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बुधवार, 29 मई 2013

सट्टा, आतंक, रेप, करप्शन...


 
व्यंग : कस्मे, वादे, प्यार, वफा सब...

सट्टा, आतंक, रेप, करप्शन,
रुके कभी हैं रुकेंगे क्या...
कितना भी लिखलो चिल्लालो,
दिखेंगे नारे, नारों का क्या.

                                                सट्टा, आतंक...

होंगे लाखों विरोध में इनके
फिर भी ना रुक पाएंगे
कभी किसीके कभी किसीके
स्वार्थ इन्हें बढाएंगे
 
जो देखेगा लाठी हाथ में, 
वो ही दांव दिखाएगा.
                                           सट्टा, आतंक...

लुटने वाला दुःखी रोएगा
लूटे वो मुस्काएगा
जहाँ-तहाँ वो बांट के हिस्सा
खुदको पाक बचाएगा

रोते रहेंगे लाखों देश में, 
वो फिर भी मुस्काएगा...
सट्टा, आतंक, रेप, करप्शन,
रुके कभी हैं रुकेंगे क्या...

बुधवार, 22 मई 2013

अविश्वसनीय और अकल्पनीय...

            गणित के ये चमत्कारिक परिणाम...  

             1 x 8 + 1 = 9
        12 x 8 + 2 = 98
        123 x 8 + 3 = 987
        1234 x 8 + 4 = 9876
        12345 x 8 + 5 = 98765
        123456 x 8 + 6 = 987654
        1234567 x 8 + 7 = 9876543
        12345678 x 8 + 8 = 98765432
        123456789 x 8 + 9 = 987654321

            1 x 9 + 2 = 11
       12 x 9 + 3 = 111
       123 x 9 + 4 = 1111
       1234 x 9 + 5 = 11111
       12345 x 9 + 6 = 111111
       123456 x 9 + 7 = 1111111
       1234567 x 9 + 8 = 11111111
       12345678 x 9 + 9 = 111111111
       123456789 x 9 +10= 1111111111

         9 x 9 + 7 = 88
      98 x 9 + 6 = 888
      987 x 9 + 5 = 8888
       9876 x 9 + 4 = 88888
       98765 x 9 + 3 = 888888
        987654 x 9 + 2 = 8888888
         9876543 x 9 + 1 = 88888888
         98765432 x 9 + 0 = 888888888

          1 x 1 = 1
       11 x 11 = 121
        111 x 111 = 12321
         1111 x 1111 = 1234321
          11111 x 11111 = 123454321
           111111 x 111111 = 12345654321
           1111111 x 1111111 = 1234567654321
            11111111 x 11111111 =123456787654321
             111111111 x 111111111 =12345678987654321

     प्रस्तुतकर्ता : हँसमुख जैन 'गांधी'.
 

मंगलवार, 14 मई 2013

मानसिक शांति के लिये आवश्यक काम की 10 बातें...






उतना ही काटें जितना चबाया जा सके अर्थात्

उतना ही काम हाथ में लें जितना पूरा कर सकें.





किसी के काम में तब तक दखल न दें जब तक कि 

आपसे उस बाबद कुछ पूछा नहीं जाए.




माफ करना और कुछ बातों को भूल जाना भी सीखें.



हर कार्य में पहचान पाने की लालसा न रखें.




ईर्ष्या (जलन) की भावना से दूर रहें.




हर सुबह अपना कायाकल्प कीजिए- 

15 मिनिट योगासन+10 मिनिट प्राणायाम+15 मिनिट ध्यान= 

जीवन में आरोग्य, आनंद और उत्साह की मौजूदगी.




माहौल के मुताबिक खुदको ढालने का प्रयास करें.




अपने नियमित संपर्कों में जो लोग बदल नहीं सकते

न्हें सहन करना सीखें.




किसी काम को टालने से बचें 

और ऐसा भी कोई काम न करें

जिससे बाद में पछताना पडे.




दिमाग को यथासंभव खाली न रहने दें. 

(खाली दिमाग शैतान का घर)





शुक्रवार, 3 मई 2013

जिन्दगी की अमूल्य नेमत - दोस्ती...


           
दोस्त साथ है तो रोने में भी शान है
दोस्त ना हो तो महफिल भी श्मसान है,
सारा खेल इन दोस्तों का ही है वर्ना,
जनाजे और बारात, दोनों ही एक समान हैं ।

          जिसका कोई नहीं होता, उसका भगवान होता है. इसी प्रकार जिसका कोई नाते-रिश्तेदार नहीं होता उसका भी मित्र तो अवश्य होता ही है । यह ऐसा एकमात्र महत्वपूर्ण रिश्ता है जिसका चुनाव हम स्वयं करते हैं जबकि शेष सभी रिश्ते तो हमारे जन्म के साथ ही हमसे जुडे हुए मिलते हैं किन्तु दोस्ती का रिश्ता अपनी-अपनी रुचियों को ध्यान में रखकर हम स्वयं बनाते हैं, बेशक संयोगों की यहाँ भी कम महत्वपूर्ण भूमिका नहीं होती किन्तु फिर भी कुल मिलाकर जीवन का यह सर्वाधिक महत्वपूर्ण रिश्ता "दोस्ती" पूर्णतः ऐच्छिक ही रहता है । मित्रता के महत्वपूर्ण एहसास को बडे-बडे विचारकों से लगाकर हमारे-आपके जैसे सामान्य लोगों ने अपने अनुभवों और मान्यताओं के मुताबिक कैसे परिभाषित किया है । देखते हैं...
  हजारों की भीड में कम से कम एक मित्र तो ऐसा 
होना ही चाहिये कि यदि किसी विशेष विपरीत परिस्थिति में जब हजारों लोग हमारे खिलाफ खडे हो जावें तो वह एक तो हमारे साथ खडा दिख सके ।


सच्चा मित्र वह है जो दर्पण की तरह तुम्हारे दोषों 
को भी तुम्हें दिखाए । जो तुम्हारे अवगुणों को 
गुण बताए, वह तो खुशामदी है ।

  
ज्ञानवान मित्र ही जीवन का सबसे बड़ा वरदान है ।


 

मित्र वे दुर्लभ लोग होते हैं, जो हमारा हालचाल 
पूछते हैं और उत्तर सुनने को रुकते भी हैं । 



मित्र पाने की राह है, खुद किसी का मित्र बन जाना ।


सच्चे मित्र हीरे की तरह कीमती और दुर्लभ होते हैं, झूठे दोस्त तो पतझड़ की पत्तियों की तरह 
हर कहीं मिल जाते हैं ।


अपने मित्र को एकांत में नसीहत दो, लेकिन 
प्रशंसा (सही) खुलेआम करो ।


 मूर्ख मित्र से बुद्धिमान शत्रु हर स्थिति में अच्छा है ।


तुम्हारा अपना व्यवहार ही शत्रु अथवा मित्र 
बनाने के लिए उत्तरदायी है । 


मित्रता करने में धैर्य से काम लो । किंतु जब मित्रता कर ही लो, तो उसे अचल और दृढ़ होकर निभाओ ।


विदेश में विद्या मित्र होती है, घर में पत्नी मित्र होती है, रोगी का मित्र औषधि व मृतक का मित्र धर्म होता है।

और अंत में...

  




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