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सोमवार, 13 जनवरी 2020

इस गुप्त नवरात्री में कीजिये देवी को प्रसन्न


            हिन्दू धर्म में नवरात्र मां दुर्गा की साधना के लिए बेहद महत्त्वपूर्ण माने जाते हैं। नवरात्र के दौरान साधक विभिन्न तंत्र विद्याएं सीखने के लिए मां भगवती की विशेष पूजा करते हैं। तंत्र साधना आदि के लिए गुप्त नवरात्र बेहद विशेष माने जाते हैं। आषाढ़ और माघ मास के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली नवरात्र को गुप्त नवरात्र कहा जाता है। इस नवरात्रि के बारे में बहुत ही कम लोगों को जानकारी होती है।

            शिवपुराण के अनुसार पूर्वकाल में राक्षस दुर्ग ने ब्रह्मा को तप से प्रसन्न कर चारों वेद प्राप्त कर लिए। तब वह उपद्रव करने लगा। वेदों के नष्ट हो जाने से देव-ब्राह्मण पथ भ्रष्ट हो गए, जिससे पृथ्वी पर वर्षों तक अनावृष्टि रही।पृथ्वी पर रूद्र, वरुण, यम आदि का प्रकोप बढ़ने लगता है। इन विपत्तियों से बचाव के लिए गुप्त नवरात्र में मां दुर्गा की उपासना की जाती है ।


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            सतयुग में चैत्र नवरात्र, त्रेता में आषाढ़ नवरात्र, द्वापर में माघ, कलयुग में आश्विन की साधना-उपासना का विशेष महत्व रहता है। मार्कंडेय पुराण में इन चारों नवरात्रों में शक्ति के साथ-साथ इष्ट की आराधना का भी विशेष महत्व है । 

            देवताओं ने मां पराम्बा की शरण में जाकर दुर्ग का वध करने का निवेदन किया। मां ने अपने शरीर से काली, तारा, छिन्नमस्ता, श्रीविद्या, भुवनेश्वरी, भैरवी, बगला, धूमावती, त्रिपुरसुंदरी और मातंगी नाम वाली दस महाविद्याओं को प्रकट कर दुर्ग का वध किया। दस महाविद्याओं की साधना के लिए तभी से गुप्त नवरात्र मनाया जाने लगा।

            गुप्त नवरात्रि विशेष तौर पर गुप्त सिद्धियां पाने का समय है साधक इन दोनों गुप्त नवरात्रि (माघ तथा आषाढ़) में विशेष साधना करते हैं तथा चमत्कारिक शक्तियां प्राप्त करते हैं ।

            "ॐ जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी ।

        दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु ते “सर्वाबाधाविनिर्मुक्तो धनधान्यसुतान्वित: ।

            मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशय: ॥”

           इस नवरात्र में देवी साधक और भक्त--- 'ऊं ऐं हीं क्लीं चामुण्डाये विच्चे नम:' मंत्र जाप करें।

             मां काली के उपासक---- 'ऊं ऐं महाकालाये नम:' मंत्र का जाप करें।

            व्यापारी लोग----'ऊं हीं महालक्ष्मये नम:' मंत्र का जाप करें।

            विद्यार्थी---- 'ऊं क्लीं महासरस्वतये नम:' मंत्र जपें।
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गुप्त नवरात्र 2016

            आषाढ़ नवरात्र गुप्त नवरात्रों के नाम से भी जाने जाते हैं. आषाढ़ महीने यानी जून और जुलाई  माह में पड़ने के कारण इन नवरात्रों को आषाढ़ नवरात्र कहा जाता है, हालाँकि देश के अधिकतर भाग में गुप्त नवरात्रों के बारे में लोग नहीं जानते हैं. उत्तरी भारत जैसे हिमाचल प्रदेश, पंजाब , हरयाणा, उत्तराखंड के आस पास के प्रदेशों में गुप्त नवरात्रों  में माँ भगवती की पूजा की जाती है. माँ भगवती  के सभी 9 रूपों की पूजा नवरात्रों के भिन्न – भिन्न दिन की जाती है , अतः आइये देखते हैं  इन दिनों में किस देवी की पूजा  कब की जानी चाहिए---

