सोमवार, 21 फ़रवरी 2011

लघु कथा- प्रार्थना विधि.

           एक समय किसी जहाज के दुर्घटनाग्रस्त हो जाने के बाद तीन व्यक्ति अपना सब कुछ खोकर बहते-बहते एक निर्जन टापू पर जा पहुँचें । वह टापू प्राकृतिक सम्पदाओं से ओतप्रोत होने के कारण विभिन्न प्रकार के स्वादिष्ट फलों से भरपूर वृक्षों से परिपूर्ण भी था । अतः वे तीनों व्यक्ति वहीं बस गये । संयोगवश वहाँ तीन पत्थर भी जमीन में गहराई तक गडे थे अतः उन तीनों व्यक्तियों की नित्य-पूजा भी उन पत्थरों के समीप होने लगी । 

          प्रतिदिन वे तीनों व्यक्ति अपनी आवश्यक दैनिक क्रियाओं से फारिग होने के बाद बडी लगन से उन पत्थरों के समीप बैठकर एक ही प्रार्थना करते थे- You are three,  We are three. (यू आर थ्री, वी आर थ्री) । दिन गुजर रहे थे । संयोगवश उधर से गुजरते हुए एक जहाज के यात्री उस टापू के मनोरम वातावरण को देखकर कुछ समय के लिये वहाँ रुक गये । वहाँ उन यात्रियों ने जब इन तीन टापू वासियों को वहाँ आराम से रहते देखा तो उन्होंने भी जल्दी रवाना होने की चिन्ता छोडकर कुछ अधिक दिनों तक वहाँ रुकने का मन बनाया और उन तीनों व्यक्तियों के साथ वहाँ छुट्टियां व्यतीत करने जैसे माहौल में उनके साथ रुक गये ।
 
          जब उन्होंने उन तीनों व्यक्तियों को वहाँ प्रार्थना में ये कहते हुए सुना कि You are three,  We are three. (यू आर थ्री, वी आर थ्री) तो जहाज के उन यात्रियों को बडा अटपटा लगा । उन्होंने उन तीनों को समझाया कि भाई देव-उपासना ऐसे नहीं करते हैं और फिर उन्हें प्रार्थना कि वे समस्त विधियां जो वे जानते थे उन तीनों को समझाई । दो-चार दिन जब तक उस जहाज के यात्री वहाँ रुके रहे तब तक वे तीनों प्राणी उन यात्रियों के साथ ही उनकी शैली में ही अपनी उपासना करते रहे ।

          जब उस जहाज के यात्रियों की रवानगी का समय आया तो वे उन तीनों साथियों से बिदा लेकर अपने रास्ते पर आगे की ओर बढ गये । इधर उनके जाने के बाद जब इन तीनों निवासियों की उपासना का वक्त आया तो उनके समझाये हुए सारे श्लोक व विधियां वे भूल गये, अब ? उन्होंने सोचा कि एक बार फिर से उन यात्रियों से ही प्रार्थना की विधि और समझ ली जावे । ये सोचकर वे तीनों उनके जहाज के पीछे दौड पडे ।
 
          इधर जहाज के वे यात्री जिन्हें वह टापू छोडे कई घंटे गुजर चुके थे ये देखकर हक्का-बक्का रह गये कि टापू पर निवास कर रहे वे तीनों निवासी पानी के उपर ऐसे दौडते चले आ रहे हैं जैसे सडक पर दौड रहे हों । उन्होंने अपना जहाज रुकवाया । नजदीक आकर जब उन तीनों टापू वासियों ने उन जहाजी यात्रियों से कहा कि भाई आपकी बताई गई पूजा की विधियां और श्लोक व भजन हम भूल रहे हैं । आप कृपा करके एक बार हमें वे सब और समझा दें । अब तो उस जहाज के सभी यात्रियों नें उन तीनों टापू निवासियों के पैर पकड लिये और बोले भाई गल्ति हमसे ही हो गई । हमारी पूजा तो ऐसी ही है लेकिन वास्तविक पूजा तो जो तुम लोग आज तक करते आ रहे हो You are three,  We are three. (यू आर थ्री, वी आर थ्री) वही सही है और आप लोग अपनी वही पूजा करते रहो ।
 
          *     ईश्वर की वास्तविक प्रार्थना (पूजा) किसी विधि-विधान की मोहताज नहीं होती है ।

