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गुरुवार, 15 दिसंबर 2016

रुप और गुण...



          सम्राट चंद्रगुप्त ने एक बार चाणक्य से कहा, चाणक्य, काश तुम खूबसूरत होते  ?
          चाणक्य ने कहा, 'राजन इंसान की पहचान गुणों से होती है, रूप से नहीं ।'
          तब चंद्रगुप्त ने पूछा - 'क्या कोई ऐसा उदाहरण दे सकते हो जहां गुण के सामने रूप छोटा रह गया हो  ?
          तब चाणक्य ने राजा को दो गिलास पानी पीने को दिया । चंद्रगुप्त के पानी पीने के बाद चाणक्य ने कहा, 'पहले गिलास का पानी सोने के घड़े का था और दूसरे गिलास का पानी मिट्टी के घड़े का, आपको कौन सा पानी अच्छा लगा ।'
          चंद्रगुप्त बोले, 'मटकी से भरे गिलास का ।' 
          नजदीक ही सम्राट चंद्रगुप्त की पत्नी मौजूद थीं, वह इस उदाहरण से काफी प्रभावित हुई, उन्होंने कहा, 'वो सोने का घड़ा किस काम का जो प्यास न बुझा सके ।
          मटकी भले ही कितनी कुरुप हो, लेकिन प्यास मटकी के पानी से ही बुझती है, यानी रूप नहीं गुण महान होता है ।'
          इसी तरह इंसान अपने रूप के कारण नहीं बल्कि उपने गुणों के कारण पूजा जाता है ।
          रूप तो आज है, कल नहीं लेकिन गुण जब तक जीवन है तब तक जिंदा रहते हैं, और मरने के बाद भी जीवंत रहते हैं ।

          दिया मिट्टी का है या सोने का, यह महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि वो अंधेरे में प्रकाश कितना देता है यह महत्वपूर्ण है ।
          उसी तरह मित्र गरीब है या अमीर है, यह महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि वो तुम्हारी मुसीबत मे तुम्हारा कितना साथ देता है, यह महत्वपूर्ण है ।

मंगलवार, 30 अगस्त 2016

"अर्थव्यवस्था पर भारी आस्था"


            हमारे देश में रोज न जाने कितनी रेलगाडियां न जाने कितनी नदियों को पार करती हैं और उनके यात्रियों द्वारा हर रोज नदियों में सिक्के फेंकने का चलन दिखाई देता रहता है ।  अगर रोज के सिक्को के हिसाब से गणना की जाये तो ये रकम कम से कम दहाई के चार अंको को तो पार करती होगी । 

            सोचो अगर इस तरह हर रोज भारतीय मुद्रा ऐसे फेंक दी जाती है तो इससे भारतीय अर्थव्यवस्था को कितना नुकसान पहुँचता होगा ?  ये तो कोई अर्थशास्त्री ही बता सकता है । लेकिन एक रसायनज्ञ होने के नाते मैं जरूर लोगों को सिक्के की धातु के बारे में जागरूक कर सकता हूँ ।

             वर्तमान सिक्के 83% लोहा और 17 % क्रोमियम के बने होते है । आप सबको ये बता दूँ कि क्रोमियम एक भारी जहरीली धातु है ।

            क्रोमियम दो अवस्था में पाया जाता है, एक Cr (III) और  दूसरी Cr (IV) पहली अवस्था जहरीली नही मानी गई बल्कि क्रोमियम (IV) की दूसरी अवस्था 0.05% प्रति लीटर से ज्यादा हमारे लिए जहरीली है, जो सीधे कैंसर जैसी असाध्य बीमारी को जन्म देती है ।


            सोचिये एक नदी जो अपने आप में बहुमूल्य खजाना छुपाये हुए है उसका हमारे एक दो रूपये फेंकने से कैसे  भला हो सकता है ? अलबत्ता पूर्वकाल में सिक्के फेंकने का वास्तविक चलन तांबे के सिक्के फेकने से शुरु हुआ था ।


            एक समय मुगलकालीन समय में दूषित पानी से बीमारियां फैली थी तो, राजा ने प्रजा के लिए ऐलान करवाया कि हर व्यक्ति को अपने आसपास के जल के स्रोत या जलाशयों में तांबे के सिक्के को फेकना चाहिये, क्योंकि तांबा जल को शुद्ध करने वाली सबसे अच्छी धातु है ।


            आजकल सिक्के नदी में फेंकने से हम उसके ऊपर किसी तरह का उपकार नहीं बल्कि जलप्रदूषण और बीमारियों को बढ़ावा दे रहे हैं । इसलिए आस्था के नाम पर भारतीय मुद्रा को हो रहे नुकसान को रोकने की जिम्मेदारी हम सब नागरिकों की है और हमें देशहित में नदी में पैसे नहीं डालने चाहिए बल्कि इस कुप्रथा को रोककर देश की मुद्रा के साथ ही नदियों को शुद्ध रखने में सहयोग करना चाहिये ।


सोर्स : WhatsApp.

         

शुक्रवार, 19 अगस्त 2016

तमाशबीन या प्रयासरत


             एक गांव में आग लगी । सभी लोग उसको बुझाने में लगे हुए थे । वहीं एक चिड़िया अपनी चोंच में पानी भरती और आग में डालती, फिर भरती और फिर आग में डालती । एक कौवा डाल पर बैठा उस चिड़िया को देख रहा था । कौवा चिड़िया से बोला - "अरे पागल तू कितनी भी मेहनत कर ले,  तेरे बुझाने से ये आग नहीं बुझेगी ।"

             चिड़िया विनम्रता से बोली  "मुझे पता है मेरे बुझाने से ये आग नहीं बुझेगी, लेकिन जब भी इस आग का ज़िक्र होगा, तो मेरी गिनती आग बुझाने वालों में होगी और तुम्हारी तमाशा देखने वालों में होगी"।

            ऐसे ही समाज में हम सब भी कभी-कभी कौए की तरह यह कह/सोच कर अपना बचाव करते हैं कि 'अकेले हम समाज/देश को नही सुधार सकते, अकेले हमसे क्या होगा' ।

             सब जानते हैं कि मुश्किल है लेकिन क्या यह उचित नहीं है कि जब-जब भी गिनती हो और हमारा नाम लिया जाय तो समाज के उत्थान करने वालों में हो न कि तमाशा देखने वालों में ।


मंगलवार, 16 अगस्त 2016

सफल बिजनेसमेन बनने के टिप्स - सफल व्यक्तियों के द्वारा...

            
            हम आपको सफल व्यक्तियों की वो बातें बताने वाले हैं जो आपके बिजनेस को नई ऊँचाई पर ले जाने में मदद करेंगी ।

1. सस्ते रिसोर्सेज का प्रयोग करें – मुकेश अम्बानी
            स्टार्टअप के प्रारम्भ में पैसा आपको अधिक से अधिक लाभ कमाने के लिए एक टूल होता है । अगर आप प्रारम्भ में ही महंगे रिसोर्सेज में अधिक रुपये खपा देंगे तो प्रोडक्टिविटी बढ़ाने के लिए आपके पास इसकी कमी हो जाएगी। इसलिए सस्ते मगर अच्छे रिसोर्सेज का प्रयोग करें ।

2. अवसर को हाथ से न जाने दें – स्टीव जॉब्स
            हाथ से निकला अवसर सदा के लिए चला जाता है । इसलिए अपनी कमीज़ की बाँहें ऊपर मोड़कर आने वाले हर अवसर के लिए तैयार रहें, भले ही वो छोटा हो या फिर बड़ा । हम ये पहले से नहीं बता सकते हैं कौन सा मोड़ जीवन का टर्निंग प्वाइंट बन जाये ।

3. स्वयं को आत्मा से जोड़ें – सर रिचर्ड ब्रांसन
            भेड़ की चाल चलना छोड़ो। इसकी जगह अपने दिल की आवाज़ सुनो और वही करो तुम चाहते हो क्योंकि तुमको तुमसे अच्छा कौन जानता है । बस तुम ही जानते हो कि किस परिस्थिति में तुम क्या कर सकते हो ? अपने विचारों को अपने दिल और आत्मा से जोड़कर तुम मनचाहा रिज़ल्ट पा सकते हो ।

