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शनिवार, 11 जून 2016

दिलदारी - दुनियादारी...


            1.   जो आपसे दिल से बात करता है, उसे कभी दिमाग से जवाब मत देना ।
            2.  एक साल मे 50 मित्र बनाना आम बात है पर 50 साल तक एक मित्र से मित्रता निभाना खास बात है ।

            3.  एक वक्त था जब हम सोचते थे कि  हमारा भी वक्त आएगा, और अब एक ये वक्त है जब हम सोचते है कि वो भी क्या वक्त था ।

            4.  एक मिनट मे जिन्दगी नही बदलती, पर एक मिनट सोच कर लिया फैसला पूरी जिन्दगी बदल देता है ।

            5.  आप जीवन मे कितने भी ऊँचे क्यो न उठ जाएं, पर अपनी गरीबी और कठिनाई को कभी मत भूलिए ।

            6.  वाणी मे भी अजीब शक्ति होती है, कडवा बोलने वाले का शहद भी नही बिकता और मीठा बोलने वाले की मिर्ची भी बिक जाती है ।

            7.  जीवन मे सबसे बङी खुशी उस काम को करने मे है, जिसे लोग कहते है कि यह तुम्हारे बस की बात नहीं है ।

            8.  इंसान एक दुकान है और जुबान उसका ताला ।  ताला खुलता है, तभी मालूम होता है कि दुकान सोने की है या कोयले की ।

            9.  कामयाब होने के लिए जिन्दगी मे कुछ ऐसा काम करो कि लोग आपका नाम Facebook पे नही Google पे सर्च करें ।

          10.  दुनिया विरोध करे, तुम ङरो मत क्योकि जिस पेड पर फल लगते हैं,  दुनिया उसे ही पत्थर मारती है ।

            11.  जीत और हार आपकी सोच पर ही निर्भर है, मान लो तो हार होगी और ठान लो तो जीत होगी ।

            12.  दुनिया की सबसे सस्ती चीज है सलाह, एक से मांगो हजारो से मिलती है जबकि सहयोग हजारो से मांगो तो बमुश्किल किसी एक से मिलता है ।

            13.  मैने धन से कहा कि तुम सिर्फ कागज के एक टुकङे हो, धन मुस्कराया और बोला बिल्कुल मै एक कागज का एक टुकङा ही हूँ, लेकिन मैने आज तक अपनी जिन्दगी मे कभी कूङेदान का मुँह नही देखा ।

            14.  आँधियो ने लाख बढाया हौसला धूल का, पर दो बूंद बारिश ने औकात बता दी !

            15.  जब एक रोटी के चार टुकडे हों  और खाने वाले पांच हो तब- मुझे भूख नही है ऐसा कहने वाली शख्सियत सिर्फ "माँ" ही हो सकती है ।

            16.  जब लोग आपकी नकल करने लगें तो समझ लेना - कि आप जीवन मे सफल हो रहे हैं ।

            17.   मत फेंक पत्थर पानी मे उसे भी कोई पीता है, मत रहो उदास यूं जिन्दगी मे, तुम्हे देखकर भी कोई जीता है ।


3 टिप्पणियाँ:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (13-06-2016) को "वक्त आगे निकल गया" (चर्चा अंक-2372) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

मनीष प्रताप ने कहा…

बहुत ही यथार्थपरक बातें बताईंं आपने।

Pratibha Verma ने कहा…

बहुत बढ़िया ...

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