बुधवार, 27 अप्रैल 2011

गर भला किसी का कर ना सको तो....


गर भला किसी का कर ना सको 
तो बुरा किसी का मत करना,
अमृत न पिलाने को हो घर में 
तो जहर पिलाते भी डरना ।
यदि सत्य मधुर न बोल सको 
तो झूठ कटुक भी मत कहना
गर मौन रखो सबसे अच्छा
विष-वमन कहीं भी मत करना,
यदि घर ना किसी का बना सको 
तो झोपडिया न जला देना
यदि मरहम पट्टी कर न सको 
तो खार नमक न लगा देना 

जब दीपक बनकर जल न सको 
तो अन्धकार भी मत करना
मानव बनकर सहला न सको 
तो दिल भी किसी का दुखाना ना
यदि देव नहीं बन सकते तो 
दानव बनकर भी दिखाना ना ।

यदि सदाचार अपना न सको 
तो दुराचार भी मत करना.
गर भला किसी का कर ना सको 
तो बुरा किसी का मत करना ।

14 टिप्‍पणियां:

Shah Nawaz ने कहा…

बहुत ही खूबसूरत सन्देश दियें हैं आपने इस रचना के माध्यम से.... बहुत बढ़िया!

Sunil Kumar ने कहा…

उत्तम विचार , अच्छा सन्देश देती हुई रचना , काश ! इस सन्देश का सब लोग पालन करते

Kailash Sharma ने कहा…

सत्य वचन..हरेक पंक्ति एक प्रेरक सन्देश देती है..बहुत सुन्दर

Patali-The-Village ने कहा…

बहुत सुन्दर, अच्छा सन्देश देती हुई रचना|

डॉ. मोनिका शर्मा ने कहा…

बहुत सुंदर ....सार्थक पंक्तियाँ हैं....

Udan Tashtari ने कहा…

उम्दा रचना...

M VERMA ने कहा…

बहुत सुन्दर सन्देशमय रचना

Dr (Miss) Sharad Singh ने कहा…

सन्देशपरक प्रेरणादायक रचना....
हार्दिक बधाई...

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

बहुत सुन्दर, भला न हो सके तो किसी का बुरा भी न हो।

Asha Lata Saxena ने कहा…

अच्छी भावपूर्ण रचना
आशा

Arunesh c dave ने कहा…

क्या बात है दिल को छू गयी लेखनी

Apanatva ने कहा…

sadmarg par chalne kee raah dikhatee bhavpoorn rachana prarit kartee hai...
Aabhar

Arshad Ali ने कहा…

Bahut hin achchhi rachna ....sundar sandesh ke sath.

आशुतोष की कलम ने कहा…

जहर पि जाइए और बाँटिये अमृत सबको...
जहर पिलाने से डरेंगे ही..सन्मार्ग ही उन्नति का वाहक है
बहुत सुन्दर कविता आभार

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