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रविवार, 6 अक्टूबर 2019

समस्या और समाधान...


      एक युवती ने अपने मनपसंद युवक से शादी की किंतु कुछ समय बाद रिश्तों में ऐसी उलझने आने लगी कि निबाह मुश्किल होता चला गया । दोनों ने आपसी समझ-बूझ से तलाक ले लिया । कुछ समय बाद युवती ने पुनः एक युवक का इस समझदारी से चुनाव करने का प्रयास किया कि पहले वाले युवक जैसी समस्या उस युवक के साथ आगे चलकर नहीं आ पाये । संयोगवश उसे ऐसा युवक मिल भी गया और उन दोनों ने शादी कर ली । किंतु यह क्या ? कुछ समय पश्चात् यहाँ कुछ अन्य समस्याएँ इस प्रकार की आने लगीं जो पिछली शादी से भी अधिक कष्टदायी लगने लगी और यह सम्बन्ध भी आगे नहीं चल पाया ।

           फिर एक नया सम्बन्ध फिर कुछ नई समस्याएँ... सम्बन्ध टूटते रहे और नये साथी की तलाश व उससे जुडाव का सिलसिला चलता चला गया । एक-एक कर वह युवती सात बार अलग-अलग युवकों से शादी कर चुकी किंतु निबाह किसी एक के साथ भी नहीं कर पाई । अंततः उसने अपने किसी परिचित बुजुर्ग से इस समस्या का कारण समझने का प्रयास किया । उस बुजुर्ग ने उस युवती से पूछा कि तुमने सात बार शादियां की और हर शादी नाकाम रही तो तुम यह बताओ कि हर बार लडके का चुनाव किसने किया ? जी मैंने ही किया. लडकी ने जवाब दिया ।

       ठीक है अबकी बार तुम शादी अवश्य करो किंतु लडके का चुनाव तुम स्वयं मत करो बल्कि किसी ऐसे व्यक्ति से यह चुनाव करवाओ जिसे तुम अपना सच्चा शुभचिंतक मानती हो । उस युवती ने उन बुजुर्ग की सलाह का पालन किया और अपने किसी अनुभवी शुभचिंतक परिजन से अपने लिये लडका चुनने का अनुरोध किया । उन्होंने उस युवती के लिये कुछ लडकों को देखने-परखने के बाद एक युवक को उस युवती के लिये चयनित किया जिसे उस युवती ने स्वीकार भी किया । उन युवक-युवती की शादी भी हो गई और रोजमर्रा के जीवन की वे छोटी-मोटी सामान्य समस्याएँ जो प्रायः हर किसीके जीवन में आती रहती हैं और जिनसे निपटते चलते जिंदगी का क्रम चलता रहता है से बडी कोई ऐसी समस्या उस युवती के जीवन में फिर महसूस नहीं हुई जिससे कि उस सम्बन्ध के साथ जिंदगी का सामान्य क्रम आगे चलते रहने में कोई विशेष कठिनाई महसूस हुई हो और निबाह असंभव सा लगने लगा हो । कहने कि आवश्यकता ही नहीं है कि उसके बाद उस युवती को तलाक या नई शादी के पेचिदगी में नहीं उलझना पडा ।

सुख की तलाश...!

ऐ सुख तू कहाँ मिलता है, क्या तेरा कोई स्थायी पता है,
क्यों बना बैठा है अन्जाना, आखिर कहाँ है तेरा ठिकाना ?

