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बुधवार, 25 मार्च 2015

जिन्दगी का सफर



ऐ दोस्त तू जिन्दगी को जी,
उसे समझने की कोशिश न कर.

सुन्दर सपनों के ताने-बाने बुन,
उसमें उलझने की कोशिश न कर.

चलते वक्त के साथ तू भी चल,
उसमें सिमटने की कोशिश न कर.

अपने हाथों को फैला, खुलकर सांस ले,
अंदर ही अंदर घुटने की कोशिश न कर.

मन में चलते .युद्ध को विराम दे,
खामखां खुदसे लडने की कोशिश न कर.

कुछ बातें भगवान पर छोड दे,
सब-कुछ खुद सुलझाने की कोशिश न कर.

जो मिल गया उसी में खुश रह,
जो सकून छीन ले, उसे पाने की कोशिश न कर.

रास्ते की सुंदरता का लुत्फ उठा,
मंजिल तक जल्दी पहुँचने की कोशिश न कर.

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