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मंगलवार, 13 जनवरी 2015

सुख की दुश्मन : ईर्ष्या.



बहुत पहले की बात है – किसी गांव में एक गरीब किसान रहता था, उसके पास एक छोटा सा खेत था जिसमें सब्जियां उगाकर वह अपना व परिवार का पेट पालता था । गरीबी के कारण उसके पास धन की हमेशा कमी रहती थी । स्वभावतः वह बहुत ईर्ष्यालु स्वभाव का था इस कारण उसकी अडौसी-पडौसी व रिश्तेदारों से बिल्कुल नहीं निभती थी । किसान की उम्र ढलने लगी थी अतः उसे खेत पर काम करने में बहुत मुश्किले आती थी । खेत जोतने के लिये उसके पास बैल नहीं थे, सिंचाई के लिये वर्षा पर निर्भर रहना पडता था, खेत में या आस-पास कोई कुआँ भी नहीं था जिससे वह अपने खेतों की सिंचाई कर पाता ।

     एक दिन वह थका-हारा अपने खोत से लोट रहा था । उसे रास्ते में सफेद कपडों में सफेद दाढी वाला एक बूढा मिला । बूढा उससे बोला – क्या बात है भाई, बहुत दुःखी जान पडते हो ? किसान बोला – क्या बताऊँ बाबा, मेरे पास धन की बहुत कमी है । यदि मेरे पास एक बैल होता तो मैं खेत की जुताई, बुआई और सिंचाई का सारा काम आराम से कर लेता । बूढा बोला – अगर तुम्हें एक बैल मिल जाए तो तुम क्या करोगे ? तब मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहेगा, मेरी खेती का सारा काम बहुत आसान हो जाएगा । पर बैल मुझे मिलेगा कहाँ से ? किसान बोला ।

     मैं आज ही तुम्हें एक बैल दिए देता हूँ, यह बैल अपने घर ले जाओ और घर जाकर अपने पडौसी को मेरे पास भेज देना, बूढे ने कहा । किसान बोला – आप मुझे बैल दे रहे हैं यह जानकर मुझे बहुत खुशी हो रही है । किन्तु आप मेरे पडौसी से क्यों मिलना चाहते हैं ? बूढा बोला अपने पडौसी से कहना कि वह मेरे पास आकर दो बैल ले जाए ।

     बूढे की बात सुनकर किसान को भीतर ही भीतर क्रोध आने लगा, वह ईष्या के कारण जल-भुन कर रह गया । वह बूढे से बोला – आप नहीं जानते कि मेरे पडौसी के पास सब-कुछ है । यदि आप मेरे पडौसी को भी दो बैल देना चाहते हैं तो मुझे तुम्हारा एक बैल भी नहीं चाहिये ।

     बूढे ने तत्काल बैल को अपनी ओर वापस खींच लिया और कहा – क्या तुम जानते हो कि तुम्हारी समस्या क्या है ? तुम्हारी समस्या गरीबी नहीं बल्कि ईर्ष्या है । तुम्हें जो कुछ मिल रहा है, यदि तुम उसी को देखकर संतुष्ट हो जाते और पडौसियों व रिश्तेदारों की सुख-सुविधा से ईर्ष्या न करते तो शायद संसार में सबसे सुखी इन्सान बन जाते ।

2 टिप्पणियाँ:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

सार्थक प्रस्तुति।
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (14-01-2015) को अधजल गगरी छलकत जाये प्राणप्रिये..; चर्चा मंच 1857 पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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उल्लास और उमंग के पर्व
लोहड़ी और मकरसंक्रान्ति की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ...
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

मन के - मनके ने कहा…

सत्य—कटुसत्य---महामारी का रूप ले रहा है.
आज हम अपने दुख से दुखी नहीम हैम,
दूसरे के सुख हमेम पीदा देते हैं.

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