गुरुवार, 15 दिसंबर 2016

रुप और गुण...



          सम्राट चंद्रगुप्त ने एक बार चाणक्य से कहा, चाणक्य, काश तुम खूबसूरत होते  ?
          चाणक्य ने कहा, 'राजन इंसान की पहचान गुणों से होती है, रूप से नहीं ।'
          तब चंद्रगुप्त ने पूछा - 'क्या कोई ऐसा उदाहरण दे सकते हो जहां गुण के सामने रूप छोटा रह गया हो  ?
          तब चाणक्य ने राजा को दो गिलास पानी पीने को दिया । चंद्रगुप्त के पानी पीने के बाद चाणक्य ने कहा, 'पहले गिलास का पानी सोने के घड़े का था और दूसरे गिलास का पानी मिट्टी के घड़े का, आपको कौन सा पानी अच्छा लगा ।'
          चंद्रगुप्त बोले, 'मटकी से भरे गिलास का ।' 
          नजदीक ही सम्राट चंद्रगुप्त की पत्नी मौजूद थीं, वह इस उदाहरण से काफी प्रभावित हुई, उन्होंने कहा, 'वो सोने का घड़ा किस काम का जो प्यास न बुझा सके ।
          मटकी भले ही कितनी कुरुप हो, लेकिन प्यास मटकी के पानी से ही बुझती है, यानी रूप नहीं गुण महान होता है ।'
          इसी तरह इंसान अपने रूप के कारण नहीं बल्कि उपने गुणों के कारण पूजा जाता है ।
          रूप तो आज है, कल नहीं लेकिन गुण जब तक जीवन है तब तक जिंदा रहते हैं, और मरने के बाद भी जीवंत रहते हैं ।

          दिया मिट्टी का है या सोने का, यह महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि वो अंधेरे में प्रकाश कितना देता है यह महत्वपूर्ण है ।
          उसी तरह मित्र गरीब है या अमीर है, यह महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि वो तुम्हारी मुसीबत मे तुम्हारा कितना साथ देता है, यह महत्वपूर्ण है ।

मंगलवार, 30 अगस्त 2016

"अर्थव्यवस्था पर भारी आस्था"


            हमारे देश में रोज न जाने कितनी रेलगाडियां न जाने कितनी नदियों को पार करती हैं और उनके यात्रियों द्वारा हर रोज नदियों में सिक्के फेंकने का चलन दिखाई देता रहता है ।  अगर रोज के सिक्को के हिसाब से गणना की जाये तो ये रकम कम से कम दहाई के चार अंको को तो पार करती होगी । 

            सोचो अगर इस तरह हर रोज भारतीय मुद्रा ऐसे फेंक दी जाती है तो इससे भारतीय अर्थव्यवस्था को कितना नुकसान पहुँचता होगा ?  ये तो कोई अर्थशास्त्री ही बता सकता है । लेकिन एक रसायनज्ञ होने के नाते मैं जरूर लोगों को सिक्के की धातु के बारे में जागरूक कर सकता हूँ ।

             वर्तमान सिक्के 83% लोहा और 17 % क्रोमियम के बने होते है । आप सबको ये बता दूँ कि क्रोमियम एक भारी जहरीली धातु है ।

            क्रोमियम दो अवस्था में पाया जाता है, एक Cr (III) और  दूसरी Cr (IV) पहली अवस्था जहरीली नही मानी गई बल्कि क्रोमियम (IV) की दूसरी अवस्था 0.05% प्रति लीटर से ज्यादा हमारे लिए जहरीली है, जो सीधे कैंसर जैसी असाध्य बीमारी को जन्म देती है ।


            सोचिये एक नदी जो अपने आप में बहुमूल्य खजाना छुपाये हुए है उसका हमारे एक दो रूपये फेंकने से कैसे  भला हो सकता है ? अलबत्ता पूर्वकाल में सिक्के फेंकने का वास्तविक चलन तांबे के सिक्के फेकने से शुरु हुआ था ।


            एक समय मुगलकालीन समय में दूषित पानी से बीमारियां फैली थी तो, राजा ने प्रजा के लिए ऐलान करवाया कि हर व्यक्ति को अपने आसपास के जल के स्रोत या जलाशयों में तांबे के सिक्के को फेकना चाहिये, क्योंकि तांबा जल को शुद्ध करने वाली सबसे अच्छी धातु है ।


            आजकल सिक्के नदी में फेंकने से हम उसके ऊपर किसी तरह का उपकार नहीं बल्कि जलप्रदूषण और बीमारियों को बढ़ावा दे रहे हैं । इसलिए आस्था के नाम पर भारतीय मुद्रा को हो रहे नुकसान को रोकने की जिम्मेदारी हम सब नागरिकों की है और हमें देशहित में नदी में पैसे नहीं डालने चाहिए बल्कि इस कुप्रथा को रोककर देश की मुद्रा के साथ ही नदियों को शुद्ध रखने में सहयोग करना चाहिये ।


सोर्स : WhatsApp.

         

शुक्रवार, 19 अगस्त 2016

तमाशबीन या प्रयासरत


             एक गांव में आग लगी । सभी लोग उसको बुझाने में लगे हुए थे । वहीं एक चिड़िया अपनी चोंच में पानी भरती और आग में डालती, फिर भरती और फिर आग में डालती । एक कौवा डाल पर बैठा उस चिड़िया को देख रहा था । कौवा चिड़िया से बोला - "अरे पागल तू कितनी भी मेहनत कर ले,  तेरे बुझाने से ये आग नहीं बुझेगी ।"

             चिड़िया विनम्रता से बोली  "मुझे पता है मेरे बुझाने से ये आग नहीं बुझेगी, लेकिन जब भी इस आग का ज़िक्र होगा, तो मेरी गिनती आग बुझाने वालों में होगी और तुम्हारी तमाशा देखने वालों में होगी"।

            ऐसे ही समाज में हम सब भी कभी-कभी कौए की तरह यह कह/सोच कर अपना बचाव करते हैं कि 'अकेले हम समाज/देश को नही सुधार सकते, अकेले हमसे क्या होगा' ।

             सब जानते हैं कि मुश्किल है लेकिन क्या यह उचित नहीं है कि जब-जब भी गिनती हो और हमारा नाम लिया जाय तो समाज के उत्थान करने वालों में हो न कि तमाशा देखने वालों में ।


सोमवार, 25 जुलाई 2016

मारवाडी फटाके...




            सेठाणीजी नाराज होकर बोली - "जो म्हारो ब्याव कोई असली राक्षस सु भी हो जातो ना; तो भी वो मन्ने थारैसुं जादा सुखी रांखतो ।"

            मारवाड़ी सेठजी - यो तो बिलकुल ही कोनी हो सकतो थो । 


            सेठाणीजी - क्यू कोनी हो सकतो थो ? 


            सेठजी - अये बावळी ! आपणा लोगां में एक ही गोत्र में ब्याव कोनी होवै. ।




            एक बार एक Punjabi कुए में गिर गया... ...और जोर जोर से रोने लगा  !

            एक मारवाड़ी वहाँ से जा रहा था उसने आवाज सुनी तो रुका और बोला :  "कुण है भाई ?"

            Punjabi : अस्सी हाँ !

            मारवाड़ी:  "भाई ! थे एक-दो होता,  तो काड देतो...

            80 तो म्हारै बाप से बी कोणी निकळै !"  पड्या रेओ !