            5 जुलाई (मंगलवार) 2016 : घट स्थापन एवं माँ शैलपुत्री पूजा

            6 जुलाई (बुधवार) 2016 : माँ ब्रह्मचारिणी पूजा

            7 जुलाई (बृहस्पतिवार) 2016 : माँ चंद्रघंटा पूजा

            8 जुलाई (शुक्रवार) 2016: माँ कुष्मांडा पूजा

            9 जुलाई (शनिवार) 2016: माँ स्कंदमाता पूजा

            10 जुलाई (रविवार)  2016: : माँ कात्यायनी पूजा

            11 जुलाई (सोमवार)  2016:  माँ कालरात्रि पूजा

            12 जुलाई(मंगलवार) 2016 : माँ महागौरी पूजा, दुर्गा अष्टमी

            13 जुलाई (बुधवार) 2016 : माँ सिद्धिदात्री

            14 जुलाई (बृहस्पतिवार)  2016: नवरात्री पारण
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गुप्त नवरात्र पूजा विधि---

            मान्यतानुसार गुप्त नवरात्र के दौरान अन्य नवरात्रों की तरह ही पूजा करनी चाहिए। नौ दिनों के उपवास का संकल्प लेते हुए प्रतिप्रदा यानि पहले दिन घटस्थापना करनी चाहिए। घटस्थापना के बाद प्रतिदिन सुबह और शाम के समय मां दुर्गा की पूजा करनी चाहिए। अष्टमी या नवमी के दिन कन्या पूजन के साथ नवरात्र व्रत का उद्यापन करना चाहिए।

गुप्त नवरात्री में सिद्धि के लिए गुप्त स्थान या सिद्ध श्मशान-
            यह साधनाएं बहुत ही गुप्त स्थान पर या किसी सिद्ध श्मशान में की जाती है । दुनियां में सिर्फ चार श्मशान घाट ही ऐसे हैं जहां तंत्र क्रियाओं का परिणाम बहुत जल्दी मिलता है। ये हैं तारापीठ का श्मशान (पश्चिम बंगाल), कामाख्या पीठ (असम) का श्मशान, त्रयंबकेश्वर (नासिक) और उज्जैन स्थित विक्रांत भैरव या चक्रतीर्थ श्मशान ।

            गुप्त नवरात्रि में यहां दूर-दूर से साधक गुप्त साधनाएं करने आते हैं। नवरात्रों में लोग अपनी आध्यात्मिक और मानसिक शक्तियों में वृद्धि करने के लिए अनेक प्रकार के उपवास, संयम, नियम, भजन, पूजन योग साधना आदि करते हैं।
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गुप्त नवरात्रि का महत्त्व ---

            देवी भागवत के अनुसार जिस तरह वर्ष में चार बार नवरात्र आते हैं और जिस प्रकार नवरात्रि में देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है, ठीक उसी प्रकार गुप्त नवरात्र में दस महाविद्याओं की साधना की जाती है । कहा जाता है कि मां के नौ रूपों की भक्ति करने से हर मनोकामना पूरी होती है। नौ शक्तियों के मिलन को ही नवरात्रि कहते हैं। देवी पुराण के अनुसार एक वर्ष में 4 माह नवरात्रि के लिए निश्चित हैं।

            मानव के समस्त रोग-दोष व कष्टों के निवारण के लिए गुप्त नवरात्र से बढ़कर कोई साधनाकाल नहीं हैं। श्री, वर्चस्व, आयु, आरोग्य और धन प्राप्ति के साथ ही शत्रु संहार के लिए गुप्त नवरात्र में अनेक प्रकार के अनुष्ठान व व्रत-उपवास के विधान शास्त्रों में मिलते हैं। इन अनुष्ठानों के प्रभाव से मानव को सहज ही सुख व अक्षय ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। ‘दुर्गावरिवस्या’ नामक ग्रंथ में स्पष्ट लिखा है कि साल में दो बार आने वाले गुप्त नवरात्रों में माघ में पड़ने वाले गुप्त नवरात्र मानव को न केवल आध्यात्मिक बल ही प्रदान करते हैं, बल्कि इन दिनों में संयम-नियम व श्रद्धा के साथ माता दुर्गा की उपासना करने वाले व्यक्ति को अनेक सुख व साम्राज्य भी प्राप्त होते हैं। ‘शिवसंहिता’ के अनुसार ये नवरात्र भगवान शंकर और आदिशक्ति मां पार्वती की उपासना के लिए भी श्रेष्ठ हैं। गुप्त नवरात्रों के साधनाकाल में मां शक्ति का जप, तप, ध्यान करने से जीवन में आ रही सभी बाधाएं नष्ट होने लगती हैं।