4. सोशल मीडिया से जुड़ें – होवर्ड सुल्ज़
            अपने कस्टमर्स तक पहुंचने के लिए सोशल मीडिया साइटें सबसे अच्छा रास्ता है । अपने पेज पर आप प्रोडक्ट और सर्विसेज के बारे में नियमित अपडेट डालकर बिजनेस को आसानी से बढ़ा सकते हैं । अपने बिजनेस के लोगो को इतना प्रभावशाली डिज़ाइन करें कि उसे देखने वाला आपके पेज पर जाए बिना रह न पाए।

5. स्वस्थ प्रतिस्पर्धा करें – बिल गेट्स
            आप को प्रतिस्पर्धा में बुराई से बचना चाहिए। स्वस्थ शब्द का अर्थ ऐसी प्रतिस्पर्धा से है जो आपका या फिर दूसरे का नुकसान न करे। प्रतिस्पर्धा आपको अपनी क्षमता को परखने और कठिनाइयों में अपने सपने पूरे करने की शक्ति देती है ।

6. अपना ध्यान रखें – टिम कुक
            स्टार्टअप प्रारम्भ करने के साथ बहुत सी चिंताएँ सताने लगती हैं । बिजनेस प्लान बनाना, इंवेस्टर्स लाना, फ़ंड्स बढ़ाना, काम के तरीके को सही डिज़ाइन करना, सही लोगों को काम पे रखना, मार्केटिंग, प्रोमोशन, प्रोडक्टिविटी बढ़ाना, सर्विसेज बेहतर करना, नेटवर्क में प्रभाव बढ़ाना, अच्छी स्थिति बनाना, आदि बहुत से काम आपका मानसिक और शारीरिक तनाव बढ़ा सकते हैं । इस तरह के कठिन परिस्थितियों में काम करके आप मानसिक और शारीरिक रूप से कमज़ोर हो सकते हैं । इसलिए आपको अपनी सेहत का पूरा ध्यान रखना होगा, आप स्वस्थ रहेंगे तभी उपलब्धियाँ प्राप्त होंगी ।



7. सम्बंध बनायें – लैरी पेज
            जब आपके नेटवर्क में दूसरों के साथ आपके सम्बंध सही होंगे तो बिजनेस आगे बढ़ेगा । इसलिए आप जिन लोगों के साथ काम करते हैं उनसे अच्छे सम्बंध बनाकर रखें । चाहे वो इंवेस्टर्स हों, सप्लायर्स हों या फिर स्टॉफ़ हो; सभी के साथ अच्छे सम्बंध रखें । भले आप आज किसी व्यक्ति के साथ काम न कर रहे हों लेकिन फिर भी उसके साथ अच्छे सम्बंध रखकर भविष्य में लाभ उठाया जा सकता है ।

            तो अब  इंतज़ार किस बात का है ? उठो, अपने बिजनेस प्लान पर काम करो और सफल बिजनेसमेन की इन बातों का ध्यान रखो । भले इनमें कुछ टिप्स को ही आप मानें लेकिन वो आपको फ़ायदा ज़रूर पहुंचायेंगी ।



शुक्रवार, 5 अगस्त 2016

मैं पैसा हूँ...



मैं पैसा हूँ...
            मुझे आप मरने के बाद ऊपर नहीं ले जा सकते, मगर जीते जी मैं आपको बहुत ऊपर ले जा सकता हूँ ।

मैं पैसा हूँ...
            मुझे पसंद करो सिर्फ इस हद तक कि लोग आपको नापसन्द न करने लगें ।

मैं पैसा हूँ...
            मैं भगवान् नहीं मगर लोग मुझे भगवान् से कम नहीं मानते ।

मैं पैसा हूँ...
            मैं नमक की तरह हूँ, जो जरुरी तो है मगर जरुरतसे ज्यादा हो तो जिंदगी का स्वाद बिगाड़ देता है ।

मैं पैसा हूँ...
             इतिहास में कई ऐसे उदाहरण मिल जाएंगे जिनके पास मैं बेशुमार था, मगर फिर भी वो  मरे तो उनके लिए कोई रोने  वाला भी नहीं था ।


मैं पैसा हूँ...
            मैं कुछ भी नहीं हूँ; मगर मैं निर्धारित करता हूँ, कि लोग आपको कितनी इज्जत देते है ।

मैं पैसा हूँ...
            मैं आपके पास हूँ तो आपका हूँ । आपके पास नहीं हूँ तो आपका नहीं हूँ  । मगर मैं आपके पास हूँ तो आपकी चाही सभी वस्तुएँ आपकी हैं । 


 मैं पैसा हूँ...
             मैं नई नई रिश्तेदारियाँ बनाता हूँ, मगर असली औऱ पुरानी बिगाड़ भी देता हूँ । 

मैं पैसा हूँ...
             मैं सारे फसाद की जड़ हूँ,  मगर फिर भी न जाने क्यों सब मेरे पीछे इतना पागल हैं ।
 
क्यों ? विचार कीजिये...


सोमवार, 25 जुलाई 2016

मारवाडी फटाके...




            सेठाणीजी नाराज होकर बोली - "जो म्हारो ब्याव कोई असली राक्षस सु भी हो जातो ना; तो भी वो मन्ने थारैसुं जादा सुखी रांखतो ।"

            मारवाड़ी सेठजी - यो तो बिलकुल ही कोनी हो सकतो थो । 


            सेठाणीजी - क्यू कोनी हो सकतो थो ? 


            सेठजी - अये बावळी ! आपणा लोगां में एक ही गोत्र में ब्याव कोनी होवै. ।




            एक बार एक Punjabi कुए में गिर गया... ...और जोर जोर से रोने लगा  !

            एक मारवाड़ी वहाँ से जा रहा था उसने आवाज सुनी तो रुका और बोला :  "कुण है भाई ?"

            Punjabi : अस्सी हाँ !

            मारवाड़ी:  "भाई ! थे एक-दो होता,  तो काड देतो...

            80 तो म्हारै बाप से बी कोणी निकळै !"  पड्या रेओ !




मारवाडी सीख :
                              
           1.   चौखी संगत में उठणो बैठणो । 

            2.   काम स काम राखणो ।  
                  
            3.   ऊड़तो तीर नही पकडनो । 

            4.   घणो लालच कोनी करणो । 

            5. सोच समझकर पग राखणो ।

            6. रास्ते आणो, रास्ते जाणो ।   
 
            7. जितो हो सके उतो कम बोलणो ।

            8. छोटा-मोटा को कायदो राखणो।
 
            9.   जितो पचे उतो ई खाणो । (पेट खुदको होवे ।)
   
            10.  पूच्छ्या बीना सलाह नी देणो । 

            11.  पराई पंचायती नी करणी ।

            12.  आटा मे लूण समावे, लूण मे आटो कोनी ।

            13.  पगा बलती देखणी ढूंगा बलती कोणी । 

            14.  बीच में ही लाडे की भुवा नी बणनो ।

            15.  सुणनी सबकी करणी मन की ।



अठे हर कोई भरे बटका
घुमाबा नहीं ले जावां, तो घराळी भरे बटका।
घराळी रो मान ज्यादा राखां, तो माँ भरे बटका।
कोई काम कमाई नहीं करां, तो बाप भरे बटका।
पॉकेट मनी नहीं देवां, तो बेटा भरे बटका।
कोई खर्चो पाणी नहीं करां, तो दोस्त भरे बटका।
थोड़ो सो कोई न क्यूं कह दयां, तो पड़ौसी भरे बटका।
पंचायती में नहीं जावां, तो समाज भरे बटका।
जनम मरण में नहीं जावां, तो सगा संबंधी भरे बटका।
छोरा छोरी नहीं पढ़े, तो मास्टर भरे बटका।
पुरी फीस नहीं देवां, तो डॉक्टर भरे बटका।
गाड़ी का कागज पानड़ा नहीं मिले, तो पुलिस भरे बटका।
मांगी रिश्वत नहीं देवां, तो अफसर भरे बटका।
टाइम सूं उधार नहीं चुकावां, तो सेठ भरे बटका।
टेमूं टेम किश्त नहीं चुकावां, तो बैंक मैनेजर भरे बटका।
नौकरी बराबर नहीं करां, तो बॉस भरे बटका।
फेसबुक पर लाइक कमेंट नहीं करां, तो फ्रेंड भरे बटका।
अब थे ही बताओ, जावां तो कठे जावां,
अठे हर कोई भरे बटका, अठे हर कोई भरे बटका।
 


रविवार, 17 जुलाई 2016

ईश्वर आज अवकाश पर हैं...