मारवाडी सीख :
                              
           1.   चौखी संगत में उठणो बैठणो । 

            2.   काम स काम राखणो ।  
                  
            3.   ऊड़तो तीर नही पकडनो । 

            4.   घणो लालच कोनी करणो । 

            5. सोच समझकर पग राखणो ।

            6. रास्ते आणो, रास्ते जाणो ।   
 
            7. जितो हो सके उतो कम बोलणो ।

            8. छोटा-मोटा को कायदो राखणो।
 
            9.   जितो पचे उतो ई खाणो । (पेट खुदको होवे ।)
   
            10.  पूच्छ्या बीना सलाह नी देणो । 

            11.  पराई पंचायती नी करणी ।

            12.  आटा मे लूण समावे, लूण मे आटो कोनी ।

            13.  पगा बलती देखणी ढूंगा बलती कोणी । 

            14.  बीच में ही लाडे की भुवा नी बणनो ।

            15.  सुणनी सबकी करणी मन की ।



अठे हर कोई भरे बटका
घुमाबा नहीं ले जावां, तो घराळी भरे बटका।
घराळी रो मान ज्यादा राखां, तो माँ भरे बटका।
कोई काम कमाई नहीं करां, तो बाप भरे बटका।
पॉकेट मनी नहीं देवां, तो बेटा भरे बटका।
कोई खर्चो पाणी नहीं करां, तो दोस्त भरे बटका।
थोड़ो सो कोई न क्यूं कह दयां, तो पड़ौसी भरे बटका।
पंचायती में नहीं जावां, तो समाज भरे बटका।
जनम मरण में नहीं जावां, तो सगा संबंधी भरे बटका।
छोरा छोरी नहीं पढ़े, तो मास्टर भरे बटका।
पुरी फीस नहीं देवां, तो डॉक्टर भरे बटका।
गाड़ी का कागज पानड़ा नहीं मिले, तो पुलिस भरे बटका।
मांगी रिश्वत नहीं देवां, तो अफसर भरे बटका।
टाइम सूं उधार नहीं चुकावां, तो सेठ भरे बटका।
टेमूं टेम किश्त नहीं चुकावां, तो बैंक मैनेजर भरे बटका।
नौकरी बराबर नहीं करां, तो बॉस भरे बटका।
फेसबुक पर लाइक कमेंट नहीं करां, तो फ्रेंड भरे बटका।
अब थे ही बताओ, जावां तो कठे जावां,
अठे हर कोई भरे बटका, अठे हर कोई भरे बटका।
 


रविवार, 17 जुलाई 2016

ईश्वर आज अवकाश पर हैं...


ईश्वर आज अवकाश पर हैं, मंदिर की घंटी ना बजाइये ।

जो बैठे हैं बूढ़े - बुज़ुर्ग,  अकेले पार्क में ...
जाकर  उनके साथ कुछ समय बिताइये ।
ईश्वर आज अवकाश पर है, मंदिर की घंटी ना बजाइये ।

ईश्वर है पीड़ित परिवार के साथ, जो अस्पताल में आज परेशान है ...
उस पीड़ित परिवार की जाकर कुछ मदद कर आइये ।
ईश्वर आज अवकाश पर हैं, मंदिर की घंटी ना बजाइये।

एक चौराहे पर खड़ा युवक, काम की तलाश में है,
उसके पास जाकर, उसे नौकरी के अवसर दिलाइये ...
ईश्वर आज अवकाश पर हैं, मंदिर की घंटी ना बजाइये ...

ईश्वर है चाय कि दुकान पर, उस अनाथ बच्चे के साथ ...
जो, कप प्लेट धो रहा है,
पाल सकते हैं, पढ़ा सकते हैं, तो उसको आप पढ़ाइये ...
ईश्वर आज अवकाश पर हैं, मंदिर की घंटी ना बजाइये ।

एक बूढ़ी औरत, जो दर दर भटक रही है,
एक अच्छा सा लिबास जाकर उसे दिलाइये ...
हो सके तो, उसे किसी नारी आश्रम में छोड़ आइये ।
ईश्वर आज अवकाश पर हैं, मंदिर की घंटी ना बजाइये ।


सोमवार, 11 जुलाई 2016

कर्मफल


            भीष्म पितामह रणभूमि में शरशैया पर पड़े थे । हल्का सा भी हिलते तो शरीर में घुसे हुए बाण भारी वेदना के साथ रक्त की पिचकारी सी छोड़ देते। ऐसी दशा में उनसे मिलने सभी आ जा रहे थे। श्री कृष्ण भी दर्शनार्थ आये। उनको देखकर भीष्म जोर से हँसे और कहा... आइयें जगन्नाथ ! आप तो सर्व ज्ञाता हैं । सभी कुछ जानते हैं, बताइए मैंने ऐसा कौनसा पाप किया था जिसका दंड इतना भयावह मिला...?

            कृष्ण : पितामह ! आपके पास वह शक्ति है, जिससे आप अपने पूर्व जन्म देख सकते हैं, आप स्वयं ही देख लेते ।

             भीष्म : देवकी नंदन ! मैं यहाँ अकेला पड़ा और कर ही क्या रहा हूँ..? मैंने सब देख लिया ...अभी तक 100 जन्म देख चुका हूँ ।  मैंने उन 100 जन्मों में एक भी कर्म ऐसा नहीं किया जिसका परिणाम ये हो कि मेरा पूरा शरीर बिंधा पड़ा है,  हर आने वाला क्षण... ओर पीड़ा लेकर आता है ।
 
            कृष्ण : पितामह ! आप एक भव और पीछे जाएँ, आपको उत्तर मिल जायेगा ।

             भीष्म ने ध्यान लगाया और देखा कि 101 भव पूर्व वो एक नगर के राजा थे ।  एक मार्ग से अपनी सैनिकों की एक टुकड़ी के साथ कहीं जा रहे थे । एक सैनिक दौड़ता हुआ आया और बोला - राजन ! मार्ग में एक सर्प पड़ा है, यदि हमारी टुकड़ी उसके ऊपर से गुजरी तो वह मर जायेगा ।

             भीष्म ने कहा... एक काम करो... उसे किसी लकड़ी में लपेट कर झाड़ियों में फेंक दो ।
 
             सैनिक ने वैसा ही किया... उस सांप को एक लकड़ी में लपेटकर झाड़ियों में फेंक दिया । दुर्भाग्य से झाडी कंटीली थी, सांप उनमें फंस गया, जितना प्रयास उनसे निकलने का करता और अधिक फंस जाता । कांटे उसकी देह में गड गए, खून रिसने लगा। धीरे धीरे वह मृत्यु के मुंह में जाने लगा । 5-6 दिन की तड़प के बाद ही उसके प्राण निकल पाए ।
 
             भीष्म : हे त्रिलोकी नाथ ! आप जानते हैं कि मैंने जानबूझ कर ऐसा नहीं किया,  अपितु मेरा उद्देश्य उस सर्प की रक्षा का था, तब ये परिणाम क्यों...?
  
            कृष्ण: तात श्री ! हम जान बूझ कर क्रिया करें या अनजाने में ...किन्तु क्रिया तो हुई न... उसके प्राण तो गए ना... ये तो विधि का विधान है कि जो क्रिया हम करते हैं उसका फल  हमें भोगना ही पड़ता है... आपका पुण्य इतना प्रबल था कि 101 भव उस पाप फल को उदित होने में लग गए ।  किन्तु  अंततः वह  हुआ ।
            किसी भी जीव को लोग जान बूझ कर मार रहे हैं... उसने जितनी पीड़ा सहन की.. वह उस जीव (आत्मा) को इसी जन्मअथवा अन्य किसी जन्म में अवश्य भोगनी होगी ।


            अतः अपनी हर दैनिक क्रिया सावधानीपूर्वक ही करें । क्योंकि कर्मों का फल देर-सवेर  भुगतना तो अवश्यमेव  पडता ही है ।

         

गुरुवार, 7 जुलाई 2016

इस गुप्त नवरात्री में कीजिये देवी को प्रसन्न


            हिन्दू धर्म में नवरात्र मां दुर्गा की साधना के लिए बेहद महत्त्वपूर्ण माने जाते हैं। नवरात्र के दौरान साधक विभिन्न तंत्र विद्याएं सीखने के लिए मां भगवती की विशेष पूजा करते हैं। तंत्र साधना आदि के लिए गुप्त नवरात्र बेहद विशेष माने जाते हैं। आषाढ़ और माघ मास के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली नवरात्र को गुप्त नवरात्र कहा जाता है। इस नवरात्रि के बारे में बहुत ही कम लोगों को जानकारी होती है।

