सोमवार, 7 अक्तूबर 2019

वृद्धावस्था में सामान्य माता-पिता का जीवन...


             जैसे ही युवा पुत्र-पुत्रियों के वैवाहिक व कामकाजी जीवन की शुरुआत होती है, देखते ही देखते उनके माता-पिता का जीवन बुढापे के आगोश में समाने लगता है । सुबह की सैर पर जाते वक्त चक्कर आ जाते हैं तो अचेतावस्था की स्थिति में आने के बावजूद जबकि ये बात उनके सैर पर जाने वाले साथियों के द्वारा पूरे मोहल्ले को मालूम हो जाती है, वे अपनी संतान से उस स्थिति को छुपाते दिखते हैं ।

          अपने स्वास्थ्य व खर्च को संतुलित रखने की कोशिश में कभी अपनी खुराक घटाते दिखते हैं तो कभी अपने ढीले हो चुके वस्त्रों को पुनः रिपेयर करवाते दिखते हैं लेकिन तब भी अपने बच्चों को कोई परेशानी न हो या उन पर हमसे सम्बन्धित कोई आर्थिक भार न पडे वे अक्सर इन विषयों पर बात करने से बचने की कोशिश ही करते दिखाई देते हैं ।

          फोन पर जब भी बात करते हैं तो अक्सर अपने बारे में हम बिल्कुल ठीक हैं कि शैली में ही जवाब देते दिखते हैं, जबकि अपने परिचितों के दायरे में कभी कोई मृत्यु की खबर मिल जाए तो  चिंतित अवस्था में अपने परहेज और भी सख्ती से पालते दिखाई देते हैं । बच्चों के बढते वजन पर जब-तब उन्हें चेतावनी देने की कोशिश करते हुए रोजाना वाकिंग, एक्सरसाईज व योग जैसी गतिविधियों को 'पहला सुख निरोगी काया' के सिद्धांतानुसार निरन्तर अपनाने की सलाह देते दिखते हैं ।

          वर्ष-दर-वर्ष बैंक में अपने जीवित होने का प्रमाण दर्ज करवाते हैं, कभी पेंशन या अन्य किसी माध्यम से थोडी भी आय में वृद्धि दिखाई दे तो खुशी से फूले नहीं समाते । अपनी छोटी-मोटी बचत की FD को बिना नागा रिन्यू करवाते हैं । कम से कम खर्च करके ज्यादा से ज्यादा बचत हमारे बाद भी बच्चों के काम आ सके इसी सिद्धांत पर जीवन बिताने का प्रयास करते दिखाई देते हैं । 

          सामान्य जरुरत की चीजें अक्सर रख कर भूल जाते हैं फिर उन्हें ढूंढने में न सिर्फ सारा घर सर पर उठा लेते हैं, बल्कि आपस में भी एक-दूसरे पर दोषारोपण करते हुए बात-बात पर झुंझलाते दिखते हैं, किन्तु बगैर जीवनसाथी के रह भी नहीं पाते हैं ।

          अपने गिने-चुने मिलने-जुलने वाले लोगों में अक्सर एक ही किस्से को बार-बार दोहराते दिखते हैं । चश्मे से भी ठीक से न देख पाने के बावजूद डॉक्टर के पास जाने में या एलोपैथी की दवाएँ साईड इफेक्ट के नाम पर लेने की बजाय सस्ती आयुर्वेदिक व होम्योपैथी की दवाईयों से काम चलाने की कोशिश करते हैं ।

          गरिष्ठ भोजन नहीं पचा पाने के कारण लौकी, गिलकी, तुराई व मूंग की दाल जैसे सात्विक आहार पर जीवित रहने की कोशिश करते हैं, किसी भी बडी से बडी समस्या में भी स्पेशलिस्ट डॉक्टर के पास जाने या ऑपरेशन जैसी मंहगी स्थितियों को यह कहकर टालते दिखते हैं कि काम तो चल ही रहा है ।

