शुक्रवार, 4 अक्तूबर 2019

प्रवृति आम आदमी की.

          इन दिनों WhatsApp पर भारत के आम इन्सान की सोच व समस्या से मिलती-जुलती एक पोस्ट देखने में आ रही है । पसन्द आने पर मैं इसे अपने इस ब्लॉग पर भी शेअर कर रहा हूँ, उम्मीद है यदि आपने पहले इसे न देखा होगा तो आपको भी पढने में शायद अच्छी लगेगी...

यह नदियों का मुल्क है, पानी भी भरपूर है ।
बोतल में बिकता है, पन्द्रह रू शुल्क है ।

यह गरीबों का मुल्क है, जनसंख्या भी भरपूर है ।
परिवार नियोजन मानते नहीं, नसबन्दी नि:शुल्क है ।

यह अजीब मुल्क है,  निर्बलों पर हर शुल्क है ।
अगर आप हों बाहुबली, हर सुविधा नि:शुल्क है।

यह अपना ही मुल्क है, कर कुछ सकते नहीं।
कह कुछ सकते नहीं, बोलना नि:शुल्क है।

यह शादियों का मुल्क है, दान दहेज भी खूब है ।
शादी को पैसा नहीं तो, कोर्ट मैरिज नि:शुल्क हैं ।

यह पर्यटन का मुल्क है, रेलें भी खूब हैं ।
बिना टिकट पकड़े गए तो, रोटी कपड़ा नि:शुल्क है ।

यह अजीब मुल्क है, हर जरूरत पर शुल्क है ।
ढूंढ कर देते हैं लोग, सलाह नि:शुल्क है ।

यह आवाम का मुल्क है, चुनने का हक है ।
वोट देने जाते नहीं, मतदान नि:शुल्क है ।

यह शिक्षकों का मुल्क है, पाठशालाएं भी खूब है,
शिक्षकों को वेतन के पैसे नहीं, पढ़ना, खाना, निःशुल्क है ।


विसंगतियों में आम आदमी-

सर के बाल उडे तो दवाई ढूँढता है..,
जब उग जावे तो नाई ढूँढता है..,
काले रहते हैं तो लुगाई ढूँढता है
सफ़ेद हो जाएँ तो डाई ढूँढता है ।
         

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