            शिवपुराण के अनुसार पूर्वकाल में राक्षस दुर्ग ने ब्रह्मा को तप से प्रसन्न कर चारों वेद प्राप्त कर लिए। तब वह उपद्रव करने लगा। वेदों के नष्ट हो जाने से देव-ब्राह्मण पथ भ्रष्ट हो गए, जिससे पृथ्वी पर वर्षों तक अनावृष्टि रही।पृथ्वी पर रूद्र, वरुण, यम आदि का प्रकोप बढ़ने लगता है। इन विपत्तियों से बचाव के लिए गुप्त नवरात्र में मां दुर्गा की उपासना की जाती है ।

            सतयुग में चैत्र नवरात्र, त्रेता में आषाढ़ नवरात्र, द्वापर में माघ, कलयुग में आश्विन की साधना-उपासना का विशेष महत्व रहता है। मार्कंडेय पुराण में इन चारों नवरात्रों में शक्ति के साथ-साथ इष्ट की आराधना का भी विशेष महत्व है । 

            देवताओं ने मां पराम्बा की शरण में जाकर दुर्ग का वध करने का निवेदन किया। मां ने अपने शरीर से काली, तारा, छिन्नमस्ता, श्रीविद्या, भुवनेश्वरी, भैरवी, बगला, धूमावती, त्रिपुरसुंदरी और मातंगी नाम वाली दस महाविद्याओं को प्रकट कर दुर्ग का वध किया। दस महाविद्याओं की साधना के लिए तभी से गुप्त नवरात्र मनाया जाने लगा।

            गुप्त नवरात्रि विशेष तौर पर गुप्त सिद्धियां पाने का समय है साधक इन दोनों गुप्त नवरात्रि (माघ तथा आषाढ़) में विशेष साधना करते हैं तथा चमत्कारिक शक्तियां प्राप्त करते हैं ।

            "ॐ जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी ।

        दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु ते “सर्वाबाधाविनिर्मुक्तो धनधान्यसुतान्वित: ।

            मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशय: ॥”

           इस नवरात्र में देवी साधक और भक्त--- 'ऊं ऐं हीं क्लीं चामुण्डाये विच्चे नम:' मंत्र जाप करें।

             मां काली के उपासक---- 'ऊं ऐं महाकालाये नम:' मंत्र का जाप करें।

            व्यापारी लोग----'ऊं हीं महालक्ष्मये नम:' मंत्र का जाप करें।

            विद्यार्थी---- 'ऊं क्लीं महासरस्वतये नम:' मंत्र जपें।
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गुप्त नवरात्र 2016

            आषाढ़ नवरात्र गुप्त नवरात्रों के नाम से भी जाने जाते हैं. आषाढ़ महीने यानी जून और जुलाई  माह में पड़ने के कारण इन नवरात्रों को आषाढ़ नवरात्र कहा जाता है, हालाँकि देश के अधिकतर भाग में गुप्त नवरात्रों के बारे में लोग नहीं जानते हैं. उत्तरी भारत जैसे हिमाचल प्रदेश, पंजाब , हरयाणा, उत्तराखंड के आस पास के प्रदेशों में गुप्त नवरात्रों  में माँ भगवती की पूजा की जाती है. माँ भगवती  के सभी 9 रूपों की पूजा नवरात्रों के भिन्न – भिन्न दिन की जाती है , अतः आइये देखते हैं  इन दिनों में किस देवी की पूजा  कब की जानी चाहिए---

            5 जुलाई (मंगलवार) 2016 : घट स्थापन एवं माँ शैलपुत्री पूजा

            6 जुलाई (बुधवार) 2016 : माँ ब्रह्मचारिणी पूजा

            7 जुलाई (बृहस्पतिवार) 2016 : माँ चंद्रघंटा पूजा

            8 जुलाई (शुक्रवार) 2016: माँ कुष्मांडा पूजा

            9 जुलाई (शनिवार) 2016: माँ स्कंदमाता पूजा

            10 जुलाई (रविवार)  2016: : माँ कात्यायनी पूजा

            11 जुलाई (सोमवार)  2016:  माँ कालरात्रि पूजा

            12 जुलाई(मंगलवार) 2016 : माँ महागौरी पूजा, दुर्गा अष्टमी

            13 जुलाई (बुधवार) 2016 : माँ सिद्धिदात्री

            14 जुलाई (बृहस्पतिवार)  2016: नवरात्री पारण
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गुप्त नवरात्र पूजा विधि---

            मान्यतानुसार गुप्त नवरात्र के दौरान अन्य नवरात्रों की तरह ही पूजा करनी चाहिए। नौ दिनों के उपवास का संकल्प लेते हुए प्रतिप्रदा यानि पहले दिन घटस्थापना करनी चाहिए। घटस्थापना के बाद प्रतिदिन सुबह और शाम के समय मां दुर्गा की पूजा करनी चाहिए। अष्टमी या नवमी के दिन कन्या पूजन के साथ नवरात्र व्रत का उद्यापन करना चाहिए।

गुप्त नवरात्री में सिद्धि के लिए गुप्त स्थान या सिद्ध श्मशान-
            यह साधनाएं बहुत ही गुप्त स्थान पर या किसी सिद्ध श्मशान में की जाती है । दुनियां में सिर्फ चार श्मशान घाट ही ऐसे हैं जहां तंत्र क्रियाओं का परिणाम बहुत जल्दी मिलता है। ये हैं तारापीठ का श्मशान (पश्चिम बंगाल), कामाख्या पीठ (असम) का श्मशान, त्रयंबकेश्वर (नासिक) और उज्जैन स्थित विक्रांत भैरव या चक्रतीर्थ श्मशान ।

            गुप्त नवरात्रि में यहां दूर-दूर से साधक गुप्त साधनाएं करने आते हैं। नवरात्रों में लोग अपनी आध्यात्मिक और मानसिक शक्तियों में वृद्धि करने के लिए अनेक प्रकार के उपवास, संयम, नियम, भजन, पूजन योग साधना आदि करते हैं।
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गुप्त नवरात्रि का महत्त्व ---

            देवी भागवत के अनुसार जिस तरह वर्ष में चार बार नवरात्र आते हैं और जिस प्रकार नवरात्रि में देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है, ठीक उसी प्रकार गुप्त नवरात्र में दस महाविद्याओं की साधना की जाती है । कहा जाता है कि मां के नौ रूपों की भक्ति करने से हर मनोकामना पूरी होती है। नौ शक्तियों के मिलन को ही नवरात्रि कहते हैं। देवी पुराण के अनुसार एक वर्ष में 4 माह नवरात्रि के लिए निश्चित हैं।

            मानव के समस्त रोग-दोष व कष्टों के निवारण के लिए गुप्त नवरात्र से बढ़कर कोई साधनाकाल नहीं हैं। श्री, वर्चस्व, आयु, आरोग्य और धन प्राप्ति के साथ ही शत्रु संहार के लिए गुप्त नवरात्र में अनेक प्रकार के अनुष्ठान व व्रत-उपवास के विधान शास्त्रों में मिलते हैं। इन अनुष्ठानों के प्रभाव से मानव को सहज ही सुख व अक्षय ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। ‘दुर्गावरिवस्या’ नामक ग्रंथ में स्पष्ट लिखा है कि साल में दो बार आने वाले गुप्त नवरात्रों में माघ में पड़ने वाले गुप्त नवरात्र मानव को न केवल आध्यात्मिक बल ही प्रदान करते हैं, बल्कि इन दिनों में संयम-नियम व श्रद्धा के साथ माता दुर्गा की उपासना करने वाले व्यक्ति को अनेक सुख व साम्राज्य भी प्राप्त होते हैं। ‘शिवसंहिता’ के अनुसार ये नवरात्र भगवान शंकर और आदिशक्ति मां पार्वती की उपासना के लिए भी श्रेष्ठ हैं। गुप्त नवरात्रों के साधनाकाल में मां शक्ति का जप, तप, ध्यान करने से जीवन में आ रही सभी बाधाएं नष्ट होने लगती हैं।