         
यदि बच्चे अपने कैरियर की आवश्यकता के अनुसार बाहर रहते हैं तो हर महत्वपूर्ण त्यौंहार पर बच्चों के आने की राह तकते दिखाई देते हैं । उनके आने की स्वीकृति मिलते ही घर को यथासम्भव चमकाकर उनकी पसन्द की चीजों का पहले से इन्तजाम करके रखते हैं । नाती-पोतों की प्रतिक्षा में अक्सर आंसू भी बहाते दिखाई देते हैं, उनकी छोटी से छोटी फरमाईशों पर दौड कर बाजार पहुंच जाते हैं ।

          हमेशा खुद के लिये बिल्कुल कामचलाऊ और बच्चों व उनके बच्चों के लिये सर्वश्रेष्ठ का प्रयास ही करते दिखाई देते हैं और इसी प्रकार देखते ही देखते मां-बाप बूढे होते चले जाते हैं ।

रविवार, 6 अक्तूबर 2019

मानसिक शांति के लिये आवश्यक काम की 10 बातें...





 उतना ही काटें जितना चबाया जा सके अर्थात्
उतना ही काम हाथ में लें जितना पूरा कर सकें.


किसी के काम में तब तक दखल न दें जब तक कि 
आपसे उस बाबद कुछ पूछा नहीं जाए.


माफ करना और कुछ बातों को भूल जाना भी सीखें.


हर कार्य में पहचान पाने की लालसा न रखें.


ईर्ष्या (जलन) की भावना से दूर रहें.


हर सुबह अपना कायाकल्प कीजिए- 
15 मिनिट योगासन+10 मिनिट प्राणायाम+15 मिनिट ध्यान= 
जीवन में आरोग्य, आनंद और उत्साह की मौजूदगी.


माहौल के मुताबिक खुदको ढालने का प्रयास करें.


अपने नियमित संपर्कों में जो लोग बदल नहीं सकते
उन्हें सहन करना सीखें.


किसी काम को टालने से बचें 
और ऐसा भी कोई काम न करेंजिससे बाद में पछताना पडे.


दिमाग को यथासंभव खाली न रहने दें. 
क्योंकि खाली दिमाग शैतान का घर होता है.

समस्या और समाधान...


      एक युवती ने अपने मनपसंद युवक से शादी की किंतु कुछ समय बाद रिश्तों में ऐसी उलझने आने लगी कि निबाह मुश्किल होता चला गया । दोनों ने आपसी समझ-बूझ से तलाक ले लिया । कुछ समय बाद युवती ने पुनः एक युवक का इस समझदारी से चुनाव करने का प्रयास किया कि पहले वाले युवक जैसी समस्या उस युवक के साथ आगे चलकर नहीं आ पाये । संयोगवश उसे ऐसा युवक मिल भी गया और उन दोनों ने शादी कर ली । किंतु यह क्या ? कुछ समय पश्चात् यहाँ कुछ अन्य समस्याएँ इस प्रकार की आने लगीं जो पिछली शादी से भी अधिक कष्टदायी लगने लगी और यह सम्बन्ध भी आगे नहीं चल पाया ।

           फिर एक नया सम्बन्ध फिर कुछ नई समस्याएँ... सम्बन्ध टूटते रहे और नये साथी की तलाश व उससे जुडाव का सिलसिला चलता चला गया । एक-एक कर वह युवती सात बार अलग-अलग युवकों से शादी कर चुकी किंतु निबाह किसी एक के साथ भी नहीं कर पाई । अंततः उसने अपने किसी परिचित बुजुर्ग से इस समस्या का कारण समझने का प्रयास किया । उस बुजुर्ग ने उस युवती से पूछा कि तुमने सात बार शादियां की और हर शादी नाकाम रही तो तुम यह बताओ कि हर बार लडके का चुनाव किसने किया ? जी मैंने ही किया. लडकी ने जवाब दिया ।