ईश्वर आज अवकाश पर हैं, मंदिर की घंटी ना बजाइये ।

जो बैठे हैं बूढ़े - बुज़ुर्ग,  अकेले पार्क में ...
जाकर  उनके साथ कुछ समय बिताइये ।
ईश्वर आज अवकाश पर है, मंदिर की घंटी ना बजाइये ।

ईश्वर है पीड़ित परिवार के साथ, जो अस्पताल में आज परेशान है ...
उस पीड़ित परिवार की जाकर कुछ मदद कर आइये ।
ईश्वर आज अवकाश पर हैं, मंदिर की घंटी ना बजाइये।

एक चौराहे पर खड़ा युवक, काम की तलाश में है,
उसके पास जाकर, उसे नौकरी के अवसर दिलाइये ...
ईश्वर आज अवकाश पर हैं, मंदिर की घंटी ना बजाइये ...

ईश्वर है चाय कि दुकान पर, उस अनाथ बच्चे के साथ ...
जो, कप प्लेट धो रहा है,
पाल सकते हैं, पढ़ा सकते हैं, तो उसको आप पढ़ाइये ...
ईश्वर आज अवकाश पर हैं, मंदिर की घंटी ना बजाइये ।

एक बूढ़ी औरत, जो दर दर भटक रही है,
एक अच्छा सा लिबास जाकर उसे दिलाइये ...
हो सके तो, उसे किसी नारी आश्रम में छोड़ आइये ।
ईश्वर आज अवकाश पर हैं, मंदिर की घंटी ना बजाइये ।


सोमवार, 11 जुलाई 2016

कर्मफल


            भीष्म पितामह रणभूमि में शरशैया पर पड़े थे । हल्का सा भी हिलते तो शरीर में घुसे हुए बाण भारी वेदना के साथ रक्त की पिचकारी सी छोड़ देते। ऐसी दशा में उनसे मिलने सभी आ जा रहे थे। श्री कृष्ण भी दर्शनार्थ आये। उनको देखकर भीष्म जोर से हँसे और कहा... आइयें जगन्नाथ ! आप तो सर्व ज्ञाता हैं । सभी कुछ जानते हैं, बताइए मैंने ऐसा कौनसा पाप किया था जिसका दंड इतना भयावह मिला...?

            कृष्ण : पितामह ! आपके पास वह शक्ति है, जिससे आप अपने पूर्व जन्म देख सकते हैं, आप स्वयं ही देख लेते ।

             भीष्म : देवकी नंदन ! मैं यहाँ अकेला पड़ा और कर ही क्या रहा हूँ..? मैंने सब देख लिया ...अभी तक 100 जन्म देख चुका हूँ ।  मैंने उन 100 जन्मों में एक भी कर्म ऐसा नहीं किया जिसका परिणाम ये हो कि मेरा पूरा शरीर बिंधा पड़ा है,  हर आने वाला क्षण... ओर पीड़ा लेकर आता है ।
 
            कृष्ण : पितामह ! आप एक भव और पीछे जाएँ, आपको उत्तर मिल जायेगा ।

             भीष्म ने ध्यान लगाया और देखा कि 101 भव पूर्व वो एक नगर के राजा थे ।  एक मार्ग से अपनी सैनिकों की एक टुकड़ी के साथ कहीं जा रहे थे । एक सैनिक दौड़ता हुआ आया और बोला - राजन ! मार्ग में एक सर्प पड़ा है, यदि हमारी टुकड़ी उसके ऊपर से गुजरी तो वह मर जायेगा ।

             भीष्म ने कहा... एक काम करो... उसे किसी लकड़ी में लपेट कर झाड़ियों में फेंक दो ।
 
             सैनिक ने वैसा ही किया... उस सांप को एक लकड़ी में लपेटकर झाड़ियों में फेंक दिया । दुर्भाग्य से झाडी कंटीली थी, सांप उनमें फंस गया, जितना प्रयास उनसे निकलने का करता और अधिक फंस जाता । कांटे उसकी देह में गड गए, खून रिसने लगा। धीरे धीरे वह मृत्यु के मुंह में जाने लगा । 5-6 दिन की तड़प के बाद ही उसके प्राण निकल पाए ।
 
             भीष्म : हे त्रिलोकी नाथ ! आप जानते हैं कि मैंने जानबूझ कर ऐसा नहीं किया,  अपितु मेरा उद्देश्य उस सर्प की रक्षा का था, तब ये परिणाम क्यों...?
  
            कृष्ण: तात श्री ! हम जान बूझ कर क्रिया करें या अनजाने में ...किन्तु क्रिया तो हुई न... उसके प्राण तो गए ना... ये तो विधि का विधान है कि जो क्रिया हम करते हैं उसका फल  हमें भोगना ही पड़ता है... आपका पुण्य इतना प्रबल था कि 101 भव उस पाप फल को उदित होने में लग गए ।  किन्तु  अंततः वह  हुआ ।
            किसी भी जीव को लोग जान बूझ कर मार रहे हैं... उसने जितनी पीड़ा सहन की.. वह उस जीव (आत्मा) को इसी जन्मअथवा अन्य किसी जन्म में अवश्य भोगनी होगी ।


            अतः अपनी हर दैनिक क्रिया सावधानीपूर्वक ही करें । क्योंकि कर्मों का फल देर-सवेर  भुगतना तो अवश्यमेव  पडता ही है ।

         

शनिवार, 9 जुलाई 2016

अध्यात्म ज्ञान...


प्र.1-  वेद किसे कहते है ?
उत्तर- ईश्वरीय ज्ञान की पुस्तक को वेद कहते है।

प्र.2-  वेद-ज्ञान किसने दिया ?
उत्तर-  ईश्वर ने दिया।

प्र.3-  ईश्वर ने वेद-ज्ञान कब दिया ?
उत्तर-  ईश्वर ने सृष्टि के आरंभ में वेद-ज्ञान दिया।

प्र.4-  ईश्वर ने वेद ज्ञान क्यों दिया ?
उत्तर- मनुष्य-मात्र के कल्याण के लिए।

प्र.5-  वेद कितने है ?

उत्तर- चार प्रकार के ।
1-ऋग्वेद,  2 - यजुर्वेद,  3- सामवेद,  4 - अथर्ववेद  ।

प्र.6-  वेदों के ब्राह्मण ।

        वेद         ब्राह्मण
1 - ऋग्वेद      -  ऐतरेय
2 - यजुर्वेद     -   शतपथ
3 - सामवेद     -   तांड्य
4 - अथर्ववेद    -   गोपथ

प्र.7-  वेदों के उपवेद कितने है।

उत्तर -  वेदों के चार उप वेद है ।
          वेद              उपवेद
    1- ऋग्वेद       -   आयुर्वेद
    2- यजुर्वेद       -   धनुर्वेद
    3 -सामवेद     -     गंधर्ववेद
    4- अथर्ववेद    -     अर्थवेद

प्र 8-  वेदों के अंग कितने होते है ?

उत्तर -  वेदों के छः अंग होते है ।
1 - शिक्षा,  2 - कल्प,  3 - निरूक्त,  4 - व्याकरण.  5 - छंद,  6 - ज्योतिष.

प्र.9- वेदों का ज्ञान ईश्वर ने किन किन ऋषियो को दिया ?

उत्तर- वेदों का ज्ञान चार ऋषियों को दिया ।
      वेद                 ऋषि
1- ऋग्वेद        -      अग्नि
2 - यजुर्वेद      -       वायु
3 - सामवेद      -      आदित्य
4 - अथर्ववेद     -     अंगिरा

प्र.10-  वेदों का ज्ञान ईश्वर ने ऋषियों को कैसे दिया ?