कहाँ-कहाँ ढूंढा तुझको, पर तू न मिला कहीं मुझको,
ढूंढता रहा ऊंचे मकानों में, बडे-बडे शोरुम व दुकानों में,
स्वादिष्ट मीठे पकवानों में, चोटी के बडे धनवानों में,
वो भी तुझको ढूंढ रहे थे, बल्कि मुझसे ही पूछ रहे थे ।

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क्या आपको कुछ पता है, आखिर ये सुख रहता कहाँ है,
मेरे पास तो दुःख का पता है, जो सुबह-शाम मिलता रहता था ।
परेशान होकर रपट लिखवाई, पर ये कोशिश भी काम न आई,
उम्र अब  ढलान पर है, हौसले भी  थकान पर हैं ।

हाँ उसकी तस्वीर है मेरे पास, बची हुई है अब भी आस,
मैं भी हार नहीं मानूंगा, सुख के रहस्य को अवश्य जानूंगा ।
बचपन में मिला करता था, संग मेरे रहा करता था,
पर जबसे बडा मैं हो गया, सुख मुझसे जुदा हो गया ।

मैं फिर भी नहीं हुआ हताश, जारी रखी उसकी तलाश,
एक दिन जब आवाज ये आई, क्या मुझको ढूंढ रहा है भाई ।
मैं तेरे अन्दर छुपा हुआ हूँ, तेरे ही घर में बसा हुआ हूँ,
मेरा नहीं है कुछ भी मोल, सिक्कों में न मुझको तोल ।

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मैं बच्चों की मुस्कानों में हूँ, संगीत की मधुर तानों में हूँ,
पत्नी के साथ चाय पीने में, परिवार के संग जीने में ।
माँ-बाप के आशीर्वाद में, रसोई घर के महाप्रसाद में,
बच्चों की सफलता में हूँ, माँ की निश्छल ममता में हूँ ।

हर पल तेरे संग रहता हूँ और अक्सर ही तुझसे कहता हूँ,
मैं तो हूँ बस एक एहसास, बंद करदे तू मेरी तलाश,
मिले उसी में कर संतोष, आज को जी, कल की कल सोच,

कल के लिये आज को न खो, मेरे लिये कभी दुःखी न हो 

शुक्रवार, 27 सितंबर 2019

सदा-सर्वदा पवित्र {व्यंग}

                 
          एक पण्डितजी एक दिन शास्त्राथ की जिद में  अपने बच्चे से उलझ गये । बच्चे ने भी एक प्रश्न दाग दिया कि अच्छा बताओ- "वो कौन सी वस्तु है, जो कभी अपवित्र नहीं होती......?"

          पण्डितजी उत्तर तलाशते पसीने-पसीने हो गये, मगर बच्चे के प्रश्न का जवाब नहीं दे पाये । आखिर हार मान कर बोले, चल तू ही बता ।

          बच्चे ने कहा कि कभी न अपवित्र होने वाली वस्तु  है,  टैन्ट हाउस के गद्दे, जिसे......हिन्दू,-मुसलमान से ले कर पण्डित, मौलवी,  हरिजन, कुम्हार , डोम और बाल्मीकि सभी धर्म के लोग इस्तेमाल करते हैं ।

         ये गद्दे मैयत से लेकर पूजा पण्डाल तक और धार्मिक कथा से ले कर उठावने तक हर मौके पर बिछते हैं । इनको कोई सुतक भी नहीं लगता बाराती भी इन गद्दों पर सोम-रस पीने के बाद वमन करते हैं ।

          छोटे बच्चों को सुविधानुसार इन पर पेशाब करा दिया जाता है ।  इतना ही नहीं,  इन पर बिछी चादरों से जूते भी चमका लियेे जाते हैं ।  हद तो तब होती है, जब हलवाई इन चादरों में पनीर का चक्का लटका देता है । उसी  पनीर से क्या मस्त मटर-पनीर बनता है....

          पण्डितजी चारों खाने चित थे और बच्चा पण्डितजी के चेहरे पर पानी के छींटे मार रहा था ।

          यह ऐसी  सत्यता है,  जिसे हम सब जानते  तो हैं पर मानते नहीं है और इन्हीं पर बैठकर पूजा-पाठ का दिखावा करते हैं ।

व्हॉट्सएप से साभार...

बुधवार, 18 जनवरी 2017

गांव तुम्हारा - शहर हमारा...


