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इस ब्लाग परिवार के हमारे सदस्य साथी....

बुधवार, 27 अप्रैल 2011

गर भला किसी का कर ना सको तो....

गर भला किसी का कर ना सको तो बुरा किसी का मत करना,
अमृत न पिलाने को हो घर में तो जहर पिलाते भी डरना ।

यदि सत्य मधुर न बोल सको तो झूठ कटुक भी मत कहना
गर मौन रखो सबसे अच्छा, विष-वमन कहीं भी मत करना,
यदि घर ना किसी का बना सको तो झोपडिया न जला देना
यदि मरहम पट्टी कर न सको तो खार नमक न लगा देना

जब दीपक बनकर जल न सको तो अन्धकार भी मत करना
जब फूल नहीं बन सकते तो, कांटे बनकर भी बिखरना ना,
मानव बनकर सहला न सको तो दिल भी किसी का दुखाना ना
यदि देव नहीं बन सकते तो दानव बनकर भी दिखाना ना ।

यदि सदाचार अपना न सको तो दुराचार भी मत करना.
गर भला किसी का कर ना सको तो बुरा किसी का मत करना ।



शुक्रवार, 22 अप्रैल 2011

होनहार...

       अति व्यस्त व्यापारी पिता ने अपने युवा हो रहे पुत्र को हमउम्र दोस्तों में कुछ ज्यादा ही रुचि लेते देखा तो यह जानने की कोशिश में कि अपने दोस्तों के साथ इस उम्र में यह लडकियों में रुचि ले रहा है या ड्रिंक जैसे व्यसन में उलझ रहा है या फिर व्यापार में पैसे कमाने की ओर भी इनका रुझान चल रहा है, उसके घर आने के समय एकान्त कमरे में मेज पर सुन्दर लडकी की फोटोफ्रेम के साथ व्हिस्की की बाटल और नोटों की एक गड्डी रख दी और छुपकर उसकी गतिविधि को देखने लगा ।





      पुत्र ने कमरे में घुसते ही Wou की मुद्रा में सिटी बजाते हुए लडकी के फोटो को उठाकर उसका चुम्बन लिया फिर बाटल खोलकर एक बडा सा घूंट व्हिस्की का मुंह में भरा और नोटों की गड्डी को जेब के हवाले करते हुए कमरे से बाहर निकल गया ।


रविवार, 17 अप्रैल 2011

चतुर नौनिहाल...!



        हमारे तीन वर्षीय पोते मा. हनी जिनके जन्मदिन पर कुछ दिनों पूर्व आप सभीने शुभकामनाएँ भेजी थीं दो दिन पूर्व अपने चाचा के साथ घूमने निकले । एरोड्रम घर से बमुश्किल एक किलोमीटर से भी कम की ही दूरी पर है और घूमने के दौरान एरोप्लेन को बहुत नीचे से देखने की उनकी हसरत अक्सर पूरी हो जाती है किन्तु उस दिन प्लेन की आवाजाही का दूर-दूर तक नामो निशान नहीं दिख रहा था और हनी मास्टर जिद पर अडे थे कि एलोप्लेन बुलवाओ । 

         चाचा ने जब पांसा डाला कि अब तुझे प्लेन देखना है या आईस्क्रीम खाने चलना है तो जनाब पूरी मासूमियत से बोलते हैं "वा तो फिल अबी आईस्क्लीम खाने चलते हैं एलोप्लेन देखने बाद में आ जाएँगे ।"

                  ऐसे ही हमारे पडौसी के चार वर्षीय पोते के यहाँ एक दिन उनकी मम्मी को किटीपार्टी में जाना था और दादी को एक शादी में । उनसे पूछा गया कि मम्मी के साथ जाना है या दादी के साथ तो वे तपाक से बोले दादी के साथ । जब उनके पापा ने पूछा आज दादी के साथ क्यों मम्मी के साथ क्यों नहीं ? तो जनाब फरमाते हैं किटीपार्टी में तो एक बार ही कोल्डड्रिंक मिलेगी और शादी में तो कितनी भी बार मैं कोल्डड्रिंक पीने के साथ मिठाई भी खा सकूँगा ।


शुक्रवार, 15 अप्रैल 2011

श्री महावीर वाणी




  
जियो और जीने दो...