            गुप्त नवरात्रि विशेषकर तांत्रिक क्रियाएं, शक्ति साधना, महाकाल आदि से जुड़े लोगों के लिए विशेष महत्त्व रखती है। इस दौरान देवी भगवती के साधक बेहद कड़े नियम के साथ व्रत और साधना करते हैं। इस दौरान लोग लंबी साधना कर दुर्लभ शक्तियों की प्राप्ति करने का प्रयास करते हैं।गुप्त नवरात्र में दशमहाविद्याओं की साधना कर ऋषि विश्वामित्र अद्भुत शक्तियों के स्वामी बन गए। उनकी सिद्धियों की प्रबलता का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने एक नई सृष्टि की रचना तक कर डाली थी। इसी तरह, लंकापति रावण के पुत्र मेघनाद ने अतुलनीय शक्तियां प्राप्त करने के लिए गुप्त नवरात्रों में साधना की थी। शुक्राचार्य ने मेघनाद को परामर्श दिया था कि गुप्त नवरात्रों में अपनी कुलदेवी निकुम्बाला की साधना करके वह अजेय बनाने वाली शक्तियों का स्वामी बन सकता है ||

            गुप्त व चमत्कारिक शक्तियां प्राप्त करने का यह श्रेष्ठ अवसर होता है। धार्मिक दृष्टि से हम सभी जानते हैं कि नवरात्र देवी स्मरण से शक्ति साधना की शुभ घड़ी है। दरअसल, इस शक्ति साधना के पीछे छुपा व्यावहारिक पक्ष यह है कि नवरात्र का समय मौसम के बदलाव का होता है। आयुर्वेद के मुताबिक इस बदलाव से जहां शरीर में वात, पित्त, कफ में दोष पैदा होते हैं, वहीं बाहरी वातावरण में रोगाणु। जो अनेक बीमारियों का कारण बनते हैं। सुखी-स्वस्थ जीवन के लिये इनसे बचाव बहुत जरूरी है।  नवरात्र के विशेष काल में देवी उपासना के माध्यम से खान-पान, रहन-सहन और देव स्मरण में अपनाने गए संयम और अनुशासन तन व मन को शक्ति और ऊर्जा देते हैं। जिससे इंसान निरोगी होकर लंबी आयु और सुख प्राप्त करता है। धर्म ग्रंथों के अनुसार गुप्त नवरात्र में प्रमुख रूप से भगवान शंकर व देवी शक्ति की आराधना की जाती है। देवी दुर्गा शक्ति का साक्षात स्वरूप है। दुर्गा शक्ति में दमन का भाव भी जुड़ा है। यह दमन या अंत होता है शत्रु रूपी दुर्गुण, दुर्जनता, दोष, रोग या विकारों का। ये सभी जीवन में अड़चनें पैदा कर सुख-चैन छीन लेते हैं। यही कारण है कि देवी दुर्गा के कुछ खास और शक्तिशाली मंत्रों का देवी उपासना के विशेष काल में जाप शत्रु, रोग, दरिद्रता रूपी भय बाधा का नाश करने वाला माना गया है।  सभी’नवरात्र’ शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से लेकर नवमी तक किए जाने वाले पूजन, जाप और उपवास का प्रतीक है- ‘नव शक्ति समायुक्तां नवरात्रं तदुच्यते’। देवी पुराण के अनुसार एक वर्ष में चार माह नवरात्र के लिए निश्चित हैं। नवरात्र के नौ दिनों तक समूचा परिवेश श्रद्धा व भक्ति, संगीत के रंग से सराबोर हो उठता है। धार्मिक आस्था के साथ नवरात्र भक्तों को एकता, सौहार्द, भाईचारे के सूत्र में बांधकर उनमें सद्भावना पैदा करता है।

गुप्त नवरात्रि की प्रमुख देवियां---

            गुप्त नवरात्र के दौरान कई साधक महाविद्या (तंत्र साधना) के लिए मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, माता छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, मां ध्रूमावती, माता बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी की पूजा करते हैं ।


शनिवार, 2 जुलाई 2016

विचित्र विशेष :

            गुजरात के सूरत शहर मे एक रेस्टोरेंट ने 1500/- की थाली लांच की है । इसका नाम है बकासूर थाली...



            और इस बकासूर थाली मे 100 प्रकार के आइटम हैं, जिनमे 55 प्रकार की शाकाहारी सब्जियां और 21 प्रकार की मिठाइयां शामिल है ।

            अब सरप्राइज ये है कि अगर कोई व्यक्ति इस बकासूर थाली के पूरे आइटम खा लेगा तो उसे रेंस्टोरेट की तरफ से 1 लाख रु. इनाम भी दिया जायेगा ।

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हिमालय  में खिला "नागपुष्प"

 

            बरसो बाद दिखाई दिया.... ये पुष्प शेषनाग की तरह दीखता है जो करीब 36 सालो में एक बार ही देखा जा सकता है ।
 
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केरल के कॉलेज मे जीन्स बैन करने के बाद... 


लडकियां लूँगी पहन कर आ गई, अब प्रशाशन पशोपेश में.

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            एक दिन दादी घर पर बैठीं थीं । तभी फोन की घण्टी बजी । फोन से बात करके दादी बहुत खुश हुईं क्योंकि पोते एवं पोती दादी से मिलने आ रहे थे । 
            दादी खुशी में झूम उठीं और बोली-  'हां, तुम लोग आ रहे हो तो ढेर सारी बातें करेंगे । और हां, मैं नाती को भी फोन करके बुला लेती हूँ। सब मिलकर खूब बातें करेंगे,  मजे करेंगे ।
            फिर सब लोग दादी से मिलने सैकड़ों किलोमीटर की दूरी तय कर पहुंचे । आगे क्या होता है ? इसके लिए नीचे का फोटो देखिये-
  

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और ये हैं पर्यावरण पुरस्कार के...



असली हकदार...!
 

पुकार...


            एक कंस्ट्रक्शन साईड पर चलते काम में 6ठे माले पर मौजूद इंजीनियर ने सडक पर काम कर रहे एक कर्मचारी को आवाज दी जो काम के शोर के कारण नीचे मौजूद उस कर्मी ने नहीं सुनी । इंजीनियर ने उसे फिर आवाज दी, उसने फिर भी नहीं सुनी । इंजीनियर ने उसका ध्यान आकर्षित करवाने हेतु 10/- रु. का सिक्का नीचे उस कर्मचारी के पास फेंका जो ठीक उसके बगल में जाकर गिरा । नीचे मौजूद कर्मचारी ने उपर देखें बगैर वो सिक्का उठाकर अपनी जेब में डाल लिया और फिर अपने काम में लग गया । इस बार उपर मौजूद उस इंजिनीयर ने 500/- रु. का नोट उसके उपर छोटी सी घडी बनाकर फेंका, वह नोट भी उस कर्मचारी के बगल में जाकर ही गिरा । नीचे मौजूद उस कर्मचारी ने फिर उपर देखें बगैर वो नोट उठाकर अपनी जेब में डाला और फिर अपने काम में लग गया ।  अंततः उपर मौजूद इंजीनियर ने एक छोटा पत्थर उठाकर उस कर्मचारी पर फेंका जो उसके सर में जाकर लगा और तब उस नीचे मौजूद कर्मचारी की निगाहें उपर की ओर उठी । 

