इस ब्लाग परिवार के हमारे सदस्य साथी....

बुधवार, 6 जुलाई 2016

कैसे विकास हो उस देश का ..?


            जहां डेढ लाख सैलरी हर महीना पाने वाले सांसदो की सैलरी Income Tax Free ... और 24 घंटे मौत की छांव मे रहने वाले सिपाही को बीस हजार सैलरी पर भी Income Tax देना पडता हो ।

            सांसदो को परिवार के साथ रहते हुए भी हर साल पचास हजार Phone Call Free .... और घर सें हजारों km दूर बैठे सैनिक को एक Call भी Free नहीं ? 

            एक सांसद को फर्नीचर के लिए 75000 हजार रु और बार्डर पर सैनिक को ड्यूटी के दौरान बारिस से बचने के लिए टूटी हुई छप्पर !
            
            सांसद को हर साल 34 हवाई टिकट मुफ्त और सैनिक को ड्यूटी पर जाते हुए भी अपने पैसे से टिकट लेता हो ?

            सांसद को वाहन के लिए 400000/-  का intetest Free लोन और एक सैनिक को घर के लिए लोन भी 12% की दर से मिलता हो ?

            और ये सब वहां हो रहा है जहां पूरा देश इस सैनिक की वजह सें अपने परिवार के साथ चैन सें सोता है ..!

            एक बेटी ने अपनी मां से पूछा-

           मां रेडियो पे सुना ईंडिया जीत गई ..! जो खेल रहे थे उन्हें एक करोड़ रु. मिले.

            मां बोली–  हाँ बेटी ..! सरकार कहती है वो देश के लिए खेल रहे थे इसलिए।

            बेटी आसमान में हेलीकॉप्टर से लटकते जवान को देख के बोली- मां क्या इन्हे भी मिलेगा एक करोड़ ..?

            मां बोली – ना बेटी ना ..?  हमारे यहां बल्ले से खेलने वाले को ईनाम मिलता है ..!  जान से खेलने वाले को नही  ! 

            उपरोक्त विचार यदि हृदय को स्पर्श करे तो निवेदन है कि इसे आगे भी अग्रेषित करें ।

जाने क्यूं  ?

"जाने क्यूं अब शर्म से, चेहरे गुलाब नही होते,
जाने क्यूं अब मस्त मौला मिजाज नही होते ।

पहले बता दिया करते थे, दिल की बातें,
जाने क्यूं  अब चेहरे, खुली किताब नही होते ।

सुना है बिन कहे दिल की बात समझ लेते थे,
गले लगते ही दोस्त हालात समझ लेते थे ।

तब ना स्मार्टफोन, ना
फेसबुक/ट्विटर अकाउंट था,
एक चिट्टी से ही लोग, दिलों के जज्बात समझ लेते थे ।


सोचता हूं हम कहां से कहां आ गये,
प्रेक्टीकली सोचते-सोचते, भावनाओं को खा गये ।

अब भाई भाई से समस्या का समाधान कहां पूछता है,
अब बेटा बाप से उलझनों का निदान कहां पूछता है ।

बेटी नही पूछती, मां से गृहस्थी के सलीके,
अब कौन गुरु के चरणों में बैठकर, ज्ञान की परिभाषा सीखता है ।

परियों की बातें, अब किसे भाती है,
अपनो की याद भला अब किसे रुलाती हैं ।

अब कौन गरीब को सखा बताता है
अब कहां सुदामा को कृष्ण गले लगाता है ।

जिन्दगी मे अब हम प्रेक्टिकल हो गये है.
मशीन बन गये है सब, इंसान जाने कहां खो गये है !


सोर्स : WhatsApp.
 
 

2 टिप्पणियाँ:

HARSHVARDHAN ने कहा…

आपकी ब्लॉग पोस्ट को आज की ब्लॉग बुलेटिन प्रस्तुति स्वर्गीय डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। सादर ... अभिनन्दन।।

Digamber Naswa ने कहा…

वाह ... एक अच्छा संकलन है शेरों और अच्छी बातों का ...

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...