          एक अमीर आदमी अपने बेटे को लेकर गाँव गया, ये दिखाने कि गरीबी कैसी होती है । गाँव की गरीबी दिखाने के बाद उसने अपने बेटे से पूछा - "देखी गरीबी ?"

            बेटे ने जवाब दिया - हमारे पास 1 dog है और उनके पास 10-10 गाये है । 

            हमारे पास नहाने की छोटी सी जगह है और उनके पास पूरे तालाब हैं ।

              हमारे पास बिजली है और उनके पास सितारे...

             हमारे पास जमीन का छोटा सा टुकडा है और उनके पास बडे बडे खेत......

             हम डिब्बे का पैक बासी खाना खाते हैं, और वो स्वयं उगाकर और ताजा तोडकर खाते हैं ।

             उनके पास अपने वास्तविक मित्र हैं । जबकि हमारे लिये बस कंप्यूटर ही हमारा मित्र है ।

             हमारे पास खुशियाँ खरीदने को पैसा है, उनके पास खुशियाँ है,  जिसके लिये उन्हें पैसे की जरुरत ही नहीं ।

             उनके पापा के पास बच्चों के लिऐ समय है पर पापा आपके पास समय ही नही है ।

              पापा एकदम चुप....!

            बेटे ने कहा ''Thanks पापा मुझे यह दिखाने के लिये कि हम कितने गरीब हैं...


गुरुवार, 5 जनवरी 2017

हँसते-हँसते (जन-धन खाता)


          कस्टमर -   जन धन में खाता खुलवाना है....!!

          बैंक मैनेजर -   खुलवा लो...!!

          कस्टमर -  क्या ये जीरो बैलेंस में खुलता है.....!!

          बैंक मैनेजर (मन ही मन में साला पता है फिर भी पूछ रहा है) - हाँ जी फ्री में खुलवा लो....!!


          कस्टमर  -  इसमें सरकार कितना पैसा डालेगी ?

          बैंक मैनेजर -  जी अभी तो कुछ पता नहीं....!!

          कस्टमर -  तो मैं ये खाता क्यों खुलवाऊँ ?

          बैंक मैनेजर -  जी मत खुलवाओ....!!

          कस्टमर -  फिर भी सरकार कुछ तो देगी.....!!

          बैंक मैनेजर -   आपको फ्री में ATM CARD दे देंगे.....!!

          कस्टमर -   जब उसमे पैसा ही नहीं होगा तो एटीएम का क्या करूँगा ?

          बैंक मैनेजर -  पैसे डलवालो भैया तुम्हारा खाता है.....!

          कस्टमर -   मेरे पास पैसा होता तो मैं पहले नहीं खुलवा लेता,  तुम खाता खोल रहे हो तो तुम डालो न पैसे.....!!

          😞
बैंक मैनेजर -   अरे भाई सरकार खुलवा रही है.....!!

          कस्टमर -   तो ये सरकारी बैंक नहीं है ?

          बैंक मैनेजर -   अरे भाई सरकार तुम्हारा बीमा फ्री कर रही है, पुरे लाख का,

          कस्टमर - (खुश होते हुए) अच्छा तो ये एक लाख मुझे कब मिलेंगे ?

          बैंक मैनेजर -  (गुस्से में) जब तुम मर जाओगे तब तुम्हारी बीबी को मिलेंगे.....!!

          कस्टमर -  (अचम्भे से) तो तुम लोग मुझे मारना चाहते हो ? और मेरी बीबी से तुम्हारा क्या मतलब है ?

          बैंक मैनेजर -  अरे भाई ये हम नहीं सरकार चाहती है...!!

          कस्टमर -   (बीच में बात काटते हुए) तुम्हारा मतलब सरकार मुझे मारना चाहती है ?

          बैंक मैनेजर -   अरे यार मुझे नहीं पता, तुमको खाता खुलवाना है या नहीं ?

          कस्टमर -  नहीं पता का क्या मतलब ? मुझे पूरी बात बताओ ।

          बैंक मैनेजर -  अरे अभी तो मुझे भी पूरी बात नहीं पता, मोदीजी ने कहा कि खाता खोलो तो हम खोल रहे हैं.....!!

