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सोमवार, 25 जुलाई 2016

मारवाडी फटाके...




            सेठाणीजी नाराज होकर बोली - "जो म्हारो ब्याव कोई असली राक्षस सु भी हो जातो ना; तो भी वो मन्ने थारैसुं जादा सुखी रांखतो ।"

            मारवाड़ी सेठजी - यो तो बिलकुल ही कोनी हो सकतो थो । 


            सेठाणीजी - क्यू कोनी हो सकतो थो ? 


            सेठजी - अये बावळी ! आपणा लोगां में एक ही गोत्र में ब्याव कोनी होवै. ।




            एक बार एक Punjabi कुए में गिर गया... ...और जोर जोर से रोने लगा  !

            एक मारवाड़ी वहाँ से जा रहा था उसने आवाज सुनी तो रुका और बोला :  "कुण है भाई ?"

            Punjabi : अस्सी हाँ !

            मारवाड़ी:  "भाई ! थे एक-दो होता,  तो काड देतो...

            80 तो म्हारै बाप से बी कोणी निकळै !"  पड्या रेओ !




मारवाडी सीख :
                              
           1.   चौखी संगत में उठणो बैठणो । 

            2.   काम स काम राखणो ।  
                  
            3.   ऊड़तो तीर नही पकडनो । 

            4.   घणो लालच कोनी करणो । 

            5. सोच समझकर पग राखणो ।

            6. रास्ते आणो, रास्ते जाणो ।   
 
            7. जितो हो सके उतो कम बोलणो ।

            8. छोटा-मोटा को कायदो राखणो।
 
            9.   जितो पचे उतो ई खाणो । (पेट खुदको होवे ।)
   
            10.  पूच्छ्या बीना सलाह नी देणो । 

            11.  पराई पंचायती नी करणी ।

            12.  आटा मे लूण समावे, लूण मे आटो कोनी ।

            13.  पगा बलती देखणी ढूंगा बलती कोणी । 

            14.  बीच में ही लाडे की भुवा नी बणनो ।

            15.  सुणनी सबकी करणी मन की ।



अठे हर कोई भरे बटका
घुमाबा नहीं ले जावां, तो घराळी भरे बटका।
घराळी रो मान ज्यादा राखां, तो माँ भरे बटका।
कोई काम कमाई नहीं करां, तो बाप भरे बटका।
पॉकेट मनी नहीं देवां, तो बेटा भरे बटका।
कोई खर्चो पाणी नहीं करां, तो दोस्त भरे बटका।
थोड़ो सो कोई न क्यूं कह दयां, तो पड़ौसी भरे बटका।
पंचायती में नहीं जावां, तो समाज भरे बटका।
जनम मरण में नहीं जावां, तो सगा संबंधी भरे बटका।
छोरा छोरी नहीं पढ़े, तो मास्टर भरे बटका।
पुरी फीस नहीं देवां, तो डॉक्टर भरे बटका।
गाड़ी का कागज पानड़ा नहीं मिले, तो पुलिस भरे बटका।
मांगी रिश्वत नहीं देवां, तो अफसर भरे बटका।
टाइम सूं उधार नहीं चुकावां, तो सेठ भरे बटका।
टेमूं टेम किश्त नहीं चुकावां, तो बैंक मैनेजर भरे बटका।
नौकरी बराबर नहीं करां, तो बॉस भरे बटका।
फेसबुक पर लाइक कमेंट नहीं करां, तो फ्रेंड भरे बटका।
अब थे ही बताओ, जावां तो कठे जावां,
अठे हर कोई भरे बटका, अठे हर कोई भरे बटका।
 


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