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शुक्रवार, 7 जनवरी 2011

व्यवहार - ज्ञान. (लघुकथा)


      एक सुबह एक पंडितजी नदी पार करने के निमित्त नाव पर सवार हुए । अपनी मौज में चप्पू चलाते गाने में मग्न नाविक से रास्ते में पंडितजी ने पूछा- कभी रामायण पढी है ? 
 
          नहीं महाराज.  नाविक ने उत्तर दिया । 
 
          अरे रे, तुम्हारा एक चौथाई जीवन तो बेकार ही गया । पंडितजी नाविक से बोले । नाविक सुनकर भी अपने चप्पू चलाता रहा ।
 
          कुछ समय बाद फिर पंडितजी ने नाविक से पूछा- भगवतगीता के बारे में तो हर कोई जानता है । तुमने गीता तो पढी ही होगी ।
 
          नहीं महाराज । नाविक ने फिर उत्तर दिया । 
 
          हिकारत भरी शैली में तब पंडितजी उस नाविक से बोले- फिर तो तुम्हारा आधा जीवन बेकार ही गया ।
 
          नाविक बगैर कुछ बोले अपनी नाव के चप्पू चलाता रहा । बीच नदी में अचानक नाविक की नजर नाव के ऐसे छेद पर पडी जिसमें से तेजी से नाव में पानी भर रहा था । 
 
          अब नाविक ने पंडितजी से पूछा- महाराज क्या आप तैरना जानते हो ? नहीं भैया. पंडितजी ने उत्तर दिया ।
 
          फिर तो आपका पूरा जीवन ही बेकार गया । कहते हुए जय बजरंग बली का नारा लगाकर नाविक नदी में कूद गया और तैरते हुए किनारे पहुँच गया ।
 
          तमाम शास्त्रों के ज्ञाता बेचारे पंडितजी...
 
          ज्ञान गर्वीला होता है कि उसने बहुत कुछ सीख लिया,  बुद्धि विनीत होती है कि वह अधिक कुछ जानती ही नहीं ।


13 टिप्पणियाँ:

amit-nivedita ने कहा…

ज्ञान वर्धक प्रसंग ।

हर्षवर्धन वर्मा. ने कहा…

यह पढकर एक शेर याद आ गया,मौजू लगता है.

फिक्र में डूब रहे सब अदीब-ओ-दानिशमंद,
एक गाफ़िल को मगर पूरा इत्मीनान रहे.

ajit gupta ने कहा…

सही है कितना ही ज्ञान हो लेकिन दुनिया में कैसे रहा और कैसे जीया जाता है का ज्ञान नहीं हो तो डूबना निश्चित ही है।

वाणी गीत ने कहा…

जीवन जीने में व्यवहारिक ज्ञान ही अधिक कारगर है !

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

सही बात है, व्यवहारिकता पुस्तकीय ज्ञान से अधिक महत्वपूर्ण है।

M VERMA ने कहा…

व्यवहार नहीं तो ज्ञान अधूरा

डॉ टी एस दराल ने कहा…

रोचक तरीके से काम की बात कह दी ।
बढ़िया प्रसंग ।

P.N. Subramanian ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति.

महेन्द्र मिश्र ने कहा…

बहुत सुन्दर रोचक प्रस्तुति...आभार

उपेन्द्र ' उपेन ' ने कहा…

सुशील जी, बहुत ही अच्छी सीख देती पोस्ट....... सच जिसने व्यावहारिक जिंदगी का पाठ नहीं सिखा पूरी शिक्षा ही व्यर्थ है. सुंदर प्रस्तुति...
.
नये दसक का नया भारत (भाग- १) : कैसे दूर हो बेरोजगारी ?

संजय भास्कर ने कहा…

रोचक प्रस्तुति...आभार

mridula pradhan ने कहा…

ekdam sahi likhe hain.vyawharik gyan bahut zaroori hota hai.

देवेन्द्र पाण्डेय ने कहा…

बहुत खूब।

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