            वास्तविक जिंदगी में उपर मौजूद वह इंजीनियर ईश्वर है और नीचे मौजूद कर्मचारी हम स्वयं हैं । हम भी ईश्वर से प्राप्त समस्त नेमतें अपना अधिकार मानते हुए ग्रहण करते चले जाते हैं, किंतु ईश्वर को याद अथवा उनका शुक्रिया अदा नहीं करते । फिर जब वो हमें तकलीफरुपी पत्थर मारकर हमें जगाता है तब हम तत्काल उसकी ओर देखते हुए उनसे समस्या मुक्ति का मार्ग उपलब्ध करवाने हेतु मन्नत, निवेदन व नाना प्रकार के उपाय करने लगते हैं ।

             क्या यह उचित नहीं माना जाना चाहिये कि जब-जब भी किसी भी प्रकार की छोटी या बडी नेमतें प्राप्त हों चाहें वो हमें अपने काम का वास्तविक प्रतिसाद ही क्यों न लगता रहा हो, हम कुछ समय रुककर अपने उस ईश्वर का शुक्रिया अदा करें और फिर दुगने-जोशो-खरोश से अगली उपलब्धियों के लिये प्रयासरत हो जावें । सयाने और समझदार लोग तो सुबह उठते ही सबसे पहले ईश्वर को इसी लिये इस बात पर भी धन्यवाद देते हैं कि अपने जीवनकाल में ईश्वरकृपा से उन्हें एक और नया सूर्योदय देखने को मिल रहा है ।


            संकट में याद करने वालों से तो देश व दुनिया के अधिकांश मंदिर बीसीयों घंटे भीड से खचाखच भरे दिखते ही रहते हैं किंतु संकटकाल के बगैर भी यदि ईश्वर को याद करते रहने और उनका धन्यवाद अर्पित करते रहने का सिलसिला निर्बाध क्रम से हम जारी रख सकें तो हो सकता है कि विपत्तियों के बडे चक्र में फंसने की स्थिति ही कभी ना बनने पावे ।

            शायद इसी बात को संत कबीरदासजी ने यूं परिभाषित किया है-

दुःख में सुमिरन सब करें, सुख में करे न कोय,
जो सुख में सुमिरन करें तो दुःख काहे को होय ।
 

शनिवार, 25 जून 2016

गौरवशाली इन्दौर...



            भारत के नक्शे पर कई शहर अपनी विशेष पहचान के कारण ही जाने जाते हैं, उन्हीं में यदि रानी अहिल्याबाई व सर सेठ हुकमचंद जैसी ऐतिहासिक शख्सियतों से जुडे इन्दौर शहर की बात की जावे तो चाहे यह शहर बम्बई, दिल्ली, कलकत्ता, मद्रास जैसे देश के महानगरों सा आकार नहीं रखता हो किंतु इसकी ऐतिहासिकता के साथ ही ऐसी अनेक विशेषतायें इस शहर के साथ शुरु से जुडी रही हैं जो इसे देश के नक्शे में एक विशिष्ट स्थान दिलवाते हुए इसकी पहचान को हमेशा से एक विशेष दर्जा सदैव दिलवाती रही हैं । 

            देश के सात राज्यों से सीधे जुडे मध्यप्रदेश के भी लगभग मध्य में राज्य की औद्योगिक व व्यापारिक राजधानी का दर्जा रखने के कारण अन्य प्रांतों से आकर बसने वाली आबादी का सर्वोच्च भार वहन करने वाले इस शहर की खासियतों का यदि जिक्र करना प्रारम्भ किया जावे तो वास्तव में लेख की लम्बाई तो बढती ही चली जाएगी किंतु यहाँ की विशेष पहचान के क्रम समाप्त होते नहीं दिखेंगे । फिर भी इस क्रम में यह जानने की कोशिश करते हैं कि वे कौन-कौनसी प्रमुख विशेषताएँ हैं जो इस शहर को इसकी खासियतों के आधार पर इसे अन्यों से कुछ अलग दिखला सकने का कारण बनती हैं-

            महान क्रिकेट खिलाड़ी सुनील गावस्कर ने अपने वनडे करियर की एकमात्र सेंचुरी इंदौर के नेहरू स्टेडियम में लगाई ।

            इन्दौर स्थित सैन्य छावनी MHOW (Military Headquarters Of War) देश की मुख्य सैन्य छावनियों में शामिल है ।

            जानकारी के अनुसार इन्दौर का नामकरण इन्द्रेश्वर मंदिर के नाम पर हुआ था, शुरूआत में यह "इन्दूर" था,जो आगे चलकर "इन्दौर" कहलाया ।

            इन्दौर देश का एकमात्र शहर है जहाँ पर IIM एवं IIT दोनों है ।
 
           इन्दौर में एशिया की सबसे बड़ी रिहायशी कॉलोनी सुदामा नगर है ।

            देश के पहले निजी रेडियो चैनल "रेडियो मिर्ची" ने अपने प्रसारण की शुरुआत इन्दौर से की थी ।

            स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर, फिल्म स्टार सलमान खान, क्रिकेट खिलाड़ी राहुल द्रविड़ और परम पूज्यनीय योग गुरु श्री मनीष शर्मा की जन्मभूमि भी इन्दौर है ।

            पूर्व में इन्दौर को  "म.प्र.का डेट्रॉयट"  नाम से नवाजा जा चुका है ।

         इंदौर देश का एकमात्र ऐसा शहर है जहां 100 कि.मी. की रेंज में दो ज्योतिर्लिंग हैं-  1. ओंकारेश्वर  और  2. महाकालेश्वर ।

            इन्दौर स्थित आर आर कैट देश की मुख्य प्रयोगशालाओं में एक है । यहां एक्सलरेटर, क्रायोजेनिक्स सहित कई महत्वपूर्ण शोध हो रहे हैं ।

            टेस्ट क्रिकेट में एक टेस्ट में   सर्वाधिक विकेट लेने का  कीर्तिमान इंदौर के नरेन्द्र हिरवानी और बाब मैसी (आस्ट्रेलिया) के नाम पर संयुक्त रूप से दर्ज है । 
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            किसी महिला प्रत्याशी द्वारा एक ही लोकसभा सीट से एक ही पार्टी के टिकट पर सर्वाधिक बार चुनाव जीतने का कीर्तिमान इन्दौर की सांसद और वर्तमान लोकसभा अध्यक्ष श्रीमती सुमित्रा महाजन के नाम पर दर्ज ।

            विकास के शुरुआती वर्षों में इन्दौर "कपड़ा मिलों का शहर" के नाम से प्रसिद्ध था लेकिन अब ये सभी मिलें बंद हो चुकी है ।

            इन्दौर स्वाद के शौकीनों का शहर है । इसे "स्वाद की राजधानी" के रूप मे जाना जाता है ।

            यहाँ पर एशिया के सबसे बड़े गणपति विराजमान हैं (बड़ा गणपति)

            यहाँ पर संपूर्ण कांच से निर्मित मंदिर है । जहां पर छत, दिवार से लेकर फर्श भी कांच की है और ये सारे कांच  विदेशों से मंगाए गए थे ।

            यहीं पर ही वीरेंद्र सहवाग ने 200 रन बनाये थे ।

            यहीं के एक विधायक के नाम सबसे ज्यादा मतों से जितने का रिकार्ड है ।

            यहीं की एक बेटी पलक मुछाल ने गाने गाकर सबसे ज्यादा हार्ट सर्जरी करवाई और यह क्रम अभी तक भी सतत जारी है ।

            यहीं का एक ट्रैफिक पुलिस आज दुनिया का सबसे पसंदीदा ट्रैफिक पुलिस है । जिसे काम करते सभी देखना चाहते है । रणजीत सिंह ।

            यहाँ पर स्थित दवा बाजार एशिया का सबसे बड़ा दवा बाजार है ।

            यहीं पर एक ऐसा पर्वत है जहां पर पितरों की याद में पोधे लगाये जाते है । पितृ पर्वत ।