       ठीक है अबकी बार तुम शादी अवश्य करो किंतु लडके का चुनाव तुम स्वयं मत करो बल्कि किसी ऐसे व्यक्ति से यह चुनाव करवाओ जिसे तुम अपना सच्चा शुभचिंतक मानती हो । उस युवती ने उन बुजुर्ग की सलाह का पालन किया और अपने किसी अनुभवी शुभचिंतक परिजन से अपने लिये लडका चुनने का अनुरोध किया । उन्होंने उस युवती के लिये कुछ लडकों को देखने-परखने के बाद एक युवक को उस युवती के लिये चयनित किया जिसे उस युवती ने स्वीकार भी किया । उन युवक-युवती की शादी भी हो गई और रोजमर्रा के जीवन की वे छोटी-मोटी सामान्य समस्याएँ जो प्रायः हर किसीके जीवन में आती रहती हैं और जिनसे निपटते चलते जिंदगी का क्रम चलता रहता है से बडी कोई ऐसी समस्या उस युवती के जीवन में फिर महसूस नहीं हुई जिससे कि उस सम्बन्ध के साथ जिंदगी का सामान्य क्रम आगे चलते रहने में कोई विशेष कठिनाई महसूस हुई हो और निबाह असंभव सा लगने लगा हो । कहने कि आवश्यकता ही नहीं है कि उसके बाद उस युवती को तलाक या नई शादी के पेचिदगी में नहीं उलझना पडा ।

सुख की दुश्मन : ईर्ष्या.

              बहुत पहले की बात है किसी गांव में एक गरीब किसान रहता था, उसके पास एक छोटा सा खेत था जिसमें सब्जियां उगाकर वह अपना व परिवार का पेट पालता था । गरीबी के कारण उसके पास धन की हमेशा कमी रहती थी । स्वभावतः वह बहुत ईर्ष्यालु स्वभाव का था इस कारण उसकी अडौसी-पडौसी व रिश्तेदारों से बिल्कुल नहीं निभती थी । किसान की उम्र ढलने लगी थी अतः उसे खेत पर काम करने में बहुत मुश्किले आती थी । खेत जोतने के लिये उसके पास बैल नहीं थे, सिंचाई के लिये वर्षा पर निर्भर रहना पडता था, खेत में या आस-पास कोई कुआँ भी नहीं था जिससे वह अपने खेतों की सिंचाई कर पाता ।

     एक दिन वह थका-हारा अपने खोत से लोट रहा था । उसे रास्ते में सफेद कपडों व दाढी वाला एक बूढा मिला । बूढा उससे बोला–  क्या बात है भाई, बहुत दुःखी जान पडते हो ? किसान बोला क्या बताऊँ बाबा, मेरे पास धन की बहुत कमी है । यदि मेरे पास एक बैल होता तो मैं खेत की जुताई, बुआई और सिंचाई का सारा काम आराम से कर लेता । बूढा बोला अगर तुम्हें एक बैल मिल जाए तो तुम क्या करोगे ? तब मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहेगा, मेरी खेती का सारा काम बहुत आसान हो जाएगा । पर बैल मुझे मिलेगा कहाँ से ? किसान बोला ।

     मैं आज ही तुम्हें एक बैल दिए देता हूँ, यह बैल अपने घर ले जाओ और घर जाकर अपने पडौसी को मेरे पास भेज देना, बूढे ने कहा । किसान बोला आप मुझे बैल दे रहे हैं यह जानकर मुझे बहुत खुशी हो रही है । किन्तु आप मेरे पडौसी से क्यों मिलना चाहते हैं ? बूढा बोला अपने पडौसी से कहना कि वह मेरे पास आकर दो बैल ले जाए । 

     बूढे की बात सुनकर किसान को भीतर ही भीतर क्रोध आने लगा, वह ईष्या के कारण जल-भुन कर रह गया । वह बूढे से बोला आप नहीं जानते कि मेरे पडौसी के पास सब-कुछ है । यदि आप मेरे पडौसी को भी दो बैल देना चाहते हैं तो मुझे तुम्हारा एक बैल भी नहीं चाहिये ।

     बूढे ने तत्काल बैल को अपनी ओर वापस खींच लिया और कहा क्या तुम जानते हो कि तुम्हारी समस्या क्या है ? तुम्हारी समस्या गरीबी नहीं बल्कि ईर्ष्या है । तुम्हें जो कुछ मिल रहा है, यदि तुम उसी को देखकर संतुष्ट हो जाते और पडौसियों व रिश्तेदारों की सुख-सुविधा से ईर्ष्या न करते तो शायद संसार में सबसे सुखी इन्सान बन जाते ।

सुख की तलाश...!

