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मंगलवार, 30 अगस्त 2016

"अर्थव्यवस्था पर भारी आस्था"


            हमारे देश में रोज न जाने कितनी रेलगाडियां न जाने कितनी नदियों को पार करती हैं और उनके यात्रियों द्वारा हर रोज नदियों में सिक्के फेंकने का चलन दिखाई देता रहता है ।  अगर रोज के सिक्को के हिसाब से गणना की जाये तो ये रकम कम से कम दहाई के चार अंको को तो पार करती होगी । 

            सोचो अगर इस तरह हर रोज भारतीय मुद्रा ऐसे फेंक दी जाती है तो इससे भारतीय अर्थव्यवस्था को कितना नुकसान पहुँचता होगा ?  ये तो कोई अर्थशास्त्री ही बता सकता है । लेकिन एक रसायनज्ञ होने के नाते मैं जरूर लोगों को सिक्के की धातु के बारे में जागरूक कर सकता हूँ ।

             वर्तमान सिक्के 83% लोहा और 17 % क्रोमियम के बने होते है । आप सबको ये बता दूँ कि क्रोमियम एक भारी जहरीली धातु है ।

            क्रोमियम दो अवस्था में पाया जाता है, एक Cr (III) और  दूसरी Cr (IV) पहली अवस्था जहरीली नही मानी गई बल्कि क्रोमियम (IV) की दूसरी अवस्था 0.05% प्रति लीटर से ज्यादा हमारे लिए जहरीली है, जो सीधे कैंसर जैसी असाध्य बीमारी को जन्म देती है ।


            सोचिये एक नदी जो अपने आप में बहुमूल्य खजाना छुपाये हुए है उसका हमारे एक दो रूपये फेंकने से कैसे  भला हो सकता है ? अलबत्ता पूर्वकाल में सिक्के फेंकने का वास्तविक चलन तांबे के सिक्के फेकने से शुरु हुआ था ।


            एक समय मुगलकालीन समय में दूषित पानी से बीमारियां फैली थी तो, राजा ने प्रजा के लिए ऐलान करवाया कि हर व्यक्ति को अपने आसपास के जल के स्रोत या जलाशयों में तांबे के सिक्के को फेकना चाहिये, क्योंकि तांबा जल को शुद्ध करने वाली सबसे अच्छी धातु है ।


            आजकल सिक्के नदी में फेंकने से हम उसके ऊपर किसी तरह का उपकार नहीं बल्कि जलप्रदूषण और बीमारियों को बढ़ावा दे रहे हैं । इसलिए आस्था के नाम पर भारतीय मुद्रा को हो रहे नुकसान को रोकने की जिम्मेदारी हम सब नागरिकों की है और हमें देशहित में नदी में पैसे नहीं डालने चाहिए बल्कि इस कुप्रथा को रोककर देश की मुद्रा के साथ ही नदियों को शुद्ध रखने में सहयोग करना चाहिये ।


सोर्स : WhatsApp.

         

3 टिप्पणियाँ:

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

बढ़िया ।

राजा कुमारेन्द्र सिंह सेंगर ने कहा…

आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन 'वीर कनाईलाल की शहादत और ब्लॉग बुलेटिन’ में शामिल किया गया है.... आपके सादर संज्ञान की प्रतीक्षा रहेगी..... आभार...

HindIndia ने कहा…

बहुत ही उम्दा .... बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति ..... Thanks for sharing this!! :) :)

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