लघुकथा- धैर्य (धीरज)


कबीरा धीरज के धरे, हाथी मन भर खाय
टूक एक के कारने, श्वान घरे घर जाय ।

       एक व्यापारी जब अपने कार्यालय में मौजूद थे तो उनके किसी निकट परिचित के रेफरेंस पर एक बीमा एजेन्ट उनके पास पहुँचा । अपना परिचय देने के बाद एजेन्ट उस व्यापारी को बीमा पालिसी बेचने के लिये बीमे के लाभ बताने का प्रयास करने लगा । व्यापारी की उस बीमा पालिसी में कोई रुचि नहीं थी, किन्तु स्पष्ट मना कर देने पर उस परिचित को बुरा लगने का अंदेशा था अतः व्यापारी ने अपनी व्यस्तता का बहाना बनाकर बीमा एजेन्ट को बाद में आने को कहा । बीमा एजेन्ट अभिवादन करके चला गया और उस व्यापारी के बताये समय पर फिर आकर अपना प्रयास दोहराने लगा ।

      व्यापारी ने इस बार उसे थोडी बेरुखी से टालकर फिर अगली बार आने को कहा जब व्यापारी द्वारा निरन्तर दिखाई जाती बेरुखी और बाद में बुलाए जाने का यह सिलसिला 6-8 बार रिपीट हो चुकने के बाद भी एजेन्ट का उसके बुलाए समय पर आने व अपने प्रयास को दोहराने का सिलसिला बन्द नहीं हुआ तो अगली बार उस एजेन्ट के आते ही व्यापारी कुछ क्रोधित अवस्था में उठकर बाहर जाने लगा । सर एक बार आप इस पालिसी के लाभ समझ तो लें. कहते हुए एजेन्ट ने फिर अपनी कोशिश की । अब तो उन व्यापारी का गुस्सा उनकी बर्दाश्त के बाहर हो गया और उन्होंने उसे धकेलते हुए कहा- मुझे तुम्हारी कोई बात नहीं सुननी तुम यहाँ से जाते हो कि नहीं ? आवेश में व्यापारी द्वारा अचानक धकेले जाने पर एजेन्ट अपना सन्तुलन नहीं रख पाया और गिर पडा । वहीं रखे एक स्टूल का कोना एजेन्ट के सिर से तेजी से टकराया और एजेन्ट के सर पर चोट का निशान दिखने लगा । अब व्यापारी महोदय की सिट्टी-पुट्टी गुम हो गई, ऐसा तो उन्होंने कभी चाहा ही नहीं था । ये क्या हो गया ?
  
       तभी एजेन्ट ने उठकर अपना घाव सहलाते हुए उन व्यापारी महोदय से कहा- कोई बात नहीं सर, यदि आपकी इच्छा नहीं है तो मैं चला जाता हूँ लेकिन बेहतर होता आप एक बार इसके लाभ समझ तो लेते । अत्यन्त लज्जित अवस्था में व्यापारी उस एजेन्ट को अपने केबिन में ले गये और चेक पर साईन करके उन्होंने उस बीमा एजेन्ट के सामने रखकर कहा- आप जो और जितने की पालिसी मेरे लिये बेहतर समझें उसका फार्म भरलें मैं साईन कर देता हूँ ।

      धीरज का परिणाम-   आशातीत सफलता.

        वैसे धीरज उस मनोवृत्ति का भी नाम है कि सडक पर गाडी चलाते समय जब हम अपने पीछे वाले ड्राईवर को इसका पालन करते देखते हैं तो मन ही मन उसकी प्रशंसा करते हैं और जब अपने आगे वाले ड्राईवर को इस मनोवृत्ति से गाडी चलाते देखते हैं तो उसे कोसने लगते हैं ।



बुधवार, 16 फ़रवरी 2011

अनमोल बोल - 2.. प्रभुकृपा

-:   प्रभु-कृपा   :-   



 मैंने प्रभु से मांगी शक्ति 
उन्होंने मुझे दी कठिनाईयां,
हिम्मत बढाने के लिये.


मैंने प्रभु से मांगी बुद्धि
उन्होंने मुझे दी उलझनें,
सुलझाने के लिये.