          कस्टमर - अरे नहीं पता तो यहां क्यों बैठे हो, (जन धन के पोस्टर को देखते हुए) -  अच्छा ये 5000/- रु. का ओवरड्राफ्ट क्या है ?

          बैंक मैनेजर -  मतलब तुम अपने खाते से 5000/- रु. निकाल सकते हो,

          कस्टमर (बीच में बात काटते हुए) -  ये हुई ना बात, ये लो आधार कार्ड, 2 फोटो और निकालो 5000/- रु.......!!

          बैंक मैनेजर -   अरे यार ये तो 6 महीने बाद मिलेंगे.......!!

          कस्टमर -   मतलब मेरे 5000/- रु. का इस्तेमाल 6 महीने तक तुम लोग करोगे......!!

          बैंक मैनेजर -  भैया ये रुपये ही 6 महीने बाद आएंगे......!!

          कस्टमर -  झूठ मत बोलो, पहले बोला कि कुछ नहीं मिलेगा, फिर कहा एटीएम मिलेगा, फिर बोला बीमा मिलेगा, फिर बोलते हो 5000/- रु. मिलेंगे, फिर कहते हो कि नहीं मिलेंगे, तुम्हे कुछ पता भी है ?

          बैंक मैनेजर बेचारा -   अरे मेरे बाप कानून की कसम, भारत माँ की कसम, मैं सच कह रहा हूँ, मोदी जी ने अभी कुछ नहीं बताया है,.... तुम चले जाओ,...... खुदा की कसम, ... तुम जाओ,.... मेरी सैलरी इतनी नहीं है कि ....... एक साथ ब्रेन हैमरेज और हार्ट अटैक दोनो का ईलाज करवा सकूँ.......!!
सोर्स - WhatsApp.

शनिवार, 25 जून 2016

गौरवशाली इन्दौर...




            भारत के नक्शे पर कई शहर अपनी विशेष पहचान के कारण ही जाने जाते हैं, उन्हीं में यदि रानी अहिल्याबाई व सर सेठ हुकमचंद जैसी ऐतिहासिक शख्सियतों से जुडे इन्दौर शहर की बात की जावे तो चाहे यह शहर बम्बई, दिल्ली, कलकत्ता, मद्रास जैसे देश के महानगरों सा आकार नहीं रखता हो किंतु इसकी ऐतिहासिकता के साथ ही ऐसी अनेक विशेषतायें इस शहर के साथ शुरु से जुडी रही हैं जो इसे देश के नक्शे में एक विशिष्ट स्थान दिलवाते हुए इसकी पहचान को हमेशा से एक विशेष दर्जा सदैव दिलवाती रही हैं । 

            देश के सात राज्यों से सीधे जुडे मध्यप्रदेश के भी लगभग मध्य में राज्य की औद्योगिक व व्यापारिक राजधानी का दर्जा रखने के कारण अन्य प्रांतों से आकर बसने वाली आबादी का सर्वोच्च भार वहन करने वाले इस शहर की खासियतों का यदि जिक्र करना प्रारम्भ किया जावे तो वास्तव में लेख की लम्बाई तो बढती ही चली जाएगी किंतु यहाँ की विशेष पहचान के क्रम समाप्त होते नहीं दिखेंगे । फिर भी इस क्रम में यह जानने की कोशिश करते हैं कि वे कौन-कौनसी प्रमुख विशेषताएँ हैं जो इस शहर को इसकी खासियतों के आधार पर इसे अन्यों से कुछ अलग दिखला सकने का कारण बनती हैं-

           
महान क्रिकेट खिलाड़ी सुनील गावस्कर ने अपने वनडे करियर की एकमात्र सेंचुरी इंदौर के नेहरू स्टेडियम में लगाई ।

            इन्दौर स्थित सैन्य छावनी MHOW (Military Headquarters Of War) देश की मुख्य सैन्य छावनियों में शामिल है ।

