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रविवार, 6 अक्टूबर 2019

पैसा ये कैसा...





मैं पैसा हूँ...
            मुझे आप मरने के बाद ऊपर नहीं ले जा सकते, मगर जीते जी मैं आपको बहुत ऊपर ले जा सकता हूँ ।

मैं पैसा हूँ...
            मुझे पसंद करो सिर्फ इस हद तक कि लोग आपको नापसन्द न करने लगें ।

मैं पैसा हूँ...
            मैं भगवान् नहीं मगर लोग मुझे भगवान् से कम नहीं मानते ।

मैं पैसा हूँ...
            मैं नमक की तरह हूँ, जो जरुरी तो है मगर जरुरतसे ज्यादा हो तो जिंदगी का स्वाद बिगाड़ देता है ।

मैं पैसा हूँ...
             इतिहास में कई ऐसे उदाहरण मिल जाएंगे जिनके पास मैं बेशुमार था, मगर फिर भी वो  मरे तो उनके लिए कोई रोने  वाला भी नहीं था ।


मैं पैसा हूँ...
            मैं कुछ भी नहीं हूँ; मगर मैं निर्धारित करता हूँ, कि लोग आपको कितनी इज्जत देते है ।

मैं पैसा हूँ...
            मैं आपके पास हूँ तो आपका हूँ । आपके पास नहीं हूँ तो आपका नहीं हूँ  । मगर मैं आपके पास हूँ तो आपकी चाही सभी वस्तुएँ आपकी हैं । 


 
मैं पैसा हूँ...
             मैं नई नई रिश्तेदारियाँ बनाता हूँ, मगर असली औऱ पुरानी बिगाड़ भी देता हूँ । 

मैं पैसा हूँ...
             मैं सारे फसाद की जड़ हूँमगर फिर भी न जाने क्यों सब मेरे पीछे इतना पागल हैं ।

क्यों ? विचार कीजिये...

सोमवार, 9 जनवरी 2017

भारतीय मुद्रा तब से अब तक


           किस-किस की जानकारी में है ये - प्राचीन भारतीय मुद्रा प्रणाली

           फूटी कौड़ी (Phootie Cowrie) से कौड़ी,

           कौड़ी से दमड़ी (Damri),

           दमड़ी से धेला (Dhela),

           धेला से पाई (Pie),

           पाई से पैसा (Paisa),

           पैसा से आना (Aana),

           आना से रुपया (Rupya) बना ।

           256 दमड़ी = 192 पाई = 128 धेला = 64 पैसा  (old) = 16 आना = 1 रुपया.

            प्राचीन मुद्रा की इन्हीं इकाइयों ने हमारी बोल-चाल की भाषा को   कई कहावतें दी हैं, जो पहले की तरह अब भी प्रचलित हैं ।  देखिए :
          

           ●   एक 'फूटी कौड़ी' भी नहीं दूंगा ।
 
           ●   'धेले' का काम नहीं करती हमारी बहू !

 
           ●   चमड़ी जाये पर 'दमड़ी' न जाये ।

 
           ●   'पाई-पाई' का हिसाब रखना ।

 
           ●   सोलह 'आने' सच ! आदि । 


ऐतिहासिक शख्सियत...

पागी            फोटो में दिखाई देने वाला जो वृद्ध गड़रिया है    वास्तव में ये एक विलक्षण प्रतिभा का जानकार रहा है जिसे उपनाम मिला था...