एक जहर का प्याला पी गई, दूजी सुध-बुध हार




प्रेम वफा की खुशबू है, ये हर दिल को महकाय
खुशबू वो न जान, जिसका दिल पत्थर हो जाय


प्रेम नहीं बेचा जाता, प्रेम बड़ा अनमोल
प्रेम ऐसा भाव है जो, मिलता है बिन मोल


प्रेम में विष है, किंतु साथ है ईश्वर का भी वास
शंकर सा कंठ जानिए, प्रभु कंठ विश्वास
 

  
प्रेम वो जल है जिसमें डूबे, मन निर्मल हो जाय
लाख नहा लो गंगा वर्ना, मन का द्वेष न जाय


तलवार नहीं चलती इसमें, न पड़ता तीर चलाय
जो सब अपना हार गए, तो जग फिर जीता जाय




3 टिप्पणियाँ:

निवेदिता श्रीवास्तव ने कहा…

पुरवाई का एहसास .........

Minakshi Pant ने कहा…

अहसासों के रंग जिंदगी के संग |

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

प्यार के दो पल प्रतीक्षित

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