उत्तर- वेदों का ज्ञान ऋषियों को समाधि की अवस्था में दिया ।

प्र.11-  वेदों में कैसे ज्ञान है ?

उत्तर-  वेदों मै सब सत्य विद्याओं का ज्ञान-विज्ञान है ।

प्र.12-  वेदो के विषय कौन-कौन से हैं ?

उत्तर-   वेदों के चार विषय है।
       ऋषि        विषय
1-  ऋग्वेद    -    ज्ञान
2-  यजुर्वेद   -    कर्म
3-  सामवेद    -  उपासना
4-  अथर्ववेद -    विज्ञान

प्र.13-  किस वेद में क्या है  ?

     ऋग्वेद में।
1-  मंडल      -  10
2 - अष्टक     -  08
3 - सूक्त     -  1028
4 - अनुवाक  -    85
5 - ऋचाएं   -  10589

  यजुर्वेद में।
1- अध्याय    -  40
2- मंत्र      - 1975

         सामवेद में  ।
1-  आरचिक     -  06
2 - अध्याय     -   06
3-  ऋचाएं       -  1875

       अथर्ववेद में  ।
1- कांड      -    20
2- सूक्त     -   731
3 - मंत्र     -   5977
         
प्र.14- वेद पढ़ने का अधिकार किसको है ?

उत्तर- मनुष्य-मात्र को वेद पढ़ने का अधिकार है।

प्र.15-  क्या वेदों में मूर्तिपूजा का विधान है ?

उत्तर-  वेदों में मूर्ति पूजा का विधान बिलकुल भी नहीं ।

प्र.16-  क्या वेदों में अवतारवाद का प्रमाण है ?

उत्तर- वेदों मै अवतारवाद का प्रमाण नहीं है ।

प्र.17-  सबसे बड़ा वेद कौन-सा है ?

उत्तर-  सबसे बड़ा वेद ऋग्वेद है ।

प्र.18-  वेदों की उत्पत्ति कब हुई ?

उत्तर-  वेदो की उत्पत्ति सृष्टि के आदि से परमात्मा द्वारा हुई । अर्थात 1 अरब 96 करोड़ 8 लाख 43 हजार वर्ष पूर्व ।

प्र.19-  वेद-ज्ञान के सहायक दर्शन-शास्त्र ( उपअंग ) कितने हैं और उनके लेखकों का क्या नाम है ?

उत्तर-
1-  न्याय दर्शन  - गौतम मुनि।
2- वैशेषिक दर्शन  - कणाद मुनि।
3- योगदर्शन  - पतंजलि मुनि।
4- मीमांसा दर्शन  - जैमिनी मुनि।
5- सांख्य दर्शन  - कपिल मुनि।
6- वेदांत दर्शन  - व्यास मुनि।

प्र.20-  शास्त्रों के विषय क्या है ?

उत्तर-  आत्मा,  परमात्मा, प्रकृति, जगत की उत्पत्ति,  मुक्ति अर्थात सब प्रकार का भौतिक व आध्यात्मिक  ज्ञान-विज्ञान आदि।

प्र.21-  प्रामाणिक उपनिषदे कितनी है ?

उत्तर-  प्रामाणिक उपनिषदे केवल ग्यारह है।

प्र.22-  उपनिषदों के नाम बतावे ?

उत्तर- 
1-ईश ( ईशावास्य ),  2- केन, 3-कठ, 4-प्रश्न, 5-मुंडक, 6-मांडू, 7-ऐतरेय, 8-तैत्तिरीय, 9- छांदोग्य, 10-वृहदारण्यक, 11- श्वेताश्वतर ।

प्र.23-  उपनिषदों के विषय कहाँ से लिए गए है ?

उत्तर- उपनिषदों के विषय वेदों से लिए गए है !

प्र.24- चार वर्ण कोन कोन से होते हैं  ?

उत्तर-
1- ब्राह्मण,  2- क्षत्रिय,  3- वैश्य,  4- शूद्र  ।

प्र.25- चार युग कौन-कौन से होते है और कितने वर्षों के ।

 उत्तर- 
1- सतयुग - 17,28000  वर्षों का नाम ( सतयुग ) रखा है।

2- त्रेतायुग- 12,96000  वर्षों का नाम ( त्रेतायुग ) रखा है।

3- द्वापरयुग- 8,64000  वर्षों का नाम है।

4- कलयुग- 4,32000  वर्षों का नाम है।

कलयुग के  4,976  वर्षों का भोग हो चुका है अभी 4,27,024 वर्षों का भोग होना बाकी है।

प्र.  पंच महायज्ञ कोन -कोन से होते है !     
उत्तर-        
       1- ब्रह्मयज्ञ,  2- देवयज्ञ,  3- पितृयज्ञ,  4- बलिवैश्वदेवयज्ञ, 5- अतिथियज्ञ ।

स्वर्ग  -  जहाँ सुख है ।
नरक  -  जहाँ दुःख है ।

नवग्रहों की अशुभता दूर करने के उपाय... 

           सूर्य- सूर्य की अशुभता को दूर करने के लिए किसी शुभ मुहूर्त में बेल की जड़ को खोदकर तत्पश्चात उसे सूर्य मन्त्र से अभिमन्त्रित करके लाल कपड़े में लपेट कर दाहिनी भुजा में बांधने से सूर्य अच्छा फल देने लगता है।

            चन्द्र- चन्द्र को बलवान करने के लिए किसी शुभ मुहूर्त में खिरनी की जड़ खोदकर तत्पश्चात उसे अभिमन्त्रित करके सफेद कपड़े में लपेटकर दिन सोमवार को लाकेट में भरकर गले में धारण करने से चन्द्र अशुभता में कमी आती है।

            मंगल- मंगल ग्रह को मजबूत करने के लिए अनन्तमूल या खेर की जड़ को शुद्ध करके लाल कपड़े में लपेटकर दिन मंगलवार को दाहिने भुजा में बांधने से मंगल ग्रह मजबूत होकर शुभ फल देने लगता है।

            बुध- बुध ग्रह बलवान करने के लिए किसी शुभ मुहूर्त में विधारा की जड़ खोदकर तत्पश्चात उसे शुद्ध करके हरे रंग के धागे में लपेट कर गले में धारण करने से बुध ग्रह से सम्बन्धित अच्छा फल प्राप्त होने लगता है।

            गुरू- गुरू ग्रह को मजबूत करने के लिए किसी अच्छे मुहूर्त में केले की जड़ को खोदकर तत्पश्चात उसे अभिमन्त्रित करके पीले कपड़े में बांधकर दिन गुरूवार को दाहिने भुजा में बाॅधने से गुरू ग्रह की अशुभता में कमी आती है।

            शुक्र- शुक्र ग्रह को स्ट्रांग करने के लिए गूलर की जड़ को शुद्ध करके दिन शुक्रवार किसी लाकेट में डालकर पहनने से शुक्र ग्रह बलवान होकर अच्छे फल देने लगता है।

            शनि- शनि देव को खुश करने के लिए शमी पेड़ की जड़ को किसी अच्छे मूहूर्त में शुद्ध करके नीले कपड़े में बाॅधकर धारण करने से शनि देव कृपा बरसने लगती है।

            राहु- राहु की अच्छी कृपा पाने के लिए सफेद चन्दन का टुकड़ा नीले धागे में बांधने से राहु की अशुभता में आती है और लाभ होने लगता है।

            केतु- केतु की अशुभता दूर करने के लिए अश्वंगधा पेड़ की जड़ को किसी शुभ मुहूर्त में अभिमन्त्रित करके नीले धागे में लपेट कर गले में धारण करने से केतु का शुभ फल मिलने लगता है ।


गुरुवार, 7 जुलाई 2016

इस गुप्त नवरात्री में कीजिये देवी को प्रसन्न


            हिन्दू धर्म में नवरात्र मां दुर्गा की साधना के लिए बेहद महत्त्वपूर्ण माने जाते हैं। नवरात्र के दौरान साधक विभिन्न तंत्र विद्याएं सीखने के लिए मां भगवती की विशेष पूजा करते हैं। तंत्र साधना आदि के लिए गुप्त नवरात्र बेहद विशेष माने जाते हैं। आषाढ़ और माघ मास के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली नवरात्र को गुप्त नवरात्र कहा जाता है। इस नवरात्रि के बारे में बहुत ही कम लोगों को जानकारी होती है।