            गुप्त नवरात्रि विशेषकर तांत्रिक क्रियाएं, शक्ति साधना, महाकाल आदि से जुड़े लोगों के लिए विशेष महत्त्व रखती है। इस दौरान देवी भगवती के साधक बेहद कड़े नियम के साथ व्रत और साधना करते हैं। इस दौरान लोग लंबी साधना कर दुर्लभ शक्तियों की प्राप्ति करने का प्रयास करते हैं।गुप्त नवरात्र में दशमहाविद्याओं की साधना कर ऋषि विश्वामित्र अद्भुत शक्तियों के स्वामी बन गए। उनकी सिद्धियों की प्रबलता का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने एक नई सृष्टि की रचना तक कर डाली थी। इसी तरह, लंकापति रावण के पुत्र मेघनाद ने अतुलनीय शक्तियां प्राप्त करने के लिए गुप्त नवरात्रों में साधना की थी। शुक्राचार्य ने मेघनाद को परामर्श दिया था कि गुप्त नवरात्रों में अपनी कुलदेवी निकुम्बाला की साधना करके वह अजेय बनाने वाली शक्तियों का स्वामी बन सकता है ||

            गुप्त व चमत्कारिक शक्तियां प्राप्त करने का यह श्रेष्ठ अवसर होता है। धार्मिक दृष्टि से हम सभी जानते हैं कि नवरात्र देवी स्मरण से शक्ति साधना की शुभ घड़ी है। दरअसल, इस शक्ति साधना के पीछे छुपा व्यावहारिक पक्ष यह है कि नवरात्र का समय मौसम के बदलाव का होता है। आयुर्वेद के मुताबिक इस बदलाव से जहां शरीर में वात, पित्त, कफ में दोष पैदा होते हैं, वहीं बाहरी वातावरण में रोगाणु। जो अनेक बीमारियों का कारण बनते हैं। सुखी-स्वस्थ जीवन के लिये इनसे बचाव बहुत जरूरी है।  नवरात्र के विशेष काल में देवी उपासना के माध्यम से खान-पान, रहन-सहन और देव स्मरण में अपनाने गए संयम और अनुशासन तन व मन को शक्ति और ऊर्जा देते हैं। जिससे इंसान निरोगी होकर लंबी आयु और सुख प्राप्त करता है। धर्म ग्रंथों के अनुसार गुप्त नवरात्र में प्रमुख रूप से भगवान शंकर व देवी शक्ति की आराधना की जाती है। देवी दुर्गा शक्ति का साक्षात स्वरूप है। दुर्गा शक्ति में दमन का भाव भी जुड़ा है। यह दमन या अंत होता है शत्रु रूपी दुर्गुण, दुर्जनता, दोष, रोग या विकारों का। ये सभी जीवन में अड़चनें पैदा कर सुख-चैन छीन लेते हैं। यही कारण है कि देवी दुर्गा के कुछ खास और शक्तिशाली मंत्रों का देवी उपासना के विशेष काल में जाप शत्रु, रोग, दरिद्रता रूपी भय बाधा का नाश करने वाला माना गया है ।

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सभी’नवरात्र’ शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से लेकर नवमी तक किए जाने वाले पूजन, जाप और उपवास का प्रतीक है- ‘नव शक्ति समायुक्तां नवरात्रं तदुच्यते’। देवी पुराण के अनुसार एक वर्ष में चार माह नवरात्र के लिए निश्चित हैं। नवरात्र के नौ दिनों तक समूचा परिवेश श्रद्धा व भक्ति, संगीत के रंग से सराबोर हो उठता है। धार्मिक आस्था के साथ नवरात्र भक्तों को एकता, सौहार्द, भाईचारे के सूत्र में बांधकर उनमें सद्भावना पैदा करता है।

गुप्त नवरात्रि की प्रमुख देवियां---

            गुप्त नवरात्र के दौरान कई साधक महाविद्या (तंत्र साधना) के लिए मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, माता छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, मां ध्रूमावती, माता बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी की पूजा करते हैं ।


मारवाडी फटाके...




            सेठाणीजी नाराज होकर बोली - "जो म्हारो ब्याव कोई असली राक्षस सु भी हो जातो ना; तो भी वो मन्ने थारैसुं जादा सुखी रांखतो ।"

            मारवाड़ी सेठजी - यो तो बिलकुल ही कोनी हो सकतो थो । 


            सेठाणीजी - क्यू कोनी हो सकतो थो ? 


            सेठजी - अये बावळी ! आपणा लोगां में एक ही गोत्र में ब्याव कोनी होवै. ।


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            एक बार एक Punjabi कुए में गिर गया... ...और जोर जोर से रोने लगा  !

            एक मारवाड़ी वहाँ से जा रहा था उसने आवाज सुनी तो रुका और बोला :  "कुण है भाई ?"

            Punjabi : अस्सी हाँ !

            मारवाड़ी:  "भाई ! थे एक-दो होता,  तो काड देतो...