            जानकारी के अनुसार इन्दौर का नामकरण इन्द्रेश्वर मंदिर के नाम पर हुआ था, शुरूआत में यह "इन्दूर" था,जो आगे चलकर "इन्दौर" कहलाया ।

           
इन्दौर देश का एकमात्र शहर है जहाँ पर IIM एवं IIT दोनों है ।

           इन्दौर में एशिया की सबसे बड़ी रिहायशी कॉलोनी सुदामा नगर है ।

            देश के पहले निजी रेडियो चैनल "रेडियो मिर्ची" ने अपने प्रसारण की शुरुआत इन्दौर से की थी ।

            स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर, फिल्म स्टार सलमान खान, क्रिकेट खिलाड़ी राहुल द्रविड़ और परम पूज्यनीय योग गुरु श्री मनीष शर्मा की जन्मभूमि भी इन्दौर है ।

            पूर्व में इन्दौर को  "म.प्र.का डेट्रॉयट"  नाम से नवाजा जा चुका है ।

         इंदौर देश का एकमात्र ऐसा शहर है जहां 100 कि.मी. की रेंज में दो ज्योतिर्लिंग हैं-  1. ओंकारेश्वर  और  2. महाकालेश्वर ।

            इन्दौर स्थित आर आर कैट देश की मुख्य प्रयोगशालाओं में एक है । यहां एक्सलरेटर, क्रायोजेनिक्स सहित कई महत्वपूर्ण शोध हो रहे हैं ।

            टेस्ट क्रिकेट में एक टेस्ट में   सर्वाधिक विकेट लेने का  कीर्तिमान इंदौर के नरेन्द्र हिरवानी और बाब मैसी (आस्ट्रेलिया) के नाम पर संयुक्त रूप से दर्ज है । 
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            किसी महिला प्रत्याशी द्वारा एक ही लोकसभा सीट से एक ही पार्टी के टिकट पर सर्वाधिक बार चुनाव जीतने का कीर्तिमान इन्दौर की सांसद और वर्तमान लोकसभा अध्यक्ष श्रीमती सुमित्रा महाजन के नाम पर दर्ज ।

            विकास के शुरुआती वर्षों में इन्दौर "कपड़ा मिलों का शहर" के नाम से प्रसिद्ध था लेकिन अब ये सभी मिलें बंद हो चुकी है ।

           
इन्दौर स्वाद के शौकीनों का शहर है । इसे "स्वाद की राजधानी" के रूप मे जाना जाता है ।

           
यहाँ पर एशिया के सबसे बड़े गणपति विराजमान हैं (बड़ा गणपति)

           
यहाँ पर संपूर्ण कांच से निर्मित मंदिर है । जहां पर छत, दिवार से लेकर फर्श भी कांच की है और ये सारे कांच  विदेशों से मंगाए गए थे ।

           
यहीं पर ही वीरेंद्र सहवाग ने 200 रन बनाये थे ।

           
यहीं के एक विधायक के नाम सबसे ज्यादा मतों से जितने का रिकार्ड है ।

           
यहीं की एक बेटी पलक मुछाल ने गाने गाकर सबसे ज्यादा हार्ट सर्जरी करवाई और यह क्रम अभी तक भी सतत जारी है ।

           
यहीं का एक ट्रैफिक पुलिस आज दुनिया का सबसे पसंदीदा ट्रैफिक पुलिस है । जिसे काम करते सभी देखना चाहते है । रणजीत सिंह ।

           
यहाँ पर स्थित दवा बाजार एशिया का सबसे बड़ा दवा बाजार है ।

           
यहीं पर एक ऐसा पर्वत है जहां पर पितरों की याद में पोधे लगाये जाते है । पितृ पर्वत ।

           
यही वो शहर है जहां मूक बधिरों की सेवा के लिए सबसे अच्छा स्कूल और ट्रेनिग कैंप है ।