महावीर जयन्ति के पावन पर्व पर

  सभी पाठकों को हार्दिक शुभकामनाएँ...


बुधवार, 13 अप्रैल 2011

जीवन चक्र !...



स्त्री काकरोच से डरती है
 
काकरोच चूहे से डरता है
 
चूहा बिल्ली से डरता है

बिल्ली कुत्ते से डरती है
 
कुत्ता आदमी से डरता है

आदमी स्त्री (पत्नी) से डरता है.


इसी वर्तुल में घूम रही इस गोल दुनिया में सभी अपनी जीवन यात्रा के दायरे में अनवरत घूम रहे हैं ।

चिन्तन सौजन्य-
राष्ट्रसंत मुनि श्री तरुणसागरजी महाराज

सोमवार, 11 अप्रैल 2011

तर्क और तकरार...



         संत कबीर के बारे में यह धारणा आम थी की उनका दाम्पत्य जीवन बहुत सुखी है और उन पति-पत्नी के बीच कभी झगडा नहीं होता है । 
 
        एक जिज्ञासु इसका राज जानने कबीर के पास पहुँचे और उनसे अपनी जिज्ञासा जाहिर की- मैंने सुन रखा है कि आपका अपनी पत्नी के साथ कभी कोई अनबन या झगडा नहीं होता है । आखिर ऐसा कैसे सम्भव है ?

        कबीर ने उन सज्जन को बैठाकर अपनी पत्नी को आवाज दी और उससे कंडील जलाकर लाने को कहा- पत्नी ने कंडील जलाकर वहाँ लाकर रख दिया । तब कबीर ने पत्नी से उन मेहमान को पिलाने के लिये पानी मंगवाया. पत्नी ने पीने का पानी लाकर भी दे दिया जिसे कबीर ने उन आगन्तुक महोदय को पिलाने के बाद उनसे पूछा- मैंने आपको हमारे बीच तकरार नहीं होने का कारण बता दिया है । उम्मीद है आपको भी इससे लाभ हो सकेगा ।
 
        जिज्ञासु आगंतुक विस्मित मुद्रा में कबीर से बोला- कहाँ ? अभी तक तो आपने मेरे प्रश्न का कोई उत्तर ही नहीं दिया । मैं कैसे समझ सकता हूँ कि आप क्या समझाना चाहते हैं ।
 
        तब कबीर ने उनकी जिज्ञासा का समाधान करते हुए उन्हें बताया- इस समय शाम शुरु हो रही है और रात का अंधेरा होने में अभी कई घंटे बाकि है । ऐसी स्थिति में जब मैंने अपनी पत्नी से कंडील जलाकर लाने को कहा तो उसने मुझसे कोई पूछताछ या तर्क नहीं किया कि इस समय मैं जलते हुए कंडील का क्या करुंगा ? बस मैंने मांगा और उसने लाकर दे दिया ।

         वैसे ही यदि वह मुझसे किसी काम के लिये बोलती है तो मैं भी बिना किसी तर्क के उसका बताया हुआ काम कर देता हूँ और जब हमारे बीच में अकारण के तर्क या ऐसा क्यूं जैसी कोई पूछताछ नहीं चलती तो फिर किसी प्रकार की तकरार का  भी कोई कारण हमारे बीच नहीं रहता और इसीलिये लोगों को हमारा दाम्पत्य जीवन सुखी दिखता है


शुक्रवार, 8 अप्रैल 2011

श्री अण्णा हजारे और जन लोकपाल बिल



      श्री अण्णा हजारे 1965 के भारत पाक युद्ध के दौरान सेना में सैनिक थे । युद्ध के दौरान उनकी पूरी यूनिट में वे एकमात्र सैनिक थे जो जीवित बचे । उन्होंने अपने इस पुर्नजीवन को भगवान की देन समझा और पूरा जीवन समाज की सेवा के लिये समर्पित कर दिया । उन्होंने शादी नहीं की और वे एक मंदिर में जीवन बिताते हैं । उनके नाम न कोई बैंक बैलेन्स है और न ही कोई जमीन । कुछ जोडी कपडे के अलावा उनकी कोई सम्पत्ति नहीं है । 