            80 तो म्हारै बाप से बी कोणी निकळै !"  पड्या रेओ !




मारवाडी सीख :
                              
           1.   चौखी संगत में उठणो बैठणो । 

            2.   काम स काम राखणो ।  
                  
            3.   ऊड़तो तीर नही पकडनो । 

            4.   घणो लालच कोनी करणो । 

            5. सोच समझकर पग राखणो ।

            6. रास्ते आणो, रास्ते जाणो ।   
 
            7. जितो हो सके उतो कम बोलणो ।

            8. छोटा-मोटा को कायदो राखणो।
 
            9.   जितो पचे उतो ई खाणो । (पेट खुदको होवे ।)
   
            10.  पूच्छ्या बीना सलाह नी देणो । 

            11.  पराई पंचायती नी करणी ।

            12.  आटा मे लूण समावे, लूण मे आटो कोनी ।

            13.  पगा बलती देखणी ढूंगा बलती कोणी । 

            14.  बीच में ही लाडे की भुवा नी बणनो ।

            15.  सुणनी सबकी करणी मन की ।



अठे हर कोई भरे बटका
घुमाबा नहीं ले जावां, तो घराळी भरे बटका ।
घराळी रो मान ज्यादा राखां, तो माँ भरे बटका ।
कोई काम कमाई नहीं करां, तो बाप भरे बटका ।
पॉकेट मनी नहीं देवां, तो बेटा भरे बटका ।
कोई खर्चो पाणी नहीं करां, तो दोस्त भरे बटका ।
थोड़ो सो कोई न क्यूं कह दयां, तो पड़ौसी भरे बटका ।
पंचायती में नहीं जावां, तो समाज भरे बटका ।
जनम मरण में नहीं जावां, तो सगा संबंधी भरे बटका ।
छोरा छोरी नहीं पढ़े, तो मास्टर भरे बटका ।

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पुरी फीस नहीं देवां, तो डॉक्टर भरे बटका ।
गाड़ी का कागज पानड़ा नहीं मिले, तो पुलिस भरे बटका ।
मांगी रिश्वत नहीं देवां, तो अफसर भरे बटका ।
टाइम सूं उधार नहीं चुकावां, तो सेठ भरे बटका ।
टेमूं टेम किश्त नहीं चुकावां, तो बैंक मैनेजर भरे बटका ।
नौकरी बराबर नहीं करां, तो बॉस भरे बटका ।
फेसबुक पर लाइक कमेंट नहीं करां, तो फ्रेंड भरे बटका ।
अब थे ही बताओ, जावां तो कठे जावां,
अठे हर कोई भरे बटका, अठे हर कोई भरे बटका।
 


शनिवार, 4 जनवरी 2020

कर्मफल


            भीष्म पितामह रणभूमि में शरशैया पर पड़े थे । हल्का सा भी हिलते तो शरीर में घुसे हुए बाण भारी वेदना के साथ रक्त की पिचकारी सी छोड़ देते। ऐसी दशा में उनसे मिलने सभी आ जा रहे थे। श्री कृष्ण भी दर्शनार्थ आये। उनको देखकर भीष्म जोर से हँसे और कहा... आइयें जगन्नाथ ! आप तो सर्व ज्ञाता हैं । सभी कुछ जानते हैं, बताइए मैंने ऐसा कौनसा पाप किया था जिसका दंड इतना भयावह मिला...?

            कृष्ण : पितामह ! आपके पास वह शक्ति है, जिससे आप अपने पूर्व जन्म देख सकते हैं, आप स्वयं ही देख लेते ।

             भीष्म : देवकी नंदन ! मैं यहाँ अकेला पड़ा और कर ही क्या रहा हूँ..? मैंने सब देख लिया ...अभी तक 100 जन्म देख चुका हूँ ।  मैंने उन 100 जन्मों में एक भी कर्म ऐसा नहीं किया जिसका परिणाम ये हो कि मेरा पूरा शरीर बिंधा पड़ा है,  हर आने वाला क्षण... ओर पीड़ा लेकर आता है ।
 
            कृष्ण : पितामह ! आप एक भव और पीछे जाएँ, आपको उत्तर मिल जायेगा ।

             भीष्म ने ध्यान लगाया और देखा कि 101 भव पूर्व वो एक नगर के राजा थे ।  एक मार्ग से अपनी सैनिकों की एक टुकड़ी के साथ कहीं जा रहे थे । एक सैनिक दौड़ता हुआ आया और बोला - राजन ! मार्ग में एक सर्प पड़ा है, यदि हमारी टुकड़ी उसके ऊपर से गुजरी तो वह मर जायेगा ।