            शिवपुराण के अनुसार पूर्वकाल में राक्षस दुर्ग ने ब्रह्मा को तप से प्रसन्न कर चारों वेद प्राप्त कर लिए। तब वह उपद्रव करने लगा। वेदों के नष्ट हो जाने से देव-ब्राह्मण पथ भ्रष्ट हो गए, जिससे पृथ्वी पर वर्षों तक अनावृष्टि रही।पृथ्वी पर रूद्र, वरुण, यम आदि का प्रकोप बढ़ने लगता है। इन विपत्तियों से बचाव के लिए गुप्त नवरात्र में मां दुर्गा की उपासना की जाती है ।

            सतयुग में चैत्र नवरात्र, त्रेता में आषाढ़ नवरात्र, द्वापर में माघ, कलयुग में आश्विन की साधना-उपासना का विशेष महत्व रहता है। मार्कंडेय पुराण में इन चारों नवरात्रों में शक्ति के साथ-साथ इष्ट की आराधना का भी विशेष महत्व है । 

            देवताओं ने मां पराम्बा की शरण में जाकर दुर्ग का वध करने का निवेदन किया। मां ने अपने शरीर से काली, तारा, छिन्नमस्ता, श्रीविद्या, भुवनेश्वरी, भैरवी, बगला, धूमावती, त्रिपुरसुंदरी और मातंगी नाम वाली दस महाविद्याओं को प्रकट कर दुर्ग का वध किया। दस महाविद्याओं की साधना के लिए तभी से गुप्त नवरात्र मनाया जाने लगा।

            गुप्त नवरात्रि विशेष तौर पर गुप्त सिद्धियां पाने का समय है साधक इन दोनों गुप्त नवरात्रि (माघ तथा आषाढ़) में विशेष साधना करते हैं तथा चमत्कारिक शक्तियां प्राप्त करते हैं ।

            "ॐ जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी ।

        दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु ते “सर्वाबाधाविनिर्मुक्तो धनधान्यसुतान्वित: ।

            मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशय: ॥”

           इस नवरात्र में देवी साधक और भक्त--- 'ऊं ऐं हीं क्लीं चामुण्डाये विच्चे नम:' मंत्र जाप करें।

             मां काली के उपासक---- 'ऊं ऐं महाकालाये नम:' मंत्र का जाप करें।

            व्यापारी लोग----'ऊं हीं महालक्ष्मये नम:' मंत्र का जाप करें।

            विद्यार्थी---- 'ऊं क्लीं महासरस्वतये नम:' मंत्र जपें।
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गुप्त नवरात्र 2016

            आषाढ़ नवरात्र गुप्त नवरात्रों के नाम से भी जाने जाते हैं. आषाढ़ महीने यानी जून और जुलाई  माह में पड़ने के कारण इन नवरात्रों को आषाढ़ नवरात्र कहा जाता है, हालाँकि देश के अधिकतर भाग में गुप्त नवरात्रों के बारे में लोग नहीं जानते हैं. उत्तरी भारत जैसे हिमाचल प्रदेश, पंजाब , हरयाणा, उत्तराखंड के आस पास के प्रदेशों में गुप्त नवरात्रों  में माँ भगवती की पूजा की जाती है. माँ भगवती  के सभी 9 रूपों की पूजा नवरात्रों के भिन्न – भिन्न दिन की जाती है , अतः आइये देखते हैं  इन दिनों में किस देवी की पूजा  कब की जानी चाहिए---

            5 जुलाई (मंगलवार) 2016 : घट स्थापन एवं माँ शैलपुत्री पूजा

            6 जुलाई (बुधवार) 2016 : माँ ब्रह्मचारिणी पूजा

            7 जुलाई (बृहस्पतिवार) 2016 : माँ चंद्रघंटा पूजा

            8 जुलाई (शुक्रवार) 2016: माँ कुष्मांडा पूजा

            9 जुलाई (शनिवार) 2016: माँ स्कंदमाता पूजा

            10 जुलाई (रविवार)  2016: : माँ कात्यायनी पूजा

            11 जुलाई (सोमवार)  2016:  माँ कालरात्रि पूजा

            12 जुलाई(मंगलवार) 2016 : माँ महागौरी पूजा, दुर्गा अष्टमी

            13 जुलाई (बुधवार) 2016 : माँ सिद्धिदात्री

            14 जुलाई (बृहस्पतिवार)  2016: नवरात्री पारण
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गुप्त नवरात्र पूजा विधि---

            मान्यतानुसार गुप्त नवरात्र के दौरान अन्य नवरात्रों की तरह ही पूजा करनी चाहिए। नौ दिनों के उपवास का संकल्प लेते हुए प्रतिप्रदा यानि पहले दिन घटस्थापना करनी चाहिए। घटस्थापना के बाद प्रतिदिन सुबह और शाम के समय मां दुर्गा की पूजा करनी चाहिए। अष्टमी या नवमी के दिन कन्या पूजन के साथ नवरात्र व्रत का उद्यापन करना चाहिए।

गुप्त नवरात्री में सिद्धि के लिए गुप्त स्थान या सिद्ध श्मशान-
            यह साधनाएं बहुत ही गुप्त स्थान पर या किसी सिद्ध श्मशान में की जाती है । दुनियां में सिर्फ चार श्मशान घाट ही ऐसे हैं जहां तंत्र क्रियाओं का परिणाम बहुत जल्दी मिलता है। ये हैं तारापीठ का श्मशान (पश्चिम बंगाल), कामाख्या पीठ (असम) का श्मशान, त्रयंबकेश्वर (नासिक) और उज्जैन स्थित विक्रांत भैरव या चक्रतीर्थ श्मशान ।

            गुप्त नवरात्रि में यहां दूर-दूर से साधक गुप्त साधनाएं करने आते हैं। नवरात्रों में लोग अपनी आध्यात्मिक और मानसिक शक्तियों में वृद्धि करने के लिए अनेक प्रकार के उपवास, संयम, नियम, भजन, पूजन योग साधना आदि करते हैं।
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गुप्त नवरात्रि का महत्त्व ---

            देवी भागवत के अनुसार जिस तरह वर्ष में चार बार नवरात्र आते हैं और जिस प्रकार नवरात्रि में देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है, ठीक उसी प्रकार गुप्त नवरात्र में दस महाविद्याओं की साधना की जाती है । कहा जाता है कि मां के नौ रूपों की भक्ति करने से हर मनोकामना पूरी होती है। नौ शक्तियों के मिलन को ही नवरात्रि कहते हैं। देवी पुराण के अनुसार एक वर्ष में 4 माह नवरात्रि के लिए निश्चित हैं।

            मानव के समस्त रोग-दोष व कष्टों के निवारण के लिए गुप्त नवरात्र से बढ़कर कोई साधनाकाल नहीं हैं। श्री, वर्चस्व, आयु, आरोग्य और धन प्राप्ति के साथ ही शत्रु संहार के लिए गुप्त नवरात्र में अनेक प्रकार के अनुष्ठान व व्रत-उपवास के विधान शास्त्रों में मिलते हैं। इन अनुष्ठानों के प्रभाव से मानव को सहज ही सुख व अक्षय ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। ‘दुर्गावरिवस्या’ नामक ग्रंथ में स्पष्ट लिखा है कि साल में दो बार आने वाले गुप्त नवरात्रों में माघ में पड़ने वाले गुप्त नवरात्र मानव को न केवल आध्यात्मिक बल ही प्रदान करते हैं, बल्कि इन दिनों में संयम-नियम व श्रद्धा के साथ माता दुर्गा की उपासना करने वाले व्यक्ति को अनेक सुख व साम्राज्य भी प्राप्त होते हैं। ‘शिवसंहिता’ के अनुसार ये नवरात्र भगवान शंकर और आदिशक्ति मां पार्वती की उपासना के लिए भी श्रेष्ठ हैं। गुप्त नवरात्रों के साधनाकाल में मां शक्ति का जप, तप, ध्यान करने से जीवन में आ रही सभी बाधाएं नष्ट होने लगती हैं।

