सुखी वो नहीं है जिसके पास बहुत कुछ है, बल्कि जिसके पास जो कुछ है उससे संतुष्ट
रहने वाला ही सुखी है ।
सन्तोष का ही दूसरा नाम सुख है, इसीलिये हम दीवारों पर ये उपदेश देखते हुए ही बडे हुए हैं- "सन्तोषी सदा सुखी"
असन्तुष्ट व लालची स्वभाव के व्यक्ति कितने भी धन व साधन सम्पन्न हो जावें किन्तु सुखी नहीं रह सकते ।
इसलिये 'हाजिर में हुज्जत नहीं और गैर में तलाश नहीं' के द्येयवाक्य को आत्मसात करके जीवन में सुखी रहा जा सकता है ।
इस सन्दर्भ में सुश्लोक सूत्र भी देखिये-
माल
अंट में - ज्ञान कंठ में.
दाम्पत्य जीवन में सुखी रहने के लिये छोटी दिखने वाली बडी बातें-
दाम्पत्य जीवन में सुखी रहने के लिये छोटी दिखने वाली बडी बातें-
जिन दम्पत्तियों का दामपत्य जीवन स्वस्थ होता है उनका पारिवारिक जीवन भी
स्वस्थ व सुखी रहता है जिससे वे स्वयं ही नहीं बल्कि उनकी सन्तान भी स्वस्थ व सुखी
रह पाती है । दाम्पत्य जीवन के स्वास्थ्य को बेहतर बनाये रखने के लिये कुछ
छोटी-छोटी बातों को ध्यान में रखकर हमेशा बेहतर परिणाम हासिल किये जा सकते हैं-
* सिर्फ अहम् भाव के कारण व अकारण अपने जीवन
साथी की बात का विरोध न करें । पहले बात को पूरी समझने का प्रयास करें और बात यदि
अच्छी लगे या सही लगे तो उसे सहज भाव से स्वीकार कर लें ।
* जब तक बहुत जरुरी न हो पति को अपनी पत्नि के मायके वालों की निन्दा या उपहास नहीं करना चाहिये बल्कि समय आने पर उनकी प्रशंसा व उनके घर आने पर उचित आवभगत करना चाहिये इससे गृहलक्ष्मी वास्तविक रुप से प्रसन्न रहती है ।
* पति को पत्नि के साथ अपना व्यवहार ऐसा रखना चाहिये जिससे कि वह कभी हीन भावना से ग्रस्त न हो बल्कि उसका आत्मविश्वास बना रहे और उसके मन में यह भावना कायम रहे कि वह अपने परिवार का उपयोगी अंग है और घर-परिवार में उसका अपना महत्व है, मान-सम्मान है ।
* परिवार से सम्बन्धित मामलों में पति को पत्नि से सलाह अवश्य लेना चाहिये जिससे कि वह अपने को कभी उपेक्षित न समझे । इसी प्रकार पत्नि को भी अपने पति से सलाह-मशविरा लेकर ही कोई काम करना चाहिये इससे दोनों के जीवन में सुमति और सौमनस्य कायम रहता है और अकारण वाद-विवाद व कलह की स्थिति निर्मित नहीं होती ।
* जिन दम्पत्तियों में सुमति और सौहार्द्र वना रहता है वहाँ खुशहाली भी बनी रहती है इसके विपरित जहाँ कुमति और कलह रहती है वहां नाना प्रकार की विपत्तियां और तकलीफें भी बनी ही रहती हैं ।
ब्रम्हपुराण में कहा गया है कि-
दमपत्योः समता नास्ति यत्र-तत्र ही मन्दिरे,
अलक्ष्मीस्तत्र
तत्रेव विफलं जीवनंतयो.
अर्थात् जिस घर में पति-पत्नि में समता नहीं है वहाँ निर्धनता रहती है और उन दम्पत्ति का जीवन निष्फल हो जाता है ।
अर्थात् जिस घर में पति-पत्नि में समता नहीं है वहाँ निर्धनता रहती है और उन दम्पत्ति का जीवन निष्फल हो जाता है ।
नजीर अकबराबादी के इस शेर को देखिये-
जो दीन में पूरे हैं वह हर हाल में खुश हैं,
हर काम में, हर दाम में, हर हाल में खुश हैं,
गर माल दिया यार ने तो माल में खुश हैं,
बरबादी के भी हाल और अहवाल में खुश हैं,
भूख में और प्यास में, तर माल में खुश हैं,
पूरे हैं वही लोग जो हर हाल में खुश हैं,
हर काम में, हर दाम में, हर हाल में खुश हैं,
गर माल दिया यार ने तो माल में खुश हैं,
बरबादी के भी हाल और अहवाल में खुश हैं,
भूख में और प्यास में, तर माल में खुश हैं,
पूरे हैं वही लोग जो हर हाल में खुश हैं,
जीने की नहीं पर्वाह, मरने का नहीं गम,
यकसां है उन्हे जिन्दगी और मौत का आलम,
वाकिफ न बरस से न महिनों से वो इक दम,
ना रात में मुश्किल है ना दिन का कभी मातम,
दिन, रात, घडी, पहर, माहों साल में खुश हैं,
पूरे हैं वही लोग जो हर हाल में खुश हैं ।