            यही वो शहर है जहां मूक बधिरों की सेवा के लिए सबसे अच्छा स्कूल और ट्रेनिग कैंप है ।

            यही वो शहर है जहाँ के एक व्यापारी सर सेठ हुकुमचंदजी (कॉटन किंग) की तस्वीर आज भी लंदन कॉटन एक्सचेंज में मुख्य द्वार पर लगी है ।


            यहीं पर सर सेठ हुकुम चंद जी द्वारा स्वर्ण से निर्मित रथ है जो दुनिया में कही नहीं है और वो केवल महावीर जयंती पर ही निकलता है ।

            मोबाईल कंपनी एयर टेल ने अपनी मोबाइल सेवा की शुरुवात  सर्व प्रथम इंदौर से ही की थी ।
 

            अनंत चतुर्दशी पर रात भर चलने वाले विशाल चल समारोह और रंगपंचमी पर दिन भर रंगों से सरोबार हुडदंगीयों की विशाल सामूहिक गेर जिनके फिल्मांकन के लिये राजश्री प्रॉडक्शन जैसी नामी-गिरामी फिल्म प्रोड्यूसर संस्थाएँ विशेष आयोजन रखती हैं वह भी इसी इन्दौर शहर की विशिष्ट पहचान रही है ।

बुधवार, 8 जून 2016

एक जमाना था...


            दादी माँ बनाती थी रोटी, पहली गाय की और आखरी कुत्ते की,  हर सुबह नन्दी आ जाता था,  दरवाज़े पर - गुड़ की  डली के लिए ।

            कबूतर का चुग्गा,  चीटियों का आटा, शनिवार, अमावस, पूर्णिमा का सीधा । सरसों का तेल गली में,  काली कुतिया के ब्याने पर, गुड़ चने का प्रसाद,  सभी कुछ  निकल जाता था । वो भी उस घर से, जिसमें भोग विलास के नाम पर एक टेबल फैन भी न होता था ।

            आज सामान से भरे घरों में - कुछ भी नहीं निकलता ! सिवाय लड़ने की कर्कश आवाजों के, या फिर टी वी की आवाजें...

             तब मकान चाहे कच्चे थे, लेकिन रिश्ते सारे सच्चे थे ।

            चारपाई पर  बैठते थे, दिल में प्रेम से रहते थे । सोफे और डबल बैड क्या आ गए ?  दूरियां हमारी बढा गए ।

            छतों पर. सब सोते थे, बात बतंगड खूब होते थे, आंगन में वृक्ष थे, सांझे सबके सुख दुख थे ।

            दरवाजा खुला रहता था, राही भी आ बैठता था, कौवे छत पर कांवते थे, मेहमान भी आते जाते थे ।

            एक साइकिल ही पास था, फिर भी मेल जोल का वास था, रिश्ते सभी निभाते थे, रूठते भी थे और मनाते भी थे ।

            पैसा चाहे कम था, फिर भी माथे पे कोई गम ना था, कान चाहे कच्चे थे, पर रिश्ते सारे सच्चे थे !

             अब शायद सब कुछ पा लिया है, पर लगता है कि बहुत कुछ गंवा दिया है...

शुक्रवार, 3 जून 2016

कॉलेज स्टुडेंट्स के लिये रतन टाटा के 10 महत्वपूर्ण सबक...


              1.  जीवन उतार-चढ़ाव से भरा है, इसकी आदत बना लो.

             
            2.  लोग तुम्हारे स्वाभिमान की परवाह कभी नहीं करते,  इसलिए पहले खुद को  साबित करके दिखाओ.

          
             3.  कॉलेज की पढ़ाई पूरी करते ही मोटे वेतन के बारे में मत सोचो, एक रात में कोई वाइस-प्रेसिडेंट नहीं बनता, इसके लिए अपार मेहनत पड़ती है.

              
            4.  अभी आपको अपने शिक्षक सख्त और डरावने लगते होंगे, क्योंकि अभी तक आपका अपने जीवन में बॉस नामक प्राणी से पाला नहीं पड़ा.

             
            5.  तुम्हारी गलती सिर्फ तुम्हारी है, तुम्हारी पराजय सिर्फ तुम्हारी है, किसी को दोष मत दो, उस गलती से सीखो और आगे बढ़ो.

             
            6.  तुम्हारे माता पिता तुम्हारे जन्म से पहले इतने निरस और ऊबाऊ नही थे, जितना तुम्हें अभी लग रहा है, तुम्हारे पालन पोषण करने में उन्होंने इतना कष्ट उठाया कि उनका स्वभाव बदल गया.

              
            7.  सांत्वना पुरस्कार सिर्फ स्कूल में  देखने को मिलते है, कुछ स्कूलों में तो पास होने तक भी परीक्षा दी जा सकती है, लेकिन बाहर की दुनिया के नियम अलग हैं, वहां हारने वाले को अलग से कोई मौका नहीं मिलता.

              
            8.  जीवन के स्कूल में कक्षाएं और वर्ग नहीं होते और वहां महीने भर की छुट्टी भी नहीं मिलती, आपको सिखाने के लिए कोई समय नहीं देता, यह सब आपको खुद करना होता है.

              
            9.  TV का जीवन सही नहीं होता और जीवन TV के सीरियल नहीं होते, सही जीवन में आराम नहीं होता सिर्फ और सिर्फ काम होता है.

         
            10. लगातार पढ़ाई करने वाले और कड़ी मेहनत करने वाले अपने मित्रों को कभी मत चिढ़ाओ, वर्ना एक समय ऐसा आ सकता है कि तुम्हें उनके नीचे काम करना पड़े.

मंगलवार, 31 मई 2016

हास्य-उर्जा 1


           पत्नी ने सुबह उठते ही अपने पति को पंखे से रस्सी बांधतेदेखा,  तो घबराकर पूछा, "यह आप क्या कर रहे हो जी...?"
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          पति ने दुखी स्वर में कहा, "मैं तेरी रोज़-रोज़ की नए कपड़े दिलाने की फरमाइशों से तंग आ गया हूं, इसलिए खुदकुशी करने जा रहा हूं..."

           पत्नी ने दहाड़ें मार-मारकर रोना शुरू कर दिया, और बोली, "एक सफेद सूट तो दिलवा दो, वरना तेरहवीं पर क्या पहनूंगी...?"




          पत्नी  ICU  में थी..
          पति का रो-रोकर बुरा हाल था डॉक्टर बोला ‘हम पूरी कोशिश कर रहे  हैं, पर वह कुछ बोल ही नहीं रही है, शायद कोमा में है, अब तो सब कुछ भगवान के ही हाथ में है.
           पति बोला~ सिर्फ 40 की ही तो है अभी...
           तभी एक चमत्कार दिखा..
           ECG और धड़कन बड़ने लगी,  पत्नी की उंगली हिली,  होंठ हिले और आवाज आई - "38 की हूँ"

 

           पति - मुझे अजीब सी बीमारी हुई है मेरी बीवी जब बोलती है तो मुझे सुनाई नहीं देता.
           हकीम - माशाल्लाह ये बीमारी नहीं ये तुम पर खुदा की रहमत हुई है ।
 

शिक्षक:
           1.  उसने बर्तन धोये
           2.  उसे बर्तन धोने पड़े
           इन दोनों वाक्यों में क्या फर्क है ?
           छात्र:  पहले वाक्य में कर्ता अविवाहित है और दूसरे वाक्य में कर्ता विवाहित है.
           सुनकर मास्टर साहब की आँखों में आँसू के रेले बहने लगे ।



        एक दिन – निम्बु, केला और नारियल तीनों साथ में बैठे अपनी-अपनी कहानी सुना रहे थे !

           1.  निम्बु - लोग बड़ी बेरहमी से मुझे बीच में से काटते हैं और पूरी तरह से निचोड़ लेते हैं !

           2.   केला -  ये तो कुछ भी नहीं, बेशर्म मुझे तो नंगा कर के खा जाते हैं !


