जीवनशैली : सुख-दुःख लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
जीवनशैली : सुख-दुःख लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

शनिवार, 5 फ़रवरी 2011

याद ये रखना... भूल न जाना...!

            जीवन की इस यात्रा में हर प्राणी जिस एकमात्र चाहत के साथ हर समय प्राण-प्रण से लगा दिखता है वह क्या है ? वह एकमात्र चाहत है सुख की तलाश और जितना वह इस तलाश के पीछे भाग रहा है उतना ही वह दुःखों के भंवर में डूबता भी जा रहा है । आखिर ऐसा क्यों हो रहा है । जाने पहचाने कारणों के आधार पर दिल व दिमाग की कैसेट को रिवाईन्ड करके देखिये-


दुःखी रहने के रास्ते
देरी से सोना और देरी से उठना ।
लेन-देन का हिसाब न रखना ।
किसी के लिये कुछ ना करना ।
हमेशा स्वयं के लिये ही सोचना ।
स्वयं की बात को ही सत्य बताना ।
किसी का विश्वास न करना ।
बिना कारण झूठ बोलना ।
कोई भी काम समय से न करना ।
बिना मांगे सलाह देना ।
भूतकाल के सुख को बार-बार याद करना ।


सुखी रहने के रास्ते

काम में सदैव व्यस्त रहो ।
बहुत कम बोलो ।
कभी-कभी ना बोलना भी सीखो ।
अपनी गल्ति स्वीकार करो ।
व्यवहारिक बनो ।
पहले लिखो, बाद में दो ।
सबकी राय लेकर निर्णय लो ।
सबको सम्मान से बुलाओ ।
जरुरत न हो उसकी खरीदी न करो ।
सोचो, फिर बोलो ।

        यदि आप निराश होने की आदत नहीं रखते, अपने खर्च आमदनी के अनुसार करते हुए भी कुछ हिस्सा बचाकर रखते हैं, संयम, परिश्रम और धैर्य के साथ प्रयत्न करते रहते हैं । आज का काम कल पर नहीं छोडते और ईश्वर को अपने करीब समझते हैं तो आप स्वस्थ और सुखी जीवन जिएंगे और हर हाल में मस्त रहेंगे इसमें कोई संदेह नहीं है ।

ऐतिहासिक शख्सियत...

पागी            फोटो में दिखाई देने वाला जो वृद्ध गड़रिया है    वास्तव में ये एक विलक्षण प्रतिभा का जानकार रहा है जिसे उपनाम मिला था...