      श्री अण्णा हजारे महाराष्ट्र में गरीब लोगों के हितों की रक्षा करने के लिये कई बार आमरण अनशन पर बैठे हैं और उनके अनशन की वजह से महाराष्ट्र सरकार को 6 भ्रष्ट मंत्रियों व 400 अफसरों को बर्खास्त करना पडा और महाराष्ट्र में सूचना अधिकार कानून समेत 7 कानून पारित किये गए । यह उनके प्रयासों का ही नतीजा है कि आज महाराष्ट्र के कई गांव जहाँ कभी सूखा हुआ करता था वहाँ आज हरियाली है, खाद्य सम्पदा है ।

      ये वही अण्णा हजारे हैं जिन्होंने देश में भ्रष्टाचार को उजागर करने के लिये सूचना का अधिकार बनवाया और अब यही अण्णा हजारे भ्रष्टाचारियों से लडने के लिये जन लोकपाल रुपी हथियार के लिये  संघर्ष कर रहे हैं । जनलोकपाल लागू होगा तो देश से भ्रष्टाचार का उन्मूलन होने के साथ ही ईमानदार लोगों को सिर उठाकर जीने का अधिकार मिलेगा । देश फिर से वैभवशाली, गरीबीमुक्त, भुखमरीमुक्त, अपराधमुक्त और बेरोजगारी से मुक्त हो सकेगा ।

जन लोकपाल बिल
      जस्टिस संतोष हेगडे, प्रशांत भूषण, अरविन्द केजरीवाल, किरण बेदी व अन्य प्रबुद्ध व्यक्तियों द्वारा बनाया गया यह विधेयक जनता के द्वारा वेबसाईट पर दी गई प्रतिक्रिया और जनता के साथ विचार-विमर्श के बाद विधि-विशेषज्ञों द्वारा तैयार किया गया है । इस बिल को शांति भूषण, जे. एम. लिंगदाह, अन्ना हजारे, श्री श्री रविशंकर, बाबा रामदेव, महमूद मदानी, आर्क बिशप विन्सेन्ट एम. कान्सेसाओ, सैयद रिजवी, जस्टिस डी. एस. तेवटिया, प्रदीप गुप्ता, कमलकान्त जायसवाल, सुनिता गोदारा, सैय्यद शाह, फजलुर्रहमान वाईजी आदि का समर्थन प्राप्त है । इस बिल की प्रति प्रधानमंत्री एवं सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को भेजी गयी थी, जिसका उन्होंने इस अनशन के पूर्व तक कोई जवाब नहीं दिया ।

इस कानून में क्या है ?

        1.  इस कानून के अन्तर्गत केन्द्र में लोकपाल और राज्यों में लोकायुक्त का गठन होगा ।

        2. ये संस्था निर्वाचन आयोग और सुप्रीम कोर्ट की तरह सरकार से स्वतंत्र होगी । कोई भी नेता या सरकारी अधिकारी जांच की प्रक्रिया को प्रभावित नहीं कर पाएगा ।

        3. भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कई सालों तक मुकदमे लंबित नहीं रहेंगे । किसी भी मुकदमे की जांच एक साल के भीतर पूरी होगी । ट्रायल अगले एक साल में पूरा होगा और भ्रष्ट नेता, अधिकारी या जज को दो साल के भीतर जेल भेजा जावेगा ।

        4. अपराध सिद्ध होने पर भ्रष्टाचारियों के द्वारा सरकार को हुए घाटे को वसूल किया जावेगा ।

        5. ये आम आदमी की कैसे मदद करेगा ?