             भीष्म ने कहा... एक काम करो... उसे किसी लकड़ी में लपेट कर झाड़ियों में फेंक दो ।
 
             सैनिक ने वैसा ही किया... उस सांप को एक लकड़ी में लपेटकर झाड़ियों में फेंक दिया । दुर्भाग्य से झाडी कंटीली थी, सांप उनमें फंस गया, जितना प्रयास उनसे निकलने का करता और अधिक फंस जाता । कांटे उसकी देह में गड गए, खून रिसने लगा। धीरे धीरे वह मृत्यु के मुंह में जाने लगा । 5-6 दिन की तड़प के बाद ही उसके प्राण निकल पाए ।
 
             भीष्म : हे त्रिलोकी नाथ ! आप जानते हैं कि मैंने जानबूझ कर ऐसा नहीं किया,  अपितु मेरा उद्देश्य उस सर्प की रक्षा का था, तब ये परिणाम क्यों...?
  
            कृष्ण: तात श्री ! हम जान बूझ कर क्रिया करें या अनजाने में ...किन्तु क्रिया तो हुई न... उसके प्राण तो गए ना... ये तो विधि का विधान है कि जो क्रिया हम करते हैं उसका फल  हमें भोगना ही पड़ता है... आपका पुण्य इतना प्रबल था कि 101 भव उस पाप फल को उदित होने में लग गए ।  किन्तु  अंततः वह  हुआ ।

            किसी भी जीव को लोग जान बूझ कर मार रहे हैं... उसने जितनी पीड़ा सहन की.. वह उस जीव (आत्मा) को इसी जन्मअथवा अन्य किसी जन्म में अवश्य भोगनी होगी ।

            अतः अपनी हर दैनिक क्रिया सावधानीपूर्वक ही करें । क्योंकि कर्मों का फल देर-सवेर  भुगतना तो अवश्यमेव  पडता ही है ।

         

शनिवार, 16 नवंबर 2019

इलाज...!



        एक महिला ने अपने पति का मोबाइल चेक किया तो फोन नंबर कुछ अलग ही तरीके से Save किये हुए दिखे, जैसे :-
        आँखों का इलाज
        होंठों का इलाज
        दिल का इलाज
       पत्नी ने गुस्से में अपना नंबर डायल किया तो स्क्रीन पर नाम आया... 
        ला-इलाज.




इन दादा का जोश भी देख लें...




कुछ नहीं करने से- कुछ न कुछ करते रहना हमेशा उत्तम रहता है...



रविवार, 6 अक्टूबर 2019

मानसिक शांति के लिये आवश्यक काम की 10 बातें...





 उतना ही काटें जितना चबाया जा सके अर्थात्
उतना ही काम हाथ में लें जितना पूरा कर सकें.


किसी के काम में तब तक दखल न दें जब तक कि 
आपसे उस बाबद कुछ पूछा नहीं जाए.


माफ करना और कुछ बातों को भूल जाना भी सीखें.


हर कार्य में पहचान पाने की लालसा न रखें.


ईर्ष्या (जलन) की भावना से दूर रहें.


हर सुबह अपना कायाकल्प कीजिए- 
15 मिनिट योगासन+10 मिनिट प्राणायाम+15 मिनिट ध्यान= 
जीवन में आरोग्य, आनंद और उत्साह की मौजूदगी.


माहौल के मुताबिक खुदको ढालने का प्रयास करें.


अपने नियमित संपर्कों में जो लोग बदल नहीं सकते
उन्हें सहन करना सीखें.


किसी काम को टालने से बचें 
और ऐसा भी कोई काम न करेंजिससे बाद में पछताना पडे.


दिमाग को यथासंभव खाली न रहने दें. 
क्योंकि खाली दिमाग शैतान का घर होता है.

पैसा ये कैसा...





मैं पैसा हूँ...
            मुझे आप मरने के बाद ऊपर नहीं ले जा सकते, मगर जीते जी मैं आपको बहुत ऊपर ले जा सकता हूँ ।

मैं पैसा हूँ...
            मुझे पसंद करो सिर्फ इस हद तक कि लोग आपको नापसन्द न करने लगें ।

मैं पैसा हूँ...
            मैं भगवान् नहीं मगर लोग मुझे भगवान् से कम नहीं मानते ।

मैं पैसा हूँ...
            मैं नमक की तरह हूँ, जो जरुरी तो है मगर जरुरतसे ज्यादा हो तो जिंदगी का स्वाद बिगाड़ देता है ।