           
यही वो शहर है जहाँ के एक व्यापारी सर सेठ हुकुमचंदजी (कॉटन किंग) की तस्वीर आज भी लंदन कॉटन एक्सचेंज में मुख्य द्वार पर लगी है ।

           
यहीं पर सर सेठ हुकुम चंद जी द्वारा स्वर्ण से निर्मित रथ है जो दुनिया में कही नहीं है और वो केवल महावीर जयंती पर ही निकलता है ।

           
मोबाईल कंपनी एयर टेल ने अपनी मोबाइल सेवा की शुरुवात  सर्व प्रथम इंदौर से ही की थी ।
 
            अनंत चतुर्दशी पर रात भर चलने वाले विशाल चल समारोह और रंगपंचमी पर दिन भर रंगों से सरोबार हुडदंगीयों की विशाल सामूहिक गेर जिनके फिल्मांकन के लिये राजश्री प्रॉडक्शन जैसी नामी-गिरामी फिल्म प्रोड्यूसर संस्थाएँ विशेष आयोजन रखती हैं वह भी इसी इन्दौर शहर की विशिष्ट पहचान रही है ।

शुक्रवार, 3 जून 2016

कॉलेज स्टुडेंट्स के लिये रतन टाटा के 10 महत्वपूर्ण सबक...


              1.  जीवन उतार-चढ़ाव से भरा है, इसकी आदत बना लो.

             
            2.  लोग तुम्हारे स्वाभिमान की परवाह कभी नहीं करते,  इसलिए पहले खुद को  साबित करके दिखाओ.

          
             3.  कॉलेज की पढ़ाई पूरी करते ही मोटे वेतन के बारे में मत सोचो, एक रात में कोई वाइस-प्रेसिडेंट नहीं बनता, इसके लिए अपार मेहनत पड़ती है.

              
            4.  अभी आपको अपने शिक्षक सख्त और डरावने लगते होंगे, क्योंकि अभी तक आपका अपने जीवन में बॉस नामक प्राणी से पाला नहीं पड़ा.

             
            5.  तुम्हारी गलती सिर्फ तुम्हारी है, तुम्हारी पराजय सिर्फ तुम्हारी है, किसी को दोष मत दो, उस गलती से सीखो और आगे बढ़ो.

             
            6.  तुम्हारे माता पिता तुम्हारे जन्म से पहले इतने निरस और ऊबाऊ नही थे, जितना तुम्हें अभी लग रहा है, तुम्हारे पालन पोषण करने में उन्होंने इतना कष्ट उठाया कि उनका स्वभाव बदल गया.

              
            7.  सांत्वना पुरस्कार सिर्फ स्कूल में  देखने को मिलते है, कुछ स्कूलों में तो पास होने तक भी परीक्षा दी जा सकती है, लेकिन बाहर की दुनिया के नियम अलग हैं, वहां हारने वाले को अलग से कोई मौका नहीं मिलता.

              
            8.  जीवन के स्कूल में कक्षाएं और वर्ग नहीं होते और वहां महीने भर की छुट्टी भी नहीं मिलती, आपको सिखाने के लिए कोई समय नहीं देता, यह सब आपको खुद करना होता है.

              
            9.  TV का जीवन सही नहीं होता और जीवन TV के सीरियल नहीं होते, सही जीवन में आराम नहीं होता सिर्फ और सिर्फ काम होता है.

         
            10. लगातार पढ़ाई करने वाले और कड़ी मेहनत करने वाले अपने मित्रों को कभी मत चिढ़ाओ, वर्ना एक समय ऐसा आ सकता है कि तुम्हें उनके नीचे काम करना पड़े.

गुरुवार, 5 मई 2016

हम-तुम और वो...

बेचारे मर्द...