            गुप्त नवरात्रि विशेषकर तांत्रिक क्रियाएं, शक्ति साधना, महाकाल आदि से जुड़े लोगों के लिए विशेष महत्त्व रखती है। इस दौरान देवी भगवती के साधक बेहद कड़े नियम के साथ व्रत और साधना करते हैं। इस दौरान लोग लंबी साधना कर दुर्लभ शक्तियों की प्राप्ति करने का प्रयास करते हैं।गुप्त नवरात्र में दशमहाविद्याओं की साधना कर ऋषि विश्वामित्र अद्भुत शक्तियों के स्वामी बन गए। उनकी सिद्धियों की प्रबलता का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने एक नई सृष्टि की रचना तक कर डाली थी। इसी तरह, लंकापति रावण के पुत्र मेघनाद ने अतुलनीय शक्तियां प्राप्त करने के लिए गुप्त नवरात्रों में साधना की थी। शुक्राचार्य ने मेघनाद को परामर्श दिया था कि गुप्त नवरात्रों में अपनी कुलदेवी निकुम्बाला की साधना करके वह अजेय बनाने वाली शक्तियों का स्वामी बन सकता है ||

            गुप्त व चमत्कारिक शक्तियां प्राप्त करने का यह श्रेष्ठ अवसर होता है। धार्मिक दृष्टि से हम सभी जानते हैं कि नवरात्र देवी स्मरण से शक्ति साधना की शुभ घड़ी है। दरअसल, इस शक्ति साधना के पीछे छुपा व्यावहारिक पक्ष यह है कि नवरात्र का समय मौसम के बदलाव का होता है। आयुर्वेद के मुताबिक इस बदलाव से जहां शरीर में वात, पित्त, कफ में दोष पैदा होते हैं, वहीं बाहरी वातावरण में रोगाणु। जो अनेक बीमारियों का कारण बनते हैं। सुखी-स्वस्थ जीवन के लिये इनसे बचाव बहुत जरूरी है।  नवरात्र के विशेष काल में देवी उपासना के माध्यम से खान-पान, रहन-सहन और देव स्मरण में अपनाने गए संयम और अनुशासन तन व मन को शक्ति और ऊर्जा देते हैं। जिससे इंसान निरोगी होकर लंबी आयु और सुख प्राप्त करता है। धर्म ग्रंथों के अनुसार गुप्त नवरात्र में प्रमुख रूप से भगवान शंकर व देवी शक्ति की आराधना की जाती है। देवी दुर्गा शक्ति का साक्षात स्वरूप है। दुर्गा शक्ति में दमन का भाव भी जुड़ा है। यह दमन या अंत होता है शत्रु रूपी दुर्गुण, दुर्जनता, दोष, रोग या विकारों का। ये सभी जीवन में अड़चनें पैदा कर सुख-चैन छीन लेते हैं। यही कारण है कि देवी दुर्गा के कुछ खास और शक्तिशाली मंत्रों का देवी उपासना के विशेष काल में जाप शत्रु, रोग, दरिद्रता रूपी भय बाधा का नाश करने वाला माना गया है।  सभी’नवरात्र’ शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से लेकर नवमी तक किए जाने वाले पूजन, जाप और उपवास का प्रतीक है- ‘नव शक्ति समायुक्तां नवरात्रं तदुच्यते’। देवी पुराण के अनुसार एक वर्ष में चार माह नवरात्र के लिए निश्चित हैं। नवरात्र के नौ दिनों तक समूचा परिवेश श्रद्धा व भक्ति, संगीत के रंग से सराबोर हो उठता है। धार्मिक आस्था के साथ नवरात्र भक्तों को एकता, सौहार्द, भाईचारे के सूत्र में बांधकर उनमें सद्भावना पैदा करता है।

गुप्त नवरात्रि की प्रमुख देवियां---

            गुप्त नवरात्र के दौरान कई साधक महाविद्या (तंत्र साधना) के लिए मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, माता छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, मां ध्रूमावती, माता बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी की पूजा करते हैं ।


बुधवार, 6 जुलाई 2016

कैसे विकास हो उस देश का ..?


            जहां डेढ लाख सैलरी हर महीना पाने वाले सांसदो की सैलरी Income Tax Free ... और 24 घंटे मौत की छांव मे रहने वाले सिपाही को बीस हजार सैलरी पर भी Income Tax देना पडता हो ।

            सांसदो को परिवार के साथ रहते हुए भी हर साल पचास हजार Phone Call Free .... और घर सें हजारों km दूर बैठे सैनिक को एक Call भी Free नहीं ? 

            एक सांसद को फर्नीचर के लिए 75000 हजार रु और बार्डर पर सैनिक को ड्यूटी के दौरान बारिस से बचने के लिए टूटी हुई छप्पर !
            
            सांसद को हर साल 34 हवाई टिकट मुफ्त और सैनिक को ड्यूटी पर जाते हुए भी अपने पैसे से टिकट लेता हो ?

            सांसद को वाहन के लिए 400000/-  का intetest Free लोन और एक सैनिक को घर के लिए लोन भी 12% की दर से मिलता हो ?

            और ये सब वहां हो रहा है जहां पूरा देश इस सैनिक की वजह सें अपने परिवार के साथ चैन सें सोता है ..!

            एक बेटी ने अपनी मां से पूछा-

           मां रेडियो पे सुना ईंडिया जीत गई ..! जो खेल रहे थे उन्हें एक करोड़ रु. मिले.

            मां बोली–  हाँ बेटी ..! सरकार कहती है वो देश के लिए खेल रहे थे इसलिए।

            बेटी आसमान में हेलीकॉप्टर से लटकते जवान को देख के बोली- मां क्या इन्हे भी मिलेगा एक करोड़ ..?

            मां बोली – ना बेटी ना ..?  हमारे यहां बल्ले से खेलने वाले को ईनाम मिलता है ..!  जान से खेलने वाले को नही  ! 

            उपरोक्त विचार यदि हृदय को स्पर्श करे तो निवेदन है कि इसे आगे भी अग्रेषित करें ।

जाने क्यूं  ?

"जाने क्यूं अब शर्म से, चेहरे गुलाब नही होते,
जाने क्यूं अब मस्त मौला मिजाज नही होते ।

पहले बता दिया करते थे, दिल की बातें,
जाने क्यूं  अब चेहरे, खुली किताब नही होते ।

सुना है बिन कहे दिल की बात समझ लेते थे,
गले लगते ही दोस्त हालात समझ लेते थे ।

तब ना स्मार्टफोन, ना
फेसबुक/ट्विटर अकाउंट था,
एक चिट्टी से ही लोग, दिलों के जज्बात समझ लेते थे ।


सोचता हूं हम कहां से कहां आ गये,
प्रेक्टीकली सोचते-सोचते, भावनाओं को खा गये ।

अब भाई भाई से समस्या का समाधान कहां पूछता है,
अब बेटा बाप से उलझनों का निदान कहां पूछता है ।

बेटी नही पूछती, मां से गृहस्थी के सलीके,
अब कौन गुरु के चरणों में बैठकर, ज्ञान की परिभाषा सीखता है ।

परियों की बातें, अब किसे भाती है,
अपनो की याद भला अब किसे रुलाती हैं ।

अब कौन गरीब को सखा बताता है
अब कहां सुदामा को कृष्ण गले लगाता है ।

जिन्दगी मे अब हम प्रेक्टिकल हो गये है.
मशीन बन गये है सब, इंसान जाने कहां खो गये है !


सोर्स : WhatsApp.
 
 

शनिवार, 2 जुलाई 2016

विचित्र विशेष :

            गुजरात के सूरत शहर मे एक रेस्टोरेंट ने 1500/- की थाली लांच की है । इसका नाम है बकासूर थाली...



            और इस बकासूर थाली मे 100 प्रकार के आइटम हैं, जिनमे 55 प्रकार की शाकाहारी सब्जियां और 21 प्रकार की मिठाइयां शामिल है ।

            अब सरप्राइज ये है कि अगर कोई व्यक्ति इस बकासूर थाली के पूरे आइटम खा लेगा तो उसे रेंस्टोरेट की तरफ से 1 लाख रु. इनाम भी दिया जायेगा ।

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हिमालय  में खिला "नागपुष्प"

 

            बरसो बाद दिखाई दिया.... ये पुष्प शेषनाग की तरह दीखता है जो करीब 36 सालो में एक बार ही देखा जा सकता है ।
 
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केरल के कॉलेज मे जीन्स बैन करने के बाद... 