          3.   नारियल - अपनी आपबीती सुनाते हुए, ये तो कुछ भी नहीं भाईयो,  साले कमीने मुझे इतना जोर से पत्थर पर मारते हैं कि, मेरी सुसु निकल जाती है और ये उसे भी गिलास में ले के पी जाते हैं....!



            कजूंस सिंधी ने मिठाई की दुकान खोली, अखबार में विज्ञापन दिया - हेल्पर चाहिये.

            योग्यता - डायबिटीज़ अनिवार्य.



 दिल से पढें- 

जीवन में आने वाली हर चूनौती को स्वीकार करें ।......
अपनी पसंद की चीजों के लिये खर्चा कीजिये।......
इतना हंसिये के पेट दर्द हो जाये।....

आप कितना भी बूरा नाचते हो ,
फिर भी नाचिये।......
उस खूशी को महसूस कीजिये।......
फोटोज् के लिये पागलों वाली पोज् दीजिये।......
बिलकुल छोटे बच्चे बन जाइये ।

क्योंकि मृत्यु जिंदगी का सबसे बड़ा लॉस नहीं है।
लॉस तो वो है
के जिंदा होकर भी आपके अंदर जिंदगी जीने की आस खत्म हो चुकी है।.....

हर पल को खूशी से जीने को ही जिंदगी कहते है।
"जिंदगी है छोटी,पर" हर पल में खुश हूँ "काम में खुश हूं,"आराम में खुश हूँ ,

"आज पनीर नहीं," दाल में ही खुश हूं,
"आज गाड़ी नहीं," पैदल ही खुश हूं,

"दोस्तों का साथ नहीं," अकेला ही खुश हूं,
"आज कोई नाराज है," उसके इस अंदाज से ही खुश हूं,

"जिस को देख नहीं सकता," उसकी आवाज से ही खुश हूं,
"जिसको पा नहीं सकता," उसको सोच कर ही खुश हूं,

"बीता हुआ कल जा चुका है," उसकी मीठी याद में ही खुश हूं,
"आने वाले कल का पता नहीं," इंतजार में ही खुश हूं,

"हंसता हुआ बीत रहा है पल," आज में ही खुश हूं,
"जिंदगी है छोटी," हर पल में खुश हूं,


Be Happy Always
 

रविवार, 22 मई 2016

पति-पत्नी और नोक-झोंक...


मैं रूठा, तुम भी रूठ गए, फिर मनाएगा कौन ?
आज दरार है, कल खाई होगी, फिर भरेगा कौन ?

मैं चुप, तुम भी चुप, इस चुप्पी को फिर तोड़ेगा कौन ?
बात छोटी को लगा लोगे दिल से, तो रिश्ता फिर निभाएगा कौन ?

दु:खी मैं भी और  तुम भी बिछड़कर, सोचो हाथ फिर बढ़ाएगा कौन ?
न मैं राजी, न तुम राजी, फिर माफ़ करने का बड़प्पन दिखाएगा कौन ?

डूब जाएगा यादों में दिल कभी, तो फिर धैर्य बंधायेगा कौन ?
एक अहम् मेरे, एक तेरे भीतर भी, इस अहम् को फिर हराएगा कौन ?

ज़िंदगी किसको मिली है सदा के लिए ? 
फिर इन लम्हों में अकेला रह जाएगा कौन ?

मूंद ली दोनों में से गर किसी दिन एक ने आँखें,
तो कल इस बात पर फिर पछतायेगा कौन ?



अपनी गृहस्थी को कुछ इस तरह बचा लिया
कभी आँखें दिखा दी कभी सर झुका लिया

आपसी नाराज़गी को लम्बा चलने ही न दिया
कभी  वो  हंस पड़े  कभी मैं मुस्करा दिया

रूठ कर बैठे  रहने से  घर भला कहाँ चलते हैं
कभी उन्होंने गुदगुदा दिया कभी मैंने मना लिया

खाने पीने  पे  विवाद कभी होने  ही  न दिया
कभी गरम खा ली कभी बासी से काम चला लिया

मियां हो या बीबी,  महत्व में तो कोई कम नहीं
कभी खुद डॉन बन गए, कभी उन्हें बॉस बना दिया.

For : All the lovely Couples..
 

शुक्रवार, 20 मई 2016

तुलना...! मार्बल फर्श और मूर्ति की.

If you don't, you'll find an excuse."





           एक ट्रक में मारबल का सामान जा रहा था, उसमे टाईल्स भी थी, और भगवान की मूर्ति भी थी ! 
         
          रास्ते में टाईल्स ने मूर्ति से पूछा- "भाई ऊपर वाले ने हमारे साथ ऐसा भेद-भाव क्यों किया है ?" 

          मूर्ति ने पूछा, "कैसा भेद भाव ?"

          टाईल्स ने कहा- "तुम भी पत्थर, मै भी पत्थर !

           तुम भी उसी खान से निकले, मै भी,


           तुम्हे भी उसी ने ख़रीदा बेचा, मुझे भी,


          तुम भी मन्दिर में जाओगे, मै भी,

           किंतु वहां तुम्हारी पूजा होगी,  और मै पैरो तले रौंदा जाउंगा । ऐसा क्यों ?"

          मूर्ति ने बड़ी शालीनता से जवाब दिया-

          तुम्हे जब तराशा गया, तब तुमसे दर्द सहन नही हुवा .और तुम टूट गये,  टुकड़ो में बंट गये ।

          और मुझे जब तराशा गया तब मैने दर्द सहा, .मुझ पर लाखों हथोड़े बरसाये गये,  मैं रोया नही ! .मेरी आँख बनी, कान बने, हाथ बना, पांव बने, फिर भी मैं टूटा नही । .इस तरह मेरा रूप निखर गया, और मै पूजनीय हो गया ।


          तुम भी दर्द सहते तो तुम भी पूजे जाते,  मगर तुम टूट गए, और टूटने वाले हमेशा पैरों तले रोंदे जाते है ।
. शिक्षा :-

.          भगवान जब आपको तराश रहा हो, तो  टूट मत जाना,  हिम्मत मत हारना । अपनी रफ़्तार से आगे बढते जाना,  मंजिल जरूर मिलेगी ।

.          मुश्किलें केवल बेहतरीन लोगों के हिस्से में ही आती हैं,  क्यूंकि वो लोग ही उसे बेहतर तरीके से अंजाम देने की ताकत रखते हैं ।
  
"रख हौसला मुसाफिर, वो मंज़र भी आयेगा;
प्यासे के पास चलकर, खुद समंदर भी आयेगा ।
.थक कर ना बैठ, ऐ मंजिल के मुसाफ़िर;
.मंजिल भी मिलेगी और जीने का मजा भी आयेगा ।"

          लोहा नरम होकर औजार बन जाता है, सोना नरम होकर जेवर बन जाता है,  मिट्टी नरम होकर खेत बन जाती है,  आटा नरम होता है तो रोटी बन जाती है ! ऐसे ही इंसान भी अगर नरम रहे, तो लोगो की दिलों मे अपनी जगह बना ही लेता है !

सदैव बेहतर की उम्मीद करे ! "खुश रहिये मुस्कुराते रहिये" ।

सोमवार, 16 मई 2016

गधे की चुनौति...

          एक गधे ने एक शेर को चुनौती दे दी कि मुझसे लड़ कर दिखा तो जंगल वाले तुझे राजा मान लेंगे |  लेकिन शेर गधे की बात को अनसुना कर चुपचाप वहाँ से निकल गया |

          एक लोमड़ी ने छुप कर ये सब देखा और सुना  तो उससे रहा नहीं गया और वो शेर के पास जा कर बोली-  क्या बात है ?  उस गधे ने आपको खुली चुनौती दी,  फिर भी आप उस से लड़े क्यों नहीं  और ऐसे बिना कुछ बोले चुपचाप  क्यों जा रहे हैं  ?