              यदि किसी नागरिक का काम तय समय सीमा में नहीं होता तो लोकपाल दोषी अफसर पर जुर्माना लगाएगा और वह मुआवजा शिकायतकर्ता को मुआवजे के रुप में मिलेगा ।

        6. अगर आपका राशन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, पासपोर्ट आदि तय समय सीमा के अन्दर नहीं बनते हैं, या  पुलिस आपकी शिकायत दर्ज नहीं करती तो आप इसकी शिकायत लोकपाल से कर सकते हैं और उसे यह काम एक महिने के भीतर करवाना होगा । आप किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार की शिकायत लोकपाल से कर सकते हैं जैसे- सरकारी राशन की कालाबाजारी, सडक बनाने में गुणवत्ता की अनदेखी, पंचायत निधि का दुरुपयोग, लोकपाल को इसकी जांच एक साल के भीतर करनी होगी ।

        7. क्या सरकार भ्रष्ट और कमजोर लोगों को लोकपाल का सदस्य नहीं बनाना चाहेगी ?

              ये मुमकिन नहीं है क्योंकि लोकपाल के सदस्यों का चयन जजों, नागरिकों और संवेधानिक संस्थानों द्वारा किया जावेगा न कि नेताओं द्वारा । इनकी नियुक्ति पारदर्शी तरीके से और जनता की भागीदारी से होगी ।

        8. अगर लोकपाल में काम करने वाले अधिकारी भ्रष्ट पाये गये तो ?

              लोकपाल / लोकायुक्तों का कामकाज पूरी तरह से पारदर्शी होगा । लोकपाल के किसी भी क्रमचारी के खिलाफ शिकायत आने पर उसकी जांच अधिकतम दो महिने में पूरी कर उसे बर्खास्त कर दिया जावेगा ।

        9. मौजूदा भ्रष्टाचार निरोधक संस्थानों का क्या होगा ?

              सीवीसी, विजिलेंस विभाग, सी बी आई की भ्रष्टाचार निरोधक विभाग को लोकपाल में विलय कर दिया जाएगा । लोकपाल को किसी जज, नेता या अफसर के खिलाफ जांच करने व मुकदमा चलाने के लिये पूर्ण शक्ति और व्यवस्था भी होगी ।


         अब पिछले तीन दिनों से चल रहे अण्णा के इस अनशनकारी आंदोलन के समर्थन में देश भर से जैसे-जैसे सैकडों हजारों से होते हुए लाखों देशवासियों का जुडाव बढता जा रहा है सरकार को अपना अस्तित्व खतरे में दिखने लगा है । आंदोलनकारियों को येन-केन मना लेने के आधे-अधूरे शासकीय प्रयास सामने आ रहे हैं । जबकि आज आवश्यकता इस बात की दिख रही है सार्वजनिक जीवन में महाभ्रष्ट लोगों के अपराध का शीघ्र निर्णय होने के साथ ही उन्हें उनकी कारगुजारियों की समय पर उपयुर्क्त सजा मिलने के लिये देश में यह कानून अविलम्ब लागू हो सके ।



मंगलवार, 5 अप्रैल 2011

लघुकथा : मितव्ययता - फिजूलखर्ची और राजा का न्याय !

      एक परिवार में दो भाई साथ में रहते थे । पिता की मृत्यु के बाद दोनों भाईयों में सम्पत्ति का बंटवारा हो गया और दोनों अपना-अपना काम व अपनी-अपनी गृहस्थी में रहने लगे । बडे भाई की पत्नी जितनी तेज-तर्रार थी उतनी ही कामचोर होने के साथ फिजूलखर्च भी थी,  जबकि छोटे भाई की पत्नी मेहनती स्वभाव के साथ मितव्ययता से जीवन जीने की प्रवृत्ति में यकीन रखती थी ।

          दोनों देवरानी व जेठानी की इन अलग-अलग प्रवृत्तियों के कारण थोडे ही समय में दोनों भाईयों की आर्थिक स्थितियों में असमानता बढने लगी । छोटे भाई के परिवार की बढती समृद्धि देखकर बडे भाई की पत्नी रोज अपने पति से शिकायत करती कि बंटवारे में हमारे साथ धोखा हुआ है और तुम्हारे छोटे भाई ने अधिक धन-सम्पत्ति अपने कब्जे में ऱखली है । इसलिये तुम्हें राजा के पास जाकर उनसे शिकायत करने के साथ ही अपने लिये न्याय मांगना चाहिये ।