ऐ सुख तू कहाँ मिलता है, क्या तेरा कोई स्थायी पता है,
क्यों बना बैठा है अन्जाना, आखिर कहाँ है तेरा ठिकाना ?

कहाँ-कहाँ ढूंढा तुझको, पर तू न मिला कहीं मुझको,
ढूंढता रहा ऊंचे मकानों में, बडे-बडे शोरुम व दुकानों में,
स्वादिष्ट मीठे पकवानों में, चोटी के बडे धनवानों में,
वो भी तुझको ढूंढ रहे थे, बल्कि मुझसे ही पूछ रहे थे ।

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क्या आपको कुछ पता है, आखिर ये सुख रहता कहाँ है,
मेरे पास तो दुःख का पता है, जो सुबह-शाम मिलता रहता था ।
परेशान होकर रपट लिखवाई, पर ये कोशिश भी काम न आई,
उम्र अब  ढलान पर है, हौसले भी  थकान पर हैं ।

हाँ उसकी तस्वीर है मेरे पास, बची हुई है अब भी आस,
मैं भी हार नहीं मानूंगा, सुख के रहस्य को अवश्य जानूंगा ।
बचपन में मिला करता था, संग मेरे रहा करता था,
पर जबसे बडा मैं हो गया, सुख मुझसे जुदा हो गया ।

मैं फिर भी नहीं हुआ हताश, जारी रखी उसकी तलाश,
एक दिन जब आवाज ये आई, क्या मुझको ढूंढ रहा है भाई ।
मैं तेरे अन्दर छुपा हुआ हूँ, तेरे ही घर में बसा हुआ हूँ,
मेरा नहीं है कुछ भी मोल, सिक्कों में न मुझको तोल ।

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मैं बच्चों की मुस्कानों में हूँ, संगीत की मधुर तानों में हूँ,
पत्नी के साथ चाय पीने में, परिवार के संग जीने में ।
माँ-बाप के आशीर्वाद में, रसोई घर के महाप्रसाद में,
बच्चों की सफलता में हूँ, माँ की निश्छल ममता में हूँ ।

हर पल तेरे संग रहता हूँ और अक्सर ही तुझसे कहता हूँ,
मैं तो हूँ बस एक एहसास, बंद करदे तू मेरी तलाश,
मिले उसी में कर संतोष, आज को जी, कल की कल सोच,

कल के लिये आज को न खो, मेरे लिये कभी दुःखी न हो 

पैसा ये कैसा...





मैं पैसा हूँ...
            मुझे आप मरने के बाद ऊपर नहीं ले जा सकते, मगर जीते जी मैं आपको बहुत ऊपर ले जा सकता हूँ ।

मैं पैसा हूँ...
            मुझे पसंद करो सिर्फ इस हद तक कि लोग आपको नापसन्द न करने लगें ।

मैं पैसा हूँ...
            मैं भगवान् नहीं मगर लोग मुझे भगवान् से कम नहीं मानते ।

मैं पैसा हूँ...
            मैं नमक की तरह हूँ, जो जरुरी तो है मगर जरुरतसे ज्यादा हो तो जिंदगी का स्वाद बिगाड़ देता है ।

मैं पैसा हूँ...
             इतिहास में कई ऐसे उदाहरण मिल जाएंगे जिनके पास मैं बेशुमार था, मगर फिर भी वो  मरे तो उनके लिए कोई रोने  वाला भी नहीं था ।


मैं पैसा हूँ...
            मैं कुछ भी नहीं हूँ; मगर मैं निर्धारित करता हूँ, कि लोग आपको कितनी इज्जत देते है ।

मैं पैसा हूँ...
            मैं आपके पास हूँ तो आपका हूँ । आपके पास नहीं हूँ तो आपका नहीं हूँ  । मगर मैं आपके पास हूँ तो आपकी चाही सभी वस्तुएँ आपकी हैं । 


 
मैं पैसा हूँ...
             मैं नई नई रिश्तेदारियाँ बनाता हूँ, मगर असली औऱ पुरानी बिगाड़ भी देता हूँ । 

मैं पैसा हूँ...
             मैं सारे फसाद की जड़ हूँमगर फिर भी न जाने क्यों सब मेरे पीछे इतना पागल हैं ।

क्यों ? विचार कीजिये...