मैं पैसा हूँ...
             इतिहास में कई ऐसे उदाहरण मिल जाएंगे जिनके पास मैं बेशुमार था, मगर फिर भी वो  मरे तो उनके लिए कोई रोने  वाला भी नहीं था ।


मैं पैसा हूँ...
            मैं कुछ भी नहीं हूँ; मगर मैं निर्धारित करता हूँ, कि लोग आपको कितनी इज्जत देते है ।

मैं पैसा हूँ...
            मैं आपके पास हूँ तो आपका हूँ । आपके पास नहीं हूँ तो आपका नहीं हूँ  । मगर मैं आपके पास हूँ तो आपकी चाही सभी वस्तुएँ आपकी हैं । 


 
मैं पैसा हूँ...
             मैं नई नई रिश्तेदारियाँ बनाता हूँ, मगर असली औऱ पुरानी बिगाड़ भी देता हूँ । 

मैं पैसा हूँ...
             मैं सारे फसाद की जड़ हूँमगर फिर भी न जाने क्यों सब मेरे पीछे इतना पागल हैं ।

क्यों ? विचार कीजिये...

दिलदारी - दुनियादारी...


          1.   जो आपसे दिल से बात करता है, उसे कभी दिमाग से जवाब मत देना ।
            2.  एक साल मे 50 मित्र बनाना आम बात है पर 50 साल तक एक मित्र से मित्रता निभाना खास बात है ।

            3.  एक वक्त था जब हम सोचते थे कि  हमारा भी वक्त आएगा, और अब एक ये वक्त है जब हम सोचते है कि वो भी क्या वक्त था ।

            4. 
एक मिनट मे जिन्दगी नही बदलती, पर एक मिनट सोच कर लिया फैसला पूरी जिन्दगी बदल देता है ।

            5. 
आप जीवन मे कितने भी ऊँचे क्यो न उठ जाएं, पर अपनी गरीबी और कठिनाई को कभी मत भूलिए ।

            6. 
वाणी मे भी अजीब शक्ति होती है, कडवा बोलने वाले का शहद भी नही बिकता और मीठा बोलने वाले की मिर्ची भी बिक जाती है ।

            7. 
जीवन मे सबसे बङी खुशी उस काम को करने मे है, जिसे लोग कहते है कि यह तुम्हारे बस की बात नहीं है ।

            8. 
इंसान एक दुकान है और जुबान उसका ताला ।  ताला खुलता है, तभी मालूम होता है कि दुकान सोने की है या कोयले की ।

            9. 
कामयाब होने के लिए जिन्दगी मे कुछ ऐसा काम करो कि लोग आपका नाम Facebook पे नही Google पे सर्च करें ।

          10. 
दुनिया विरोध करे, तुम ङरो मत क्योकि जिस पेड पर फल लगते हैंदुनिया उसे ही पत्थर मारती है ।

            11. 
जीत और हार आपकी सोच पर ही निर्भर है, मान लो तो हार होगी और ठान लो तो जीत होगी ।

            12. 
दुनिया की सबसे सस्ती चीज है सलाह, एक से मांगो हजारो से मिलती है जबकि सहयोग हजारो से मांगो तो बमुश्किल किसी एक से मिलता है ।

            13. 
मैने धन से कहा कि तुम सिर्फ कागज के एक टुकङे हो, धन मुस्कराया और बोला बिल्कुल मै एक कागज का एक टुकङा ही हूँ, लेकिन मैने आज तक अपनी जिन्दगी मे कभी कूङेदान का मुँह नही देखा ।

            14. 
आँधियो ने लाख बढाया हौसला धूल का, पर दो बूंद बारिश ने औकात बता दी !

            15. 
जब एक रोटी के चार टुकडे हों  और खाने वाले पांच हो तब- मुझे भूख नही है ऐसा कहने वाली शख्सियत सिर्फ "माँ" ही हो सकती है ।

            16. 
जब लोग आपकी नकल करने लगें तो समझ लेना - कि आप जीवन मे सफल हो रहे हैं ।

            17.  
मत फेंक पत्थर पानी मे उसे भी कोई पीता है, मत रहो उदास यूं जिन्दगी मे, तुम्हे देखकर भी कोई जीता है ।

सफल बिजनेसमेन बनने के टिप्स - सफल व्यक्तियों के द्वारा...

