व्यंग : कस्मे, वादे, प्यार,
वफा सब...
सट्टा, आतंक,
रेप, करप्शन,
रुके कभी हैं रुकेंगे क्या...
कितना भी लिखलो चिल्लालो,
दिखेंगे नारे, नारों का क्या.
रुके कभी हैं रुकेंगे क्या...
कितना भी लिखलो चिल्लालो,
दिखेंगे नारे, नारों का क्या.
सट्टा, आतंक...
होंगे लाखों विरोध में इनके
फिर भी ना रुक पाएंगे
कभी किसीके कभी किसीके
स्वार्थ इन्हें बढाएंगे
फिर भी ना रुक पाएंगे
कभी किसीके कभी किसीके
स्वार्थ इन्हें बढाएंगे
जो देखेगा लाठी हाथ में,
वो ही दांव दिखाएगा.
सट्टा, आतंक...
सट्टा, आतंक...
लुटने वाला दुःखी रोएगा
लूटे वो मुस्काएगा
जहाँ-तहाँ वो बांट के हिस्सा
खुदको पाक बचाएगा
लूटे वो मुस्काएगा
जहाँ-तहाँ वो बांट के हिस्सा
खुदको पाक बचाएगा
रोते रहेंगे लाखों देश में,
वो फिर भी मुस्काएगा...
सट्टा, आतंक, रेप,
करप्शन,
रुके कभी हैं रुकेंगे
क्या...