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शुक्रवार, 5 अगस्त 2016

मैं पैसा हूँ...



मैं पैसा हूँ...
            मुझे आप मरने के बाद ऊपर नहीं ले जा सकते, मगर जीते जी मैं आपको बहुत ऊपर ले जा सकता हूँ ।

मैं पैसा हूँ...
            मुझे पसंद करो सिर्फ इस हद तक कि लोग आपको नापसन्द न करने लगें ।

मैं पैसा हूँ...
            मैं भगवान् नहीं मगर लोग मुझे भगवान् से कम नहीं मानते ।

मैं पैसा हूँ...
            मैं नमक की तरह हूँ, जो जरुरी तो है मगर जरुरतसे ज्यादा हो तो जिंदगी का स्वाद बिगाड़ देता है ।

मैं पैसा हूँ...
             इतिहास में कई ऐसे उदाहरण मिल जाएंगे जिनके पास मैं बेशुमार था, मगर फिर भी वो  मरे तो उनके लिए कोई रोने  वाला भी नहीं था ।


मैं पैसा हूँ...
            मैं कुछ भी नहीं हूँ; मगर मैं निर्धारित करता हूँ, कि लोग आपको कितनी इज्जत देते है ।

मैं पैसा हूँ...
            मैं आपके पास हूँ तो आपका हूँ । आपके पास नहीं हूँ तो आपका नहीं हूँ  । मगर मैं आपके पास हूँ तो आपकी चाही सभी वस्तुएँ आपकी हैं । 


 मैं पैसा हूँ...
             मैं नई नई रिश्तेदारियाँ बनाता हूँ, मगर असली औऱ पुरानी बिगाड़ भी देता हूँ । 

मैं पैसा हूँ...
             मैं सारे फसाद की जड़ हूँ,  मगर फिर भी न जाने क्यों सब मेरे पीछे इतना पागल हैं ।
 
क्यों ? विचार कीजिये...


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