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गुरुवार, 4 अप्रैल 2013

फेसबुक फटाका - बीबी-ओ-बीबी.


              हर दिन दुनिया भर के लोग अपने-अपने दायरे में संचित ज्ञान व चुटीली मनोरंजक सामग्री फेसबुक पटल पर परोस रहे हैं किन्तु अधिकांश के हिस्से तक सिर्फ उतनी ही सामग्री पहुँच पाती है जितना बडा उनका फ्रेंड सर्कल है, और जाहिर है कि सबका सर्कल एक जैसा नहीं हो सकता । यदि ब्लाग-जगत के चिर-परिचित नामों से हटकर देखा जावे तो सभीके पारिवारिक सर्कल, उनके अपने शहर व समाज के सर्कल बिल्कुल भिन्न हो जाते हैं और यहीं से इन उपयोगी, मनोरंजक और ज्ञानवर्द्धक जानकारियों की दिशाएँ बदलती चली जाती हैं याने जो सामग्री आप तक पहुँच रही है वह जरुरी नहीं कि मुझ तक भी पहुँच रही हो ऐसे ही मुझ तक पहुँचने वाली ऐसी महत्वपूर्ण सामग्री आप तक भी पहुँची हो यह कतई आवश्यक नहीं है जबकि ये जानकारियां हममें से सभी के लिये उतनी ही ज्ञानवर्द्धक, मनोरंजक और संदेश-प्रदायक हो सकती हैं, अतः ऐसी संचित कुछ चुनिन्दा सामग्री हम इस ब्लाग तक भी लाने का प्रयास कर रहे हैं । कोशिश ये है कि इस माध्यम से न सिर्फ ये संग्रहित रहे बल्कि जिन नजरों से ये नहीं गुजर पाई है उन तक भी इन उपर्युक्त विधाओं के छोटे-छोटे संदेश पहुँच सकें, अतः ये आपके द्वारा पहले से देखे हुए भी हो सकते हैं और नहीं भी हो सकते हैं । इसलिये बिना किसी नुक्ताचीनी के आप इनका रसास्वादन करें यदि ये आपको पसंद आते हैं तो आपके हैं अन्यथा मेरे संग्रह के तो ये हैं ही...
  
 बीबियों की बहुमत में दिखती चिरपरिचित व्यथा...

सबसे परफेक्ट आदमी - उसके पापा.

सबसे दुःखी आदमी   -  उसका भाई.

सबसे किस्मत वाला आदमी    -  उसकी बहन का पति.

और सबसे झूठा, कंजूस और वाहियात आदमी - 

अब यह भी बताना पडेगा क्या ?



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