दिलदारी - दुनियादारी...


          1.   जो आपसे दिल से बात करता है, उसे कभी दिमाग से जवाब मत देना ।
            2.  एक साल मे 50 मित्र बनाना आम बात है पर 50 साल तक एक मित्र से मित्रता निभाना खास बात है ।

            3.  एक वक्त था जब हम सोचते थे कि  हमारा भी वक्त आएगा, और अब एक ये वक्त है जब हम सोचते है कि वो भी क्या वक्त था ।

            4. 
एक मिनट मे जिन्दगी नही बदलती, पर एक मिनट सोच कर लिया फैसला पूरी जिन्दगी बदल देता है ।

            5. 
आप जीवन मे कितने भी ऊँचे क्यो न उठ जाएं, पर अपनी गरीबी और कठिनाई को कभी मत भूलिए ।

            6. 
वाणी मे भी अजीब शक्ति होती है, कडवा बोलने वाले का शहद भी नही बिकता और मीठा बोलने वाले की मिर्ची भी बिक जाती है ।

            7. 
जीवन मे सबसे बङी खुशी उस काम को करने मे है, जिसे लोग कहते है कि यह तुम्हारे बस की बात नहीं है ।

            8. 
इंसान एक दुकान है और जुबान उसका ताला ।  ताला खुलता है, तभी मालूम होता है कि दुकान सोने की है या कोयले की ।

            9. 
कामयाब होने के लिए जिन्दगी मे कुछ ऐसा काम करो कि लोग आपका नाम Facebook पे नही Google पे सर्च करें ।

          10. 
दुनिया विरोध करे, तुम ङरो मत क्योकि जिस पेड पर फल लगते हैंदुनिया उसे ही पत्थर मारती है ।

            11. 
जीत और हार आपकी सोच पर ही निर्भर है, मान लो तो हार होगी और ठान लो तो जीत होगी ।

            12. 
दुनिया की सबसे सस्ती चीज है सलाह, एक से मांगो हजारो से मिलती है जबकि सहयोग हजारो से मांगो तो बमुश्किल किसी एक से मिलता है ।

            13. 
मैने धन से कहा कि तुम सिर्फ कागज के एक टुकङे हो, धन मुस्कराया और बोला बिल्कुल मै एक कागज का एक टुकङा ही हूँ, लेकिन मैने आज तक अपनी जिन्दगी मे कभी कूङेदान का मुँह नही देखा ।

            14. 
आँधियो ने लाख बढाया हौसला धूल का, पर दो बूंद बारिश ने औकात बता दी !

            15. 
जब एक रोटी के चार टुकडे हों  और खाने वाले पांच हो तब- मुझे भूख नही है ऐसा कहने वाली शख्सियत सिर्फ "माँ" ही हो सकती है ।

            16. 
जब लोग आपकी नकल करने लगें तो समझ लेना - कि आप जीवन मे सफल हो रहे हैं ।

            17.  
मत फेंक पत्थर पानी मे उसे भी कोई पीता है, मत रहो उदास यूं जिन्दगी मे, तुम्हे देखकर भी कोई जीता है ।

सफल बिजनेसमेन बनने के टिप्स - सफल व्यक्तियों के द्वारा...

         
      हम आपको सफल व्यक्तियों की वो बातें बताने वाले हैं जो आपके बिजनेस को नई ऊँचाई पर ले जाने में मदद करेंगी ।

1. सस्ते रिसोर्सेज का प्रयोग करें मुकेश अम्बानी
            स्टार्टअप के प्रारम्भ में पैसा आपको अधिक से अधिक लाभ कमाने के लिए एक टूल होता है । अगर आप प्रारम्भ में ही महंगे रिसोर्सेज में अधिक रुपये खपा देंगे तो प्रोडक्टिविटी बढ़ाने के लिए आपके पास इसकी कमी हो जाएगी। इसलिए सस्ते मगर अच्छे रिसोर्सेज का प्रयोग करें ।