मैंने प्रभु से मांगी समृद्धि
उन्होंने मुझे दी समझ,
काम करने के लिये.


मैंने प्रभु से मांगा प्यार
उन्होंने मुझे दिए दुःखी लोग,
मदद करने के लिये.


मैंने प्रभु से मांगी हिम्मत
उन्होंने मुझे दी परेशानियां,
उबर पाने के लिये.


मैंने प्रभु से मांगा वरदान
उन्होंने मुझे दिये अवसर
उन्हें पाने के लिये.


वो मुझे नहीं मिला जो मैंने मांगा था.
मुझे वो मिल गया जो मुझे चाहिये था.

गुरुवार, 10 फ़रवरी 2011

चित्र-2. कोई मेरी भी शादी करादे...



सकारात्मक आज-

      जीतने वाले कोई अलग काम नहीं करते

बल्कि

    वे हर काम को अलग तरीके से करते हैं

शिव खेडा


सोमवार, 7 फ़रवरी 2011

अनमोल बोल - 1. अमूल्य विचार.


तीन स्तम्भ जीवन के-

जीवन में तीन स्थाई मित्र हैं-
       बूढी पत्नि,  
             पुराना कुत्ता   
                              और   
                          पास का धन.


मनुष्य के तीन सद्गुण हैं-
          आशा,  
                विश्वास   
                            और  
                           दान.


चिन्ता से तीन चीजों का नाश होता है-
                    रुप,   
                        बल   
                                 और   
                              ज्ञान.

शनिवार, 5 फ़रवरी 2011

याद ये रखना... भूल न जाना...!

            जीवन की इस यात्रा में हर प्राणी जिस एकमात्र चाहत के साथ हर समय प्राण-प्रण से लगा दिखता है वह क्या है ? वह एकमात्र चाहत है सुख की तलाश और जितना वह इस तलाश के पीछे भाग रहा है उतना ही वह दुःखों के भंवर में डूबता भी जा रहा है । आखिर ऐसा क्यों हो रहा है । जाने पहचाने कारणों के आधार पर दिल व दिमाग की कैसेट को रिवाईन्ड करके देखिये-


दुःखी रहने के रास्ते
 
देरी से सोना और देरी से उठना ।
लेन-देन का हिसाब न रखना ।
किसी के लिये कुछ ना करना ।
हमेशा स्वयं के लिये ही सोचना ।
स्वयं की बात को ही सत्य बताना ।
किसी का विश्वास न करना ।
बिना कारण झूठ बोलना ।
कोई भी काम समय से न करना ।
बिना मांगे सलाह देना ।
भूतकाल के सुख को बार-बार याद करना ।


सुखी रहने के रास्ते

काम में सदैव व्यस्त रहो ।
बहुत कम बोलो ।
कभी-कभी ना बोलना भी सीखो ।
अपनी गल्ति स्वीकार करो ।
व्यवहारिक बनो ।
पहले लिखो, बाद में दो ।
सबकी राय लेकर निर्णय लो ।
सबको सम्मान से बुलाओ ।
जरुरत न हो उसकी खरीदी न करो ।
सोचो, फिर बोलो ।

        यदि आप निराश होने की आदत नहीं रखते, अपने खर्च आमदनी के अनुसार करते हुए भी कुछ हिस्सा बचाकर रखते हैं, संयम, परिश्रम और धैर्य के साथ प्रयत्न करते रहते हैं । आज का काम कल पर नहीं छोडते और ईश्वर को अपने करीब समझते हैं तो आप स्वस्थ और सुखी जीवन जिएंगे और हर हाल में मस्त रहेंगे इसमें कोई संदेह नहीं है ।

बुधवार, 2 फ़रवरी 2011

चित्र-1. शीर्षक खोज.

        आज एक मित्र ने ई-मेल से ये चित्र भेजा है जो पर्याप्त रोचक लग रहा है । जाने-पहचाने चेहरे हैं और बडी अच्छी कल्पना भी । तो आप भी ये चित्र देखें-


       
और सोचकर बतावें कि इसे क्या शीर्षक दिया जा सकता है ?

चित्र सौजन्य- Arif C

इलाज...!

        एक महिला ने अपने पति का मोबाइल चेक किया तो फोन  नंबर कुछ अलग ही तरीके से  Save किये हुए दिखे, जैसे :-         आँखों का इलाज ...