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इस ब्लाग परिवार के हमारे सदस्य साथी....

सोमवार, 29 अप्रैल 2013

सभी के काम आने योग्य आवश्यक जानकारियां...


सडक पर चलते हुए...
(1)
 


(2)



रेल में यात्रा करते समय...



युवतियों की सुरक्षा के लिये...


भोजन व्यवस्था से सम्बन्धित...


राष्ट्रभाषा हिन्दी के संदर्भ में...

  

और ये तो है ही...


 


सोमवार, 22 अप्रैल 2013

तेरे बिन सूने नयन हमारे...

            बाल्यावस्था से वृद्धावस्था तक और इन्सानों से लगाकर पशु-पक्षियों तक अपने प्रेम का इजहार करती बोलती तस्वीरें, प्रेम की अभिव्यक्ति में पगी विभिन्न दोहावलियों के साथ...


मीरा देखी राधा देखी, प्रेम में बारम्बार
एक जहर का प्याला पी गई, दूजी सुध-बुध हार




प्रेम वफा की खुशबू है, ये हर दिल को महकाय
खुशबू वो न जान, जिसका दिल पत्थर हो जाय


प्रेम नहीं बेचा जाता, प्रेम बड़ा अनमोल
प्रेम ऐसा भाव है जो, मिलता है बिन मोल


प्रेम में विष है, किंतु साथ है ईश्वर का भी वास
शंकर सा कंठ जानिए, प्रभु कंठ विश्वास
 

  
प्रेम वो जल है जिसमें डूबे, मन निर्मल हो जाय
लाख नहा लो गंगा वर्ना, मन का द्वेष न जाय


तलवार नहीं चलती इसमें, न पड़ता तीर चलाय
जो सब अपना हार गए, तो जग फिर जीता जाय




सोमवार, 15 अप्रैल 2013

फैसबुक तूफानी,,,


मुस्कराहट तो बनती ही है...!

(1)




(2)



(3)



(4)



(5)



(6)


आज के लिये तो बस...


रविवार, 14 अप्रैल 2013

जिन्दगी का फलसफा...


कालेज लाईफ होती है रिलायन्स की तरह,
 
करलो दुनिया मुट्ठी में...



बेचलर लाईफ है एअरटेल की तरह,

ऐसी आजादी और कहाँ...



एंगेजमेंट के बाद है आईडिया की तरह,

जो बदल दे आपकी जिन्दगी...


शादी के बाद हो जाती हच की तरह,

जहाँ भी आप जाएँ, नेटवर्क हमेशा साथ...


बच्चों के आगमन के बाद तो BSNL की तरह,

सभी लाईनें व्यस्त हैं...


जीवन के हर पडाव में आनन्दित रहने का प्रयास करें.


क्योंकि जो आज है वो कल नहीं रहेगा...
 


टेस्ट करें या वेस्ट करें


इसे तो ऐसे ही चलते रहना है...


जीवन चलने का नाम...

शनिवार, 13 अप्रैल 2013

मनोरंजक जादुई शो (मेजिक वीडिओ)

          प्रिय मित्रों, सर्वप्रथम आपसे क्षमा चाहूंगा कि तकनीकी गडबडियों के कारण पोस्ट पूरी होने के पहले ही हमारीवाणी पटल पर आ गई और मुझे उसे वापस हटाना पडा । वैसे भी ब्लाग पर वीडिओ अपलोड करने का यह मेरा प्रथम अनुभव ही है अतः इस पोस्ट को देखना चाहते हुए भी नहीं देख पाने की निराशा हेतु आपसे क्षमा...

             अब प्रस्तुत है ऋतिक रोशन और "जिन्दगी ना मिलेगी दोबारा" की टीम के मनोरंजन हेतु प्रस्तुत जादुई शो का सिर्फ 2.30 मिनीट का एक रोचक व संक्षिप्त संपादित जादुई शो...


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और एक मिनीट से भी कम अवधि के अन्य रोचक शो में

ये श्री कैलाश दवेजी ताश के पत्ते का जादू दिखा रहे हैं...


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ओबामा की भारत यात्रा भी जादू के क्रम में ही ढली हुई है.


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 और ये रेलगाडी तो चलता फिरता जादू है...

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और आखिर में ये है दबंग सलमान खान स्टाईल का जादू...

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वीडिओ अभी और भी हैं लेकिन अगली किसी पोस्ट में, धन्यवाद...

गुरुवार, 11 अप्रैल 2013

पुरखों की सीख

            हममें से अधिकांश लोग अक्सर हर महत्वपूर्ण अवसर पर जल बचाने की बात तो अनिवार्य रुप से करते हैं किन्तु व्यवहारिक जीवन में यदि कहीं सार्वजनिक रुप से नल चालू रह जाने से पानी ढुलता हुआ दिखे तो कभी भी रुककर नल को बन्द करने की तकलीफ कभी अपनी जल्दी में तो कभी लोग क्या कहेंगे वाली सोच को आगे रखकर नहीं करते । जबकि हमारे हिस्से की जिम्मेदारी ये जानवर निभाते देखे जा सकते हैं । देखिये सिर्फ आधे मिनीट का यह वीडियो और सोचिये कि ऐसी स्थिति में ये नेक कार्य हमें भी क्यों नहीं करना चाहिये ?


 
आप सभी मित्रों को नवसंवत्सर 2070 की हार्दिक शुभकामनाएँ...

 

बुधवार, 10 अप्रैल 2013

उपहार.


