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सोमवार, 23 मार्च 2015

अकल बडी या भैंस...


महामूर्ख दरबार में, लगा अनोखा केस
फँसा हुआ है मामला, अकल बडी या भैंस.
अकल बडी या भैंस, दलीलें बहुत सी आई
महामूर्ख दरबार की, देखो अब सुनवाई.

मंगल भवन अमंगल हारी, भैंस सदा ही अकल पे भारी.
भैंस मेरी जब चर आये चारा, पांच सेर हम दूध निकारा.
कोई अकल ना यह कर पाये, चारा खाकर दूध बनावे.
अकल घास जब चरने जावे, हार जावे नर, अति दुःख पावे.

भैंस का चारा लालू खायो, बीबी को सी.एम. बनवायो.
मोटी अकल मन्दमति होई, मोटी भैंस दूध अति होई.
अकल इश्क कर-करके रोये, भैंस का कोई बायफ्रेंड न होये.
अकल तो ले मोबाईल घूमे, एस.एम.एस. पा-पा के झूमे.

भैंस मेरी डायरेक्ट पुकारे, कबहुँ मिस्ड काल ना मारे.
भैंस कभी सिगरेट ना पीती, भैंस बिना दारु के जीती.
भैंस कभी ना पान चबाय, ना ही इसको ड्रग्स सुहाय.
शक्तिशाली, शाकाहारी, भैंस हमारी कितनी प्यारी.

अकलमंद को कोई ना जाने, भैंस को सारा जग पहचाने.
जाकि अकल में गोबर होये, सो इन्सान पटक सर रोये.
मंगल भवन अमंगल हारी, भैंस का गोबर अकल पे भारी.
भैंस मरे तो बनते जूते, अकल मरे तो पडते जूते.


WhatsApp  प्रसारण  से साभार...

ऐतिहासिक शख्सियत...

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