लडकियां लूँगी पहन कर आ गई, अब प्रशाशन पशोपेश में.

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            एक दिन दादी घर पर बैठीं थीं । तभी फोन की घण्टी बजी । फोन से बात करके दादी बहुत खुश हुईं क्योंकि पोते एवं पोती दादी से मिलने आ रहे थे । 
            दादी खुशी में झूम उठीं और बोली-  'हां, तुम लोग आ रहे हो तो ढेर सारी बातें करेंगे । और हां, मैं नाती को भी फोन करके बुला लेती हूँ। सब मिलकर खूब बातें करेंगे,  मजे करेंगे ।
            फिर सब लोग दादी से मिलने सैकड़ों किलोमीटर की दूरी तय कर पहुंचे । आगे क्या होता है ? इसके लिए नीचे का फोटो देखिये-
  

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और ये हैं पर्यावरण पुरस्कार के...



असली हकदार...!
 

पुकार...


            एक कंस्ट्रक्शन साईड पर चलते काम में 6ठे माले पर मौजूद इंजीनियर ने सडक पर काम कर रहे एक कर्मचारी को आवाज दी जो काम के शोर के कारण नीचे मौजूद उस कर्मी ने नहीं सुनी । इंजीनियर ने उसे फिर आवाज दी, उसने फिर भी नहीं सुनी । इंजीनियर ने उसका ध्यान आकर्षित करवाने हेतु 10/- रु. का सिक्का नीचे उस कर्मचारी के पास फेंका जो ठीक उसके बगल में जाकर गिरा । नीचे मौजूद कर्मचारी ने उपर देखें बगैर वो सिक्का उठाकर अपनी जेब में डाल लिया और फिर अपने काम में लग गया । इस बार उपर मौजूद उस इंजिनीयर ने 500/- रु. का नोट उसके उपर छोटी सी घडी बनाकर फेंका, वह नोट भी उस कर्मचारी के बगल में जाकर ही गिरा । नीचे मौजूद उस कर्मचारी ने फिर उपर देखें बगैर वो नोट उठाकर अपनी जेब में डाला और फिर अपने काम में लग गया ।  अंततः उपर मौजूद इंजीनियर ने एक छोटा पत्थर उठाकर उस कर्मचारी पर फेंका जो उसके सर में जाकर लगा और तब उस नीचे मौजूद कर्मचारी की निगाहें उपर की ओर उठी । 

            वास्तविक जिंदगी में उपर मौजूद वह इंजीनियर ईश्वर है और नीचे मौजूद कर्मचारी हम स्वयं हैं । हम भी ईश्वर से प्राप्त समस्त नेमतें अपना अधिकार मानते हुए ग्रहण करते चले जाते हैं, किंतु ईश्वर को याद अथवा उनका शुक्रिया अदा नहीं करते । फिर जब वो हमें तकलीफरुपी पत्थर मारकर हमें जगाता है तब हम तत्काल उसकी ओर देखते हुए उनसे समस्या मुक्ति का मार्ग उपलब्ध करवाने हेतु मन्नत, निवेदन व नाना प्रकार के उपाय करने लगते हैं ।

             क्या यह उचित नहीं माना जाना चाहिये कि जब-जब भी किसी भी प्रकार की छोटी या बडी नेमतें प्राप्त हों चाहें वो हमें अपने काम का वास्तविक प्रतिसाद ही क्यों न लगता रहा हो, हम कुछ समय रुककर अपने उस ईश्वर का शुक्रिया अदा करें और फिर दुगने-जोशो-खरोश से अगली उपलब्धियों के लिये प्रयासरत हो जावें । सयाने और समझदार लोग तो सुबह उठते ही सबसे पहले ईश्वर को इसी लिये इस बात पर भी धन्यवाद देते हैं कि अपने जीवनकाल में ईश्वरकृपा से उन्हें एक और नया सूर्योदय देखने को मिल रहा है ।


            संकट में याद करने वालों से तो देश व दुनिया के अधिकांश मंदिर बीसीयों घंटे भीड से खचाखच भरे दिखते ही रहते हैं किंतु संकटकाल के बगैर भी यदि ईश्वर को याद करते रहने और उनका धन्यवाद अर्पित करते रहने का सिलसिला निर्बाध क्रम से हम जारी रख सकें तो हो सकता है कि विपत्तियों के बडे चक्र में फंसने की स्थिति ही कभी ना बनने पावे ।

            शायद इसी बात को संत कबीरदासजी ने यूं परिभाषित किया है-

दुःख में सुमिरन सब करें, सुख में करे न कोय,
जो सुख में सुमिरन करें तो दुःख काहे को होय ।
 

बुधवार, 29 जून 2016

एक वरदान - मोटापा.


            गर्व से कहो हम मोटे हैं ! क्रिकेट के बाद मोटापा ही एक ऐसी चीज़ हैं जिस पर कोई भी आम भारतीय विशेषज्ञ की तरह राय दे सकता है । दरअसल मोटापा वो तत्व हैं जिसे देखते ही सामने वाले के भीतर बैठा डॉक्टर जाग उठता हैं और तत्काल वो गिरीशचंद्र से रायचंद्र बन जाता हैं । खुद को भले ही चकुंदर और शलगम में अंतर तक ना पता हो लेकिन आपको खाने पीने की ऐसी ऐसी सलाहें परोसता हैं मानो भाई साब झूलेलाल किराना स्टोर के मालिक नहीं कोई जिम ट्रेनर हों ।

            कभी कभी लगता है बाल गंगाधर तिलक गलत थे 'जो स्वराज हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है' जैसा नारा दे गए... नारा होना चाहिए था दुसरो के फट्टे में टांग डालना हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है ।

            माँ द्वारा घी में चुपड़ी गयी बेहिसाब रोटियां, लल्ला हलवाई के नियमित रूप से समोसे व मसाला आलू, बाज़ार में मिलने वाले एक से एक स्वादिष्ट जंक फ़ूड, रोज़ाना 14 घंटे की प्यारी नींद और ना जाने कितने बेहिसाब परिश्रम के बाद इतनी प्यारी तोंद मिलती है । अब इसका सुख वो लोग क्या जाने जो आज भी 28 कमर वाली जीन्स में ही अटके हुए है । तोंद हमें मिलती है अपने परिश्रम व लगन के बलबूते पर, किंतु इसे देख सामने वाला ऐसे जल उठता है मानो आपने उसके हिस्से का छीन कर खाया हो ।

            भैया मोटापे के भी अनेक फायदे है । आप अपनी बीवी के साथ निकलो किसी की मज़ाल नहीं कि बीवी को छेड़ सके । आप पति कम बॉडीगार्ड ज्यादा नज़र आते है । बीवी मोटी हो तो डर नहीं सताता कि उसका कही अफेयर होगा । 

            आप मोटे हो तो आपको ये बताने की जरुरत नहीं कि आपकी सैलेरी अच्छी है और आप खाते पीते घर से हो । बेफिक्र होकर आप रक्तदान कर सकते हैं, साथ ही आपके शरीर में इतना खून होता है कि आप मच्छरों को भी भोजन करा सकते हैं जो कि पतले लोगो के बस का नहीं । वो तो 4 मच्छर को खून पिलाये तो उन्हें 2 बोतल खून चढ़ाना पड़ जाएगा...

            पतले लोग मोटे लोगो पर तंज तो यूँ कसते है मानो धरती की आधी समस्यायों के लिए हम ही जिम्मेदार है। भाई मेरे, तुमने पतले होकर क्या तीर मार लिया... कौन सा ओबामा तुम्हारे साथ बैठ कर तीन पत्ती खेलता है।

            आप ही बताइये किस क्षेत्र में मोटे लोग नहीं हैं  ?  क्या हनी सिंह  - नुसरत फ़तेह अली खान से अच्छा गायक है 
?  क्या शिखर धवन - सनथ जयसूर्या से अच्छे बल्लेबाज़ है  क्या अनिल अम्बानी - मुकेश अम्बानी से ज्यादा अमीर है  क्या मिथुन दा - गणेश आचार्य से अच्छे डांसर हैं...बोलिये  ?