2. अवसर को हाथ से न जाने दें स्टीव जॉब्स
            हाथ से निकला अवसर सदा के लिए चला जाता है । इसलिए अपनी कमीज़ की बाँहें ऊपर मोड़कर आने वाले हर अवसर के लिए तैयार रहें, भले ही वो छोटा हो या फिर बड़ा । हम ये पहले से नहीं बता सकते हैं कौन सा मोड़ जीवन का टर्निंग प्वाइंट बन जाये ।

3. स्वयं को आत्मा से जोड़ें सर रिचर्ड ब्रांसन
            भेड़ की चाल चलना छोड़ो। इसकी जगह अपने दिल की आवाज़ सुनो और वही करो तुम चाहते हो क्योंकि तुमको तुमसे अच्छा कौन जानता है । बस तुम ही जानते हो कि किस परिस्थिति में तुम क्या कर सकते हो ? अपने विचारों को अपने दिल और आत्मा से जोड़कर तुम मनचाहा रिज़ल्ट पा सकते हो ।

4. सोशल मीडिया से जुड़ें होवर्ड सुल्ज़
            अपने कस्टमर्स तक पहुंचने के लिए सोशल मीडिया साइटें सबसे अच्छा रास्ता है । अपने पेज पर आप प्रोडक्ट और सर्विसेज के बारे में नियमित अपडेट डालकर बिजनेस को आसानी से बढ़ा सकते हैं । अपने बिजनेस के लोगो को इतना प्रभावशाली डिज़ाइन करें कि उसे देखने वाला आपके पेज पर जाए बिना रह न पाए।

5.
स्वस्थ प्रतिस्पर्धा करें बिल गेट्स
            आप को प्रतिस्पर्धा में बुराई से बचना चाहिए। स्वस्थ शब्द का अर्थ ऐसी प्रतिस्पर्धा से है जो आपका या फिर दूसरे का नुकसान न करे। प्रतिस्पर्धा आपको अपनी क्षमता को परखने और कठिनाइयों में अपने सपने पूरे करने की शक्ति देती है ।

6.
अपना ध्यान रखें टिम कुक
           
स्टार्टअप प्रारम्भ करने के साथ बहुत सी चिंताएँ सताने लगती हैं । बिजनेस प्लान बनाना, इंवेस्टर्स लाना, फ़ंड्स बढ़ाना, काम के तरीके को सही डिज़ाइन करना, सही लोगों को काम पे रखना, मार्केटिंग, प्रोमोशन, प्रोडक्टिविटी बढ़ाना, सर्विसेज बेहतर करना, नेटवर्क में प्रभाव बढ़ाना, अच्छी स्थिति बनाना, आदि बहुत से काम आपका मानसिक और शारीरिक तनाव बढ़ा सकते हैं । इस तरह के कठिन परिस्थितियों में काम करके आप मानसिक और शारीरिक रूप से कमज़ोर हो सकते हैं । इसलिए आपको अपनी सेहत का पूरा ध्यान रखना होगा, आप स्वस्थ रहेंगे तभी उपलब्धियाँ प्राप्त होंगी ।


7. सम्बंध बनायें लैरी पेज
            जब आपके नेटवर्क में दूसरों के साथ आपके सम्बंध सही होंगे तो बिजनेस आगे बढ़ेगा । इसलिए आप जिन लोगों के साथ काम करते हैं उनसे अच्छे सम्बंध बनाकर रखें । चाहे वो इंवेस्टर्स हों, सप्लायर्स हों या फिर स्टॉफ़ होसभी के साथ अच्छे सम्बंध रखें । भले आप आज किसी व्यक्ति के साथ काम न कर रहे हों लेकिन फिर भी उसके साथ अच्छे सम्बंध रखकर भविष्य में लाभ उठाया जा सकता है ।

            तो अब  इंतज़ार किस बात का है ? उठो, अपने बिजनेस प्लान पर काम करो और सफल बिजनेसमेन की इन बातों का ध्यान रखो । भले इनमें कुछ टिप्स को ही आप मानें लेकिन वो आपको फ़ायदा ज़रूर पहुंचायेंगी ।

भगवान भोलेनाथ का साम्राज्य...

      वैसे तो समूचि सृष्टि पर ही भगवान का साम्राज्य रहता है किंतु इस बार महाशिवरात्रि पर विख्यात ज्योतिर्लिंगों के संदर्भ में ऐसी ...