         
      हम आपको सफल व्यक्तियों की वो बातें बताने वाले हैं जो आपके बिजनेस को नई ऊँचाई पर ले जाने में मदद करेंगी ।

1. सस्ते रिसोर्सेज का प्रयोग करें मुकेश अम्बानी
            स्टार्टअप के प्रारम्भ में पैसा आपको अधिक से अधिक लाभ कमाने के लिए एक टूल होता है । अगर आप प्रारम्भ में ही महंगे रिसोर्सेज में अधिक रुपये खपा देंगे तो प्रोडक्टिविटी बढ़ाने के लिए आपके पास इसकी कमी हो जाएगी। इसलिए सस्ते मगर अच्छे रिसोर्सेज का प्रयोग करें ।

2. अवसर को हाथ से न जाने दें स्टीव जॉब्स
            हाथ से निकला अवसर सदा के लिए चला जाता है । इसलिए अपनी कमीज़ की बाँहें ऊपर मोड़कर आने वाले हर अवसर के लिए तैयार रहें, भले ही वो छोटा हो या फिर बड़ा । हम ये पहले से नहीं बता सकते हैं कौन सा मोड़ जीवन का टर्निंग प्वाइंट बन जाये ।

3. स्वयं को आत्मा से जोड़ें सर रिचर्ड ब्रांसन
            भेड़ की चाल चलना छोड़ो। इसकी जगह अपने दिल की आवाज़ सुनो और वही करो तुम चाहते हो क्योंकि तुमको तुमसे अच्छा कौन जानता है । बस तुम ही जानते हो कि किस परिस्थिति में तुम क्या कर सकते हो ? अपने विचारों को अपने दिल और आत्मा से जोड़कर तुम मनचाहा रिज़ल्ट पा सकते हो ।

4. सोशल मीडिया से जुड़ें होवर्ड सुल्ज़
            अपने कस्टमर्स तक पहुंचने के लिए सोशल मीडिया साइटें सबसे अच्छा रास्ता है । अपने पेज पर आप प्रोडक्ट और सर्विसेज के बारे में नियमित अपडेट डालकर बिजनेस को आसानी से बढ़ा सकते हैं । अपने बिजनेस के लोगो को इतना प्रभावशाली डिज़ाइन करें कि उसे देखने वाला आपके पेज पर जाए बिना रह न पाए।

5.
स्वस्थ प्रतिस्पर्धा करें बिल गेट्स
            आप को प्रतिस्पर्धा में बुराई से बचना चाहिए। स्वस्थ शब्द का अर्थ ऐसी प्रतिस्पर्धा से है जो आपका या फिर दूसरे का नुकसान न करे। प्रतिस्पर्धा आपको अपनी क्षमता को परखने और कठिनाइयों में अपने सपने पूरे करने की शक्ति देती है ।

6.
अपना ध्यान रखें टिम कुक
           
स्टार्टअप प्रारम्भ करने के साथ बहुत सी चिंताएँ सताने लगती हैं । बिजनेस प्लान बनाना, इंवेस्टर्स लाना, फ़ंड्स बढ़ाना, काम के तरीके को सही डिज़ाइन करना, सही लोगों को काम पे रखना, मार्केटिंग, प्रोमोशन, प्रोडक्टिविटी बढ़ाना, सर्विसेज बेहतर करना, नेटवर्क में प्रभाव बढ़ाना, अच्छी स्थिति बनाना, आदि बहुत से काम आपका मानसिक और शारीरिक तनाव बढ़ा सकते हैं । इस तरह के कठिन परिस्थितियों में काम करके आप मानसिक और शारीरिक रूप से कमज़ोर हो सकते हैं । इसलिए आपको अपनी सेहत का पूरा ध्यान रखना होगा, आप स्वस्थ रहेंगे तभी उपलब्धियाँ प्राप्त होंगी ।


7. सम्बंध बनायें लैरी पेज
            जब आपके नेटवर्क में दूसरों के साथ आपके सम्बंध सही होंगे तो बिजनेस आगे बढ़ेगा । इसलिए आप जिन लोगों के साथ काम करते हैं उनसे अच्छे सम्बंध बनाकर रखें । चाहे वो इंवेस्टर्स हों, सप्लायर्स हों या फिर स्टॉफ़ होसभी के साथ अच्छे सम्बंध रखें । भले आप आज किसी व्यक्ति के साथ काम न कर रहे हों लेकिन फिर भी उसके साथ अच्छे सम्बंध रखकर भविष्य में लाभ उठाया जा सकता है ।

            तो अब  इंतज़ार किस बात का है ? उठो, अपने बिजनेस प्लान पर काम करो और सफल बिजनेसमेन की इन बातों का ध्यान रखो । भले इनमें कुछ टिप्स को ही आप मानें लेकिन वो आपको फ़ायदा ज़रूर पहुंचायेंगी ।

एक वरदान - मोटापा.


