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रविवार, 6 अक्टूबर 2019

पैसा ये कैसा...





मैं पैसा हूँ...
            मुझे आप मरने के बाद ऊपर नहीं ले जा सकते, मगर जीते जी मैं आपको बहुत ऊपर ले जा सकता हूँ ।

मैं पैसा हूँ...
            मुझे पसंद करो सिर्फ इस हद तक कि लोग आपको नापसन्द न करने लगें ।

मैं पैसा हूँ...
            मैं भगवान् नहीं मगर लोग मुझे भगवान् से कम नहीं मानते ।

मैं पैसा हूँ...
            मैं नमक की तरह हूँ, जो जरुरी तो है मगर जरुरतसे ज्यादा हो तो जिंदगी का स्वाद बिगाड़ देता है ।

मैं पैसा हूँ...
             इतिहास में कई ऐसे उदाहरण मिल जाएंगे जिनके पास मैं बेशुमार था, मगर फिर भी वो  मरे तो उनके लिए कोई रोने  वाला भी नहीं था ।


मैं पैसा हूँ...
            मैं कुछ भी नहीं हूँ; मगर मैं निर्धारित करता हूँ, कि लोग आपको कितनी इज्जत देते है ।

मैं पैसा हूँ...
            मैं आपके पास हूँ तो आपका हूँ । आपके पास नहीं हूँ तो आपका नहीं हूँ  । मगर मैं आपके पास हूँ तो आपकी चाही सभी वस्तुएँ आपकी हैं । 


 
मैं पैसा हूँ...
             मैं नई नई रिश्तेदारियाँ बनाता हूँ, मगर असली औऱ पुरानी बिगाड़ भी देता हूँ । 

मैं पैसा हूँ...
             मैं सारे फसाद की जड़ हूँमगर फिर भी न जाने क्यों सब मेरे पीछे इतना पागल हैं ।

क्यों ? विचार कीजिये...

रविवार, 5 फ़रवरी 2017

इज्जत अफजाई...



          गांव के लल्लन महाराज की 84 साल की माताजी का स्वर्गवास हो गया । तेरहवी में भोज का इंतेज़ाम हुआ, बंता हलवाई तरह-तरह के पकवान बनवा रहा था ।  मोहनथाल, पूरी, कचोरी, खाजा, लड्डू की सुगंध फ़िज़ाओं में बिखर रही थी । आसपास के गांव के कुत्ते उस सुगंध से आकर्षित होकर खाना बनाने की जगह इकठ्ठा होने लगे, लेकिन दुत्कार और ढेलों की मदद से  भगाये  जाने से पास के खेत में सारे कुत्ते इकठ्ठा हो गए ।
 
          एक कुत्ता बोला - में देख कर आता हूँ क्या-क्या बन गया खाने में । वो जैसे ही बंता हलवाई की रसोई के पास पहुंचा,  उसको डंडों से तुरंत मार कर भगा दिया गया । बेचारा जान बचा कर खेत पर आया तो सब कुत्तों ने हाल पूछा तो कुत्ता बोला - अरे भाई जाते ही तुरंत दे रहे हैं, तत्काल दे रहे हैं वो लोग तो ।
 
          थोड़ी देर बाद दूसरा कुत्ता गया, इस बार उसके ऊपर एक रसोइये ने गरम पानी फेंक दिया,  बेचारा कुत्ता पानी झटकते बिलबिलाते  हुए वापस आ गया । फिर सबने हाल पूछा तो वो बोला कुत्ता - अरे भाई वो तो गर्मागर्म दे रहे हैं,  पहुंचते ही गर्मागर्म दे रहे हैं ।
 
          थोड़ी देर बाद तीसरा कुत्ता हिम्मत करके पहुंचा,  रसोइये भी तैयार थे । उस कुत्ते को कई लोगों ने घेर कर बहुत देर तक मारा, बच कर जाने ही नहीं दे रहे थे । लंगड़ाते हुए वो कुत्ता वापस पहुंचा तो सबने फिर हाल पूछा तो कुत्ता बोला - अरे भाई लोगों क्या बताऊँ ! ऐसा सत्कार हुआ की वो लोग वापस ही नहीं आने दे रहे थे । घेर-घेर कर रोकते हुए दे रहे थे ।
 
          मोरल ऑफ़ स्वान कथा : ''अपनी इज़्ज़त अपने हाथ में है, बेइज़्ज़ती को भी इज़्ज़त अफ़ज़ाई में तब्दील किया जा सकता है'' ।

ऐतिहासिक शख्सियत...

पागी            फोटो में दिखाई देने वाला जो वृद्ध गड़रिया है    वास्तव में ये एक विलक्षण प्रतिभा का जानकार रहा है जिसे उपनाम मिला था...