इस ब्लाग परिवार के हमारे सदस्य साथी....

सोमवार, 3 जनवरी 2011

स्वयं में बदलाव ? (लघुकथा)

        किसी गांव में ठगू नाम का एक व्यक्ति रहा करता था । अपने विचित्र नाम के कारण उसे बच्चे तो बच्चे, बडों के भी उपहास का पात्र बनना पडता था । आखिर एक दिन वह व्यक्ति अपनी पत्नि और परचितों को ये बताकर घर से निकला कि आज तो मैं अपना नाम बदलकर ही लौटूंगा.
 
        नाम बदलने की सोच के साथ जब वह कुछ दूर निकल गया तो एक खेत में उसे एक स्त्री मजदूरी करते हुए दिखी, ठगू ने उससे पूछा- माई तुम्हारा नाम क्या है ? भैया मेरा नाम लक्ष्मी है. उस स्त्री ने जवाब दिया । उसका नाम सुनकर ठगू सोचते-सोचते आगे बढ गया ।
 
        कुछ और दूर जाने पर एक भिखारी उसे दिखा । ठगू ने उससे भी वही प्रश्न पूछा- भैया तुम्हारा नाम क्या है ?   मेरा नाम धनपत है. उस भिखारी ने जवाब दिया । ठगू वहाँ से भी सोचते हुए आगे निकल गया ।
 
        और भी आगे जाने पर उसे एक शवयात्रा लेकर जाते कुछ लोग दिखे । उसने उनमें से एक से पूछा- भैया ये मरने वाले का नाम क्या था ? तब उस व्यक्ति ने उसे बताया- मरने वाले का नाम अमरसिंह था । बडा अच्छा आदमी था किन्तु 25-26 वर्ष की उम्र में ही चल बसा ।
 
        फिर तो ठगू वापस अपने घर आ गया । सबने पूछा- भई ठगू आज तो तुम अपना नाम बदलने गये थे । क्या नाम रखकर आए हो ? तब ठगू ने जवाब दिया-
 
                लक्ष्मी होकर करे मजूरी,  धनपत मांगे भीख.
                अमरसिंह भी मर गया,   ठगू नाम ही ठीक. 

11 टिप्पणियाँ:

मंजुला ने कहा…

वाह क्या बात है ....वाकई व्यर्थ की बातो मे बेकार ही समय जाया करते है बहुत बार हम लोग ...

ajit gupta ने कहा…

ठगू नाम ही ठीक। बढिया है, जो नाम मिल गया उसी में खुश हैं जी।

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

जिससे पहचान है, वही ठीक। नाम जीने का क्या लाभ?

Rahul Singh ने कहा…

गौतम बुद्ध सी बोध कथा.

अनुपमा पाठक ने कहा…

ठगू नाम ही ठीक.
अच्छी सीख!

हर्षवर्धन वर्मा. ने कहा…

पंचतंत्र की वापसी.....वाह.

JAGDISH BALI ने कहा…

बहुत खूब !

उपेन्द्र ' उपेन ' ने कहा…

बहुत ही सुन्दर बोधकथा । जो नाम मिल गया वही ठीक ।

प्रमोद ताम्बट ने कहा…

बहुत बढ़िया कथा है। बधाई।

प्रमोद ताम्बट
भोपाल
व्यंग्य http://vyangya.blog.co.in/
व्यंग्यलोक http://www.vyangyalok.blogspot.com/
फेसबुक http://www.facebook.com/profile.php?id=1102162444

Patali-The-Village ने कहा…

जो नाम मिल गया वही ठीक ।

डॉ टी एस दराल ने कहा…

सही कहा । नाम में क्या रखा है ।
प्रेरणात्मक प्रसंग ।

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...