            गर्व से कहो हम मोटे हैं ! क्रिकेट के बाद मोटापा ही एक ऐसी चीज़ हैं जिस पर कोई भी आम भारतीय विशेषज्ञ की तरह राय दे सकता है । दरअसल मोटापा वो तत्व हैं जिसे देखते ही सामने वाले के भीतर बैठा डॉक्टर जाग उठता हैं और तत्काल वो गिरीशचंद्र से रायचंद्र बन जाता हैं । खुद को भले ही चकुंदर और शलगम में अंतर तक ना पता हो लेकिन आपको खाने पीने की ऐसी ऐसी सलाहें परोसता हैं मानो भाई साब झूलेलाल किराना स्टोर के मालिक नहीं कोई जिम ट्रेनर हों ।

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            कभी कभी लगता है बाल गंगाधर तिलक गलत थे 'जो स्वराज हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है' जैसा नारा दे गए... नारा होना चाहिए था दुसरो के फट्टे में टांग डालना हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है ।

           
माँ द्वारा घी में चुपड़ी गयी बेहिसाब रोटियां, लल्ला हलवाई के नियमित रूप से समोसे व मसाला आलू, बाज़ार में मिलने वाले एक से एक स्वादिष्ट जंक फ़ूड, रोज़ाना 14 घंटे की प्यारी नींद और ना जाने कितने बेहिसाब परिश्रम के बाद इतनी प्यारी तोंद मिलती है । अब इसका सुख वो लोग क्या जाने जो आज भी 28 कमर वाली जीन्स में ही अटके हुए है । तोंद हमें मिलती है अपने परिश्रम व लगन के बलबूते पर, किंतु इसे देख सामने वाला ऐसे जल उठता है मानो आपने उसके हिस्से का छीन कर खाया हो ।

           
भैया मोटापे के अनेक फायदे है, आप अपनी बीवी के साथ निकलो किसी की मज़ाल नहीं कि बीवी को छेड़ सके । आप पति कम बॉडीगार्ड ज्यादा नज़र आते है । बीवी मोटी हो तो डर नहीं सताता कि उसका कही अफेयर होगा । 

            आप मोटे हो तो आपको ये बताने की जरुरत नहीं कि आपकी सैलेरी अच्छी है और आप खाते पीते घर से हो । बेफिक्र होकर आप रक्तदान कर सकते हैं, साथ ही आपके शरीर में इतना खून होता है कि आप मच्छरों को भी भोजन करा सकते हैं जो कि पतले लोगो के बस का नहीं । वो तो 4 मच्छर को खून पिलाये तो उन्हें 2 बोतल खून चढ़ाना पड़ जाएगा...

           
पतले लोग मोटे लोगो पर तंज तो यूँ कसते है मानो धरती की आधी समस्यायों के लिए हम ही जिम्मेदार है। भाई मेरे, तुमने पतले होकर क्या तीर मार लिया... कौन सा ओबामा तुम्हारे साथ बैठ कर तीन पत्ती खेलता है।

           
आप ही बताइये किस क्षेत्र में मोटे लोग नहीं हैं  ?  क्या हनी सिंह  - नुसरत फ़तेह अली खान से अच्छा गायक है  ?  क्या शिखर धवन - सनथ जयसूर्या से अच्छे बल्लेबाज़ है  ?  क्या अनिल अम्बानी - मुकेश अम्बानी से ज्यादा अमीर है  ?  क्या मिथुन दा - गणेश आचार्य से अच्छे डांसर हैं...बोलिये  ?

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अपने मोटापे पर शर्म नहीं गर्व कीजिये - हमारे कारण ही बाबा रामदेव ने नाम कमाया है । लोग मोटे ना होते तो वो योग किसे सिखाते...क्या राजपाल यादव को ? हम जैसे मोटे लोगों के कारण ही कितने डॉक्टर व जिम वालों की रोज़ी रोटी चल रही है । माना हम तेज़ दौड़ नहीं सकते पर तेज़ दौड़ के हमें कौन सा काला धन लाना है । मोटापा आपको अच्छी व गहरी नींद देता है । बढ़ता मोटापा आपको हर महीने नए कपडे खरीदने का मौक़ा भी देता है । 

           
अत: मोटापा श्राप नहीं वरदान है । तोंद शर्म नहीं ईश्वरीय प्रसाद है । शर्माइये मत...!  गर्व से कहिये हम मोटे हैं......!

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             आँसू मुस्कुराहट से ज्यादा अच्छे होते है...
         जानते हैं क्यूं -_क्योंकि मुस्कुराहट सभी के लिये होती है ।
          जबकि आँसू किसी खास के लिए होते है ।

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