जन्म लेते है, तो बधाइयां माँ को मिलती है..।
शादी होती है, तो तारीफ़ और उपहार दुल्हन को मिलते है......
और जब मर जाते है, तो बीमा की रकम भी बीबी ले जाती है.......
हद तो तब हो गयी जब एक आदमी ने सौ बार "रक्तदान" करके रिकार्ड बनाया । मगर ब्लड बैंक वालो ने यह कहते हुए पुरस्कार उसकी पत्नी को  दिया:-
धन्यवाद मेडमजी............ "
"
आपने नही पिया, तभी तो हमने  लिया। "

हेलमेट  और  पत्नी  दोनों  का  स्वभाव
एक  जैसा  है .....
सिर  पर  बिठाकर  रखो  तो
जान  बची  रहेगी...

मां - बेटा एपल खाओगे?
पप्पू - नही...
मां - बेटा आम खाओगे?
पप्पू - नही...
मां - बेटा ऑरेंज खाओगे?
पप्पू - नही...
मां - "बिल्कुल बाप पर गया है,चप्पल ही खाएगा."

बाप- बेटा लस्सी पीयेगा?
पप्पू - नही...
बाप - बेटा दूध पीयेगा?
पप्पू - नही...
बाप - बेटा जूस पीयेगा?
पप्पू - नही...
बाप - "बिल्कुल माँ पर गया है, लगता खून ही पीयेगा." 
  
बीवी से झगडे करने के फायदे...

          
नींद में कोई व्यवधान नहीं आता : सुन रहे हो क्या, लाइट बंद करो, पंखा बंद करो, चादर इधर दो, इधर मुह करो, टाइप कुछ भी बाते नहीं होती..

          
पैसों की बचत : जब बीवी से झगड़ा हुआ रहता है इस दौरान बीवी पैसे नहीं मांगती..

          
तनाव से मुक्ति : झगड़े के दैरान बातचीत बंद होती है जिससे किचकिच कम होती है और पति तनाव से मुक्त रहता है..

          
आत्मनिर्भरता आती है : जो अपना काम आप कर सकते हैं वो इसलिए नहीं करते कि बीवी कर देती है, झगड़े के बाद वो छोटे मोटे काम (खुद ले कर पानी पीना, नहाने के बाद अपने कपडे खुद निकालना, अपने लिए खुद चाय बनाना) खुद कर के आदमी आत्मनिर्भर हो जाता है..

          
काम में व्यवधान नहीं होता : झगडे के दौरान काम के समय आपको बीवी के फ़ालतू कॉल (जानू क्या कर रहे हो, मन नहीं लग रहा है, आज बहुत गर्मी है, इस प्रकार के) नहीं आते, जिससे आप अपने काम में ध्यान केंद्रित कर सकते है..

          
घर जल्दी जाने की चिंता से मुक्ति : ( अधिकांश पतियो को काम के बाद जल्दी घर आने के लिए घर से बारम्बार फ़ोन आते है मगर एक बार झगड़ा हो जाने के बाद आप कुछ दिन तक इस चिंता से दूर रह सकते है..

          
आप का मूल्य बढ़ता है : ये इंसान का मनोविज्ञान है कि जो चीज नहीं होती उसके मूल्य का अहसास तभी होता है, झगडे के दौरान बीवी को आपकी मूल्य का अहसास होता है..

          
प्यार बढ़ता है : आपस में झगडे से प्यार बढ़ता है, क्योकि अक्सर देखा गया है एक बार बारिश हो जाए तो मौसम सुहाना हो जाता है..

         
फायदे तो और भी बहुत हैंमगर समयाभाव के कारण लिखना मुश्किल है..

         
तो आइये प्रण लें कि आज के बाद हम सभी पति महीने में एक न एक बार अपनी बीवी से झगड़ा जरूर करेंगे (बीवी तो हमेशा तैयार रहती है) ताकि महीने में कुछ दिन पति लोग भी कुछ शांति से गुजार सकें..

अलोकिक  यह ज्ञान पतिहित में जारी... 

ऐतिहासिक शख्सियत...

पागी            फोटो में दिखाई देने वाला जो वृद्ध गड़रिया है    वास्तव में ये एक विलक्षण प्रतिभा का जानकार रहा है जिसे उपनाम मिला था...