          शेर ने तब गंभीर स्वर में उत्तर दिया-  मैं शेर हूँ, इस जंगल का राजा हूँ  और हमेशा रहूँगा,  सभी जानवर इस सत्य से परिचित हैं  और  मुझे इस सत्य को किसी को सिद्ध कर के नहीं दिखाना है |  गधा तो है ही गधा, और हमेशा गधा ही रहेगा |  गधे की चुनौती स्वीकार करने का मतलब मैं उसके बराबर हुआ इसलिये मैं भी गधा । गधे की बात का उत्तर देना भी अपनी इज्जत कम करना है, क्योंकि उसके स्तर की बात का उत्तर देने के लिये मुझे उसके नीचे स्तर तक उतरना पड़ेगा और मेरे उस के लिये उससे नीचे के स्तर पर उतरने से उसका घमण्ड बढ़ेगा | मैं यदि उसके सामने एकबार दहाड़ दूँ, तो उसकी लीद निकल जायेगी और वो बेहोश हो जायेगा । अगर मैं एक पंजा मार दूँ, तो उसकी गर्दन टूट जायेगी और वो मर जायेगा |  गधे से लड़कर मैं निश्चित रूप से जीत जाऊँगा लेकिन उस से मेरी इज्जत नहीं बढ़ेगी बल्कि जंगल के सभी जानवर बोलने लगेंगे कि शेर एक गधे से लड़ कर जीता- और एक तरह से यह मेरी बेइज्जती ही होगी |  इन्हीं कारणों से मैं उस आत्महत्या के विचार से मुझे चुनौती देने वाले गधे को अनसुना कर के दूर जा रहा हूँ, ताकि वो जिंदा रह सके |

          लोमड़ी को बहुत चालाक और मक्कार जानवर माना जाता है लेकिन वो भी शेर की इन्सानियत वाली विद्वत्तापूर्ण बातें सुन कर उसके प्रति श्रद्धा से भर गयी |

          यह बोधकथा समझनी इस लिये जरूरी है कि जिन्दगी में आये दिन गधों से वास्ता पड़ता रहता है- और उनसे कन्नी काट कर निकल लेने में हमारी भलाई होती है |

          शेर हमेशा ही गधों से लड़ने से कतराते आये हैं- इसीलिए गधे खुद को तीसमारखाँ और अजेय समझने लगे हैं |

शनिवार, 14 मई 2016

नौ आदतों से नवग्रहो का सम्मान कर सुधारें अपना गृह-जीवन.


           
          अगर आपको कहीं पर भी थूकने की आदत है तो यह निश्चित है कि आपको यश, सम्मान अगर मुश्किल से मिल भी जाता है तो कभी टिकेगा नहीं, यह काम वॉश-बेसिन में जाकर ही  करें ! इससे आपके यश,मान-सम्मान में अभिवृध्दि होगी।         

         जिन लोगों को अपनी जूठी थाली या बर्तन वहीं उसी जगह पर छोड़ने की आदत होती है उनको सफलता कभी भी स्थायी रूप से नहीं मिलती.! बहुत मेहनत करनी पड़ती है और ऐसे लोग अच्छा नाम नहीं कमा पाते.! अगर आप अपने जूठे बर्तनों को उठाकर उनकी सही जगह पर रख आते हैं तो चन्द्रमा और शनि का आप सम्मान करते हैं ! इससे मानसिक शांति बढ़ कर अड़चनें दूर होती हैं ।

          जब भी हमारे घर पर कोई भी बाहर से आये, चाहे मेहमान हो या कोई काम करने वाला, उसे स्वच्छ पानी ज़रुर पिलाएं ! ऐसा करने से हम राहु का सम्मान करते हैं.! जो लोग बाहर से आने वाले लोगों को हमेशा स्वच्छ पानी  पिलाते हैं उनके घर में कभी भी राहु का दुष्प्रभाव नहीं पड़ता.! अचानक आ पड़ने वाले कष्ट-संकट नहीं आते ।

          घर के पौधे भी आपके अपने परिवार के सदस्यों जैसे ही होते हैं,  उन्हें भी प्यार और थोड़ी देखभाल की जरुरत होती है.! जिस घर में सुबह-शाम पौधों को पानी दिया जाता है तो हम बुध, सूर्य और चन्द्रमा का सम्मान करते हुए परेशानियों का डटकर सामना कर पाने में  समर्थ हो पाते हैं ! परेशानियां दूर होकर सुकून आता है । जो लोग नियमित रूप से पौधों को पानी देते हैं, उन लोगों को डिप्रेशन जैसी परेशानियाँ नहीं पकड़ पातीं.!
 
          जो लोग बाहर से आकर अपने चप्पल, जूते, मोज़े इधर-उधर फैंक देते हैं, उन्हें उनके शत्रु बड़ा परेशान करते हैं.! इससे बचने के लिए अपने चप्पल-जूते करीने से लगाकर रखें, आपकी प्रतिष्ठा बनी रहेगी।
 
          उन लोगों का राहु और शनि खराब होगा, जो लोग जब भी अपना बिस्तर छोड़ेंगे तो उनका बिस्तर हमेशा फैला हुआ होगा, सिलवटें ज्यादा होंगी, चादर कहीं, तकिया कहीं, कम्बल कहीं । उस पर ऐसे लोग अपने पुराने पहने हुए कपडे़ तक फैला कर रखते हैं ! ऐसे लोगों की पूरी दिनचर्या कभी भी व्यवस्थित नहीं रहती, जिसकी वजह से वे खुद भी परेशान रहते हैं और दूसरों को भी परेशान करते हैं.! इससे बचने के लिए उठते ही स्वयं अपना बिस्तर समेट दें.! जीवन आश्चर्यजनक रूप से सुंदर होता चला जायेगा।

          पैरों की सफाई पर हम लोगों को हर वक्त ख़ास ध्यान देना चाहिए, जो कि हम में से बहुत सारे लोग भूल जाते हैं ! नहाते समय अपने पैरों को अच्छी तरह से धोयें, कभी भी बाहर से आयें तो पांच मिनट रुक कर मुँह और पैर धोयें.! आप खुद यह पाएंगे कि आपका चिड़चिड़ापन कम होगा, दिमाग की शक्ति बढे़गी और क्रोध धीरे-धीरे कम होने लगेगा.! आनंद बढ़ेगा।

          रोज़ खाली हाथ घर लौटने पर धीरे-धीरे उस घर से लक्ष्मी चली जाती है और उस घर के सदस्यों में नकारात्मक या निराशा के भाव आने लगते हैं.! इसके विपरीत घर लौटते समय कुछ न कुछ वस्तु लेकर आएं तो उससे घर में बरकत बनी रहती है.! घर में लक्ष्मी का वास होता जाता है.! हर रोज घर में कुछ न कुछ लेकर आना समृद्धि-वृद्धि का सूचक माना गया है.! ऐसे घर में सुख, समृद्धि और धन हमेशा बढ़ता जाता है और घर में रहने वाले सदस्यों की भी तरक्की होती है.!

          जूठन बिल्कुल न छोड़ें । ठान लें । एकदम तय कर लें। पैसों की कभी कमी नहीं होगी।  अन्यथा नौ के नौ गृहों के खराब होने का खतरा सदैव मंडराता रहेगा। कभी कुछ कभी कुछ । करने के काम पड़े रह जायेंगे और समय व पैसा कहां जायेगा पता ही नहीं चलेगा।

          अच्छी बातें बाँटने से दोगुनी तो होती ही हैं साथ ही अच्छी बातों का महत्त्व समझने वालों में आपकी इज़्जत भी बढ़ती है ।
   

इलाज...!

        एक महिला ने अपने पति का मोबाइल चेक किया तो फोन  नंबर कुछ अलग ही तरीके से  Save किये हुए दिखे, जैसे :-         आँखों का इलाज ...