           रोज-रोज की एक ही बात, कब तक असर न करती । आखिर बडा भाई अपनी पत्नी को साथ लेकर शिकायत करने राजा के पास पहुँचा । राजा ने उनकी शिकायत सुनकर छोटे भाई को भी अपनी पत्नी सहित राज-दरबार में बुलवाया । जब राजा के सामने दोनों महिलाओं की स्वभावगत कमी के कारण बने इस आर्थिक असंतुलन की बात आई तो बडे भाई की पत्नी ने इस कारण को गलत बताते हुए छोटे भाई व उसकी पत्नी को बेईमान साबित करते हुए उनके द्वारा बेईमानी से धन हडपे जाने की शिकायत फिर की ।

      फैसला आसान न था अतः राजा ने मंत्री से सलाह-मशवरा कर दोनों महिलाओं को दूसरे दिन सुबह तालाब से एक-एक घडा  बाल्टी पानी इस आदेश के साथ लाने को कहा कि पानी ढूलना नहीं चाहिये । दूसरे दिन दोनों देवरानी व जेठानी नियत समय पर पानी का घडा व बाल्टी तालाब से भरकर राजमहल तक पहुँची । दोनों ही महिलाओं से कीचड सने रास्तों पर नंगे पैर चलवाते हुए अलग-अलग यह पानी मंगवाया गया था । जेठानी अपना पानी पहले लेकर पहुँच गई जिसमें जल्दबाजी के कारण राजा के आदेश के बाद भी छलकने से पानी कम हो चुका था । फिर सेवक ने जेठानी के पैर धोकर साफ करने के लिये एक लोटा पानी उसे दिया जिसे उसने पैरों पर डालकर पैर साफ करने चाहे जो नहीं हुए । इतने कीचड के पैर इतने से पानी में कैसे साफ होंगे कहते हुए उसने सेवक से कहा- ला भैया थोडा पानी और दे । सेवक ने उसे और पानी दे दिया, उसे भी अपने पैरों पर डालकर भी वह अपने पैर पूरी तरह से साफ नहीं कर पाई ।

      तब तक देवरानी भी अपना घडा बाल्टी भरकर ला चुकी थी । उसके बर्तनों का पानी बगैर छलके पूरा भरा दिखाई दे रहा था । सेवक ने पैर साफ करने के लिये उसे भी एक लोटा पानी दिया जिसे उसने वहीं रखकर पहले जमीन से एक पत्ता उठाकर उस पत्ते से अपने पैर का अधिकांश कीचड साफ किया । फिर पानी की पतली सी धार एक पैर पर डालते हुए दूसरे पैर से रगडकर पहला पैर व फिर उसी प्रकार दूसरे पैर पर पतली सी धार डालते हुए दूसरे पैर से पहला पैर रगडकर साफ कर लिया व फिर दोनों पैरों को एक साथ साफ करने के बाद भी कुछ बचे हुए पानी के साथ लोटा वापस सेवक को लौटा दिया ।
       
       राजा व वजीर महल की खिडकी से दोनों महिलाओं के तरीके को बहुत ध्यान से देख रहे थे । राज दरबार में दोनों महिलाओं को उनके पतियों के साथ बुलवाकर राजा ने सभी दरबारियों के समक्ष बडे भाई को अपना फैसला सुना दिया कि तुम्हारी पत्नी लापरवाह और फिजूलखर्च है और बंटवारे के बाद अब यदि तुम्हें अपने हिस्से में कमी लग रही है तो उसकी जिम्मेदार तुम्हारी पत्नी के खर्च करने का तरीका है न कि बंटवारे में किसी प्रकार की बेईमानी ।
    
       और आसमान पर थूकने की सी कोशिश करती बडे भाई की शिकायती पत्नी अपने पति के साथ अपमानित होकर अपना सा मुंह ले घर वापस आ गई ।
   

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