            अपने मोटापे पर शर्म नहीं गर्व कीजिये - हमारे कारण ही बाबा रामदेव ने नाम कमाया है । लोग मोटे ना होते तो वो योग किसे सिखाते...क्या राजपाल यादव को ? हम जैसे मोटे लोगों के कारण ही कितने डॉक्टर व जिम वालों की रोज़ी रोटी चल रही है । माना हम तेज़ दौड़ नहीं सकते पर तेज़ दौड़ के हमें कौन सा काला धन लाना है । मोटापा आपको अच्छी व गहरी नींद देता है । बढ़ता मोटापा आपको हर महीने नए कपडे खरीदने का मौक़ा भी देता है । 

            अत: मोटापा श्राप नहीं वरदान है । तोंद शर्म नहीं ईश्वरीय प्रसाद है । शर्माइये मत...!  गर्व से कहिये हम मोटे हैं......!              
 

शनिवार, 25 जून 2016

गौरवशाली इन्दौर...



            भारत के नक्शे पर कई शहर अपनी विशेष पहचान के कारण ही जाने जाते हैं, उन्हीं में यदि रानी अहिल्याबाई व सर सेठ हुकमचंद जैसी ऐतिहासिक शख्सियतों से जुडे इन्दौर शहर की बात की जावे तो चाहे यह शहर बम्बई, दिल्ली, कलकत्ता, मद्रास जैसे देश के महानगरों सा आकार नहीं रखता हो किंतु इसकी ऐतिहासिकता के साथ ही ऐसी अनेक विशेषतायें इस शहर के साथ शुरु से जुडी रही हैं जो इसे देश के नक्शे में एक विशिष्ट स्थान दिलवाते हुए इसकी पहचान को हमेशा से एक विशेष दर्जा सदैव दिलवाती रही हैं । 

            देश के सात राज्यों से सीधे जुडे मध्यप्रदेश के भी लगभग मध्य में राज्य की औद्योगिक व व्यापारिक राजधानी का दर्जा रखने के कारण अन्य प्रांतों से आकर बसने वाली आबादी का सर्वोच्च भार वहन करने वाले इस शहर की खासियतों का यदि जिक्र करना प्रारम्भ किया जावे तो वास्तव में लेख की लम्बाई तो बढती ही चली जाएगी किंतु यहाँ की विशेष पहचान के क्रम समाप्त होते नहीं दिखेंगे । फिर भी इस क्रम में यह जानने की कोशिश करते हैं कि वे कौन-कौनसी प्रमुख विशेषताएँ हैं जो इस शहर को इसकी खासियतों के आधार पर इसे अन्यों से कुछ अलग दिखला सकने का कारण बनती हैं-

            महान क्रिकेट खिलाड़ी सुनील गावस्कर ने अपने वनडे करियर की एकमात्र सेंचुरी इंदौर के नेहरू स्टेडियम में लगाई ।

            इन्दौर स्थित सैन्य छावनी MHOW (Military Headquarters Of War) देश की मुख्य सैन्य छावनियों में शामिल है ।

            जानकारी के अनुसार इन्दौर का नामकरण इन्द्रेश्वर मंदिर के नाम पर हुआ था, शुरूआत में यह "इन्दूर" था,जो आगे चलकर "इन्दौर" कहलाया ।

            इन्दौर देश का एकमात्र शहर है जहाँ पर IIM एवं IIT दोनों है ।
 
           इन्दौर में एशिया की सबसे बड़ी रिहायशी कॉलोनी सुदामा नगर है ।

            देश के पहले निजी रेडियो चैनल "रेडियो मिर्ची" ने अपने प्रसारण की शुरुआत इन्दौर से की थी ।

            स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर, फिल्म स्टार सलमान खान, क्रिकेट खिलाड़ी राहुल द्रविड़ और परम पूज्यनीय योग गुरु श्री मनीष शर्मा की जन्मभूमि भी इन्दौर है ।

            पूर्व में इन्दौर को  "म.प्र.का डेट्रॉयट"  नाम से नवाजा जा चुका है ।

         इंदौर देश का एकमात्र ऐसा शहर है जहां 100 कि.मी. की रेंज में दो ज्योतिर्लिंग हैं-  1. ओंकारेश्वर  और  2. महाकालेश्वर ।

            इन्दौर स्थित आर आर कैट देश की मुख्य प्रयोगशालाओं में एक है । यहां एक्सलरेटर, क्रायोजेनिक्स सहित कई महत्वपूर्ण शोध हो रहे हैं ।

            टेस्ट क्रिकेट में एक टेस्ट में   सर्वाधिक विकेट लेने का  कीर्तिमान इंदौर के नरेन्द्र हिरवानी और बाब मैसी (आस्ट्रेलिया) के नाम पर संयुक्त रूप से दर्ज है । 
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            किसी महिला प्रत्याशी द्वारा एक ही लोकसभा सीट से एक ही पार्टी के टिकट पर सर्वाधिक बार चुनाव जीतने का कीर्तिमान इन्दौर की सांसद और वर्तमान लोकसभा अध्यक्ष श्रीमती सुमित्रा महाजन के नाम पर दर्ज ।

            विकास के शुरुआती वर्षों में इन्दौर "कपड़ा मिलों का शहर" के नाम से प्रसिद्ध था लेकिन अब ये सभी मिलें बंद हो चुकी है ।

            इन्दौर स्वाद के शौकीनों का शहर है । इसे "स्वाद की राजधानी" के रूप मे जाना जाता है ।

            यहाँ पर एशिया के सबसे बड़े गणपति विराजमान हैं (बड़ा गणपति)

            यहाँ पर संपूर्ण कांच से निर्मित मंदिर है । जहां पर छत, दिवार से लेकर फर्श भी कांच की है और ये सारे कांच  विदेशों से मंगाए गए थे ।

            यहीं पर ही वीरेंद्र सहवाग ने 200 रन बनाये थे ।

            यहीं के एक विधायक के नाम सबसे ज्यादा मतों से जितने का रिकार्ड है ।

            यहीं की एक बेटी पलक मुछाल ने गाने गाकर सबसे ज्यादा हार्ट सर्जरी करवाई और यह क्रम अभी तक भी सतत जारी है ।

            यहीं का एक ट्रैफिक पुलिस आज दुनिया का सबसे पसंदीदा ट्रैफिक पुलिस है । जिसे काम करते सभी देखना चाहते है । रणजीत सिंह ।

            यहाँ पर स्थित दवा बाजार एशिया का सबसे बड़ा दवा बाजार है ।

            यहीं पर एक ऐसा पर्वत है जहां पर पितरों की याद में पोधे लगाये जाते है । पितृ पर्वत ।

            यही वो शहर है जहां मूक बधिरों की सेवा के लिए सबसे अच्छा स्कूल और ट्रेनिग कैंप है ।

            यही वो शहर है जहाँ के एक व्यापारी सर सेठ हुकुमचंदजी (कॉटन किंग) की तस्वीर आज भी लंदन कॉटन एक्सचेंज में मुख्य द्वार पर लगी है ।


            यहीं पर सर सेठ हुकुम चंद जी द्वारा स्वर्ण से निर्मित रथ है जो दुनिया में कही नहीं है और वो केवल महावीर जयंती पर ही निकलता है ।

            मोबाईल कंपनी एयर टेल ने अपनी मोबाइल सेवा की शुरुवात  सर्व प्रथम इंदौर से ही की थी ।
 

            अनंत चतुर्दशी पर रात भर चलने वाले विशाल चल समारोह और रंगपंचमी पर दिन भर रंगों से सरोबार हुडदंगीयों की विशाल सामूहिक गेर जिनके फिल्मांकन के लिये राजश्री प्रॉडक्शन जैसी नामी-गिरामी फिल्म प्रोड्यूसर संस्थाएँ विशेष आयोजन रखती हैं वह भी इसी इन्दौर शहर की विशिष्ट पहचान रही है ।





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