एक महिला के 3 दामाद थे ।

उसके दामाद उसे चाहते भी हैं या नहीं यह जानने के लिए एक दिन वह पहले दामाद को लेकर तालाब के किनारे घूमने गई और उसमें कूद पड़ी   ।

पहले दामाद ने उसे बचा लिया ।

सास ने उसे एक मारुति कार उपहार में दी ।

अगले दिन दूसरे दामाद के साथ तालाब किनारे घूमने गई और फिर कूद पड़ी ।

दूसरे दामाद ने भी उसे बचा लिया ।

सास ने उसे एक मोटर साइकिल दी ।

2 दिन के बाद तीसरे दामाद को लेकर गई और तालाब में कूद पड़ी ।

तीसरे दामाद ने सोचा - `लगता मुझे, तो साइकिल ही मिलेगी तो खामख्वाह मेहनत करके क्या फायदा, और वह बचाने नहीं गया ।

इस तरह से सासू माँ डूब गई ।

लेकिन अगले दिन इस दामाद को मर्सिडीज कार मिली ।

आखिर यह चमत्कार कैसे हो गया ?

अरे भाई अबकि बार उसके ससुरजी मेहरबान हो गये थे.

  मुनि सिद्धांतसागरजी के संकलन से.
                          

सोमवार, 8 अप्रैल 2013

जीवन की अनिवार्यता - माँ V/s पत्नी.


गौर कीजिये-

         जीवन का सबसे मधुर समय बचपन का वो समय होता है जिसे
  
हम अपनी माँ के सानिन्ध्य में बिताते हैं और दूर से मृग-मरीचिका

सदृश सबसे मधुर दिखाई देने वाला किन्तु सबसे संघर्षशील समय

जिसमें हम बोलचाल की भाषा में कई बार नानी याद आ जाना भी

कहते हैं यह समय जवानी का रहता है जिसे हम अपनी पत्नी के साथ

बिता रहे होते हैं । दोनों के रिश्तों का यही अन्तर नीचे के चित्रों में,

कुछ चुटीले अन्दाज में...















रविवार, 7 अप्रैल 2013

फेसबुक फटाका - हाय मेरी...


           
          BMW कार चला रही एक महिला की कार का जबर्दस्त एक्सीडेंट हो गया, वह महिला हाय मेरी BMW कार... का बार-बार विलाप करने लगी । निकट ही ड्यूटी कर रहा ट्रेफिक सिपाही वहाँ दौडकर आया और कार व उस महिला को देखते हुए बोला - मेडम क्या आपकी आँखों पर दौलत की पट्टी बंधी हुई है, आप बार-बार मेरी BMW कार... का प्रलाप कर रही हैं, ये नहीं देख रही हैं कि आपक हाथ की कलाई भी पूरी तरह से कट ग है । सिपाही की बात सुनकर उस महिला ने अपने हाथ की तरफ देखा, फिर और भी जोर से दहाडे मारकर रोते हुए हाय मेरी रोलेक्स घडी... का प्रलाप करने लगी ।

गुरुवार, 4 अप्रैल 2013

फेसबुक फटाका - बीबी-ओ-बीबी.


              हर दिन दुनिया भर के लोग अपने-अपने दायरे में संचित ज्ञान व चुटीली मनोरंजक सामग्री फेसबुक पटल पर परोस रहे हैं किन्तु अधिकांश के हिस्से तक सिर्फ उतनी ही सामग्री पहुँच पाती है जितना बडा उनका फ्रेंड सर्कल है, और जाहिर है कि सबका सर्कल एक जैसा नहीं हो सकता । यदि ब्लाग-जगत के चिर-परिचित नामों से हटकर देखा जावे तो सभीके पारिवारिक सर्कल, उनके अपने शहर व समाज के सर्कल बिल्कुल भिन्न हो जाते हैं और यहीं से इन उपयोगी, मनोरंजक और ज्ञानवर्द्धक जानकारियों की दिशाएँ बदलती चली जाती हैं याने जो सामग्री आप तक पहुँच रही है वह जरुरी नहीं कि मुझ तक भी पहुँच रही हो ऐसे ही मुझ तक पहुँचने वाली ऐसी महत्वपूर्ण सामग्री आप तक भी पहुँची हो यह कतई आवश्यक नहीं है जबकि ये जानकारियां हममें से सभी के लिये उतनी ही ज्ञानवर्द्धक, मनोरंजक और संदेश-प्रदायक हो सकती हैं, अतः ऐसी संचित कुछ चुनिन्दा सामग्री हम इस ब्लाग तक भी लाने का प्रयास कर रहे हैं । कोशिश ये है कि इस माध्यम से न सिर्फ ये संग्रहित रहे बल्कि जिन नजरों से ये नहीं गुजर पाई है उन तक भी इन उपर्युक्त विधाओं के छोटे-छोटे संदेश पहुँच सकें, अतः ये आपके द्वारा पहले से देखे हुए भी हो सकते हैं और नहीं भी हो सकते हैं । इसलिये बिना किसी नुक्ताचीनी के आप इनका रसास्वादन करें यदि ये आपको पसंद आते हैं तो आपके हैं अन्यथा मेरे संग्रह के तो ये हैं ही...
  
 बीबियों की बहुमत में दिखती चिरपरिचित व्यथा...

सबसे परफेक्ट आदमी - उसके पापा.

सबसे दुःखी आदमी   -  उसका भाई.

सबसे किस्मत वाला आदमी    -  उसकी बहन का पति.

और सबसे झूठा, कंजूस और वाहियात आदमी - 

अब यह भी बताना पडेगा क्या ?



मंगलवार, 2 अप्रैल 2013

जीवन का विकासक्रम. ( चित्रशैली... )

 1972...

               
पुत्र सुनील, मम्मी-पापा के साथ 1981 में...




सुनील पुत्र हर्षल, दादा-दादी के साथ 2011 में...







        


 और फिर...

गाडी बुला रही है, सीटी बजा रही है,

चलना ही जिन्दगी है, चलती ही जा रही है.



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