सोमवार, 13 जनवरी 2020

मारवाडी फटाके...




            सेठाणीजी नाराज होकर बोली - "जो म्हारो ब्याव कोई असली राक्षस सु भी हो जातो ना; तो भी वो मन्ने थारैसुं जादा सुखी रांखतो ।"

            मारवाड़ी सेठजी - यो तो बिलकुल ही कोनी हो सकतो थो । 


            सेठाणीजी - क्यू कोनी हो सकतो थो ? 


            सेठजी - अये बावळी ! आपणा लोगां में एक ही गोत्र में ब्याव कोनी होवै. ।


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            एक बार एक Punjabi कुए में गिर गया... ...और जोर जोर से रोने लगा  !

            एक मारवाड़ी वहाँ से जा रहा था उसने आवाज सुनी तो रुका और बोला :  "कुण है भाई ?"

            Punjabi : अस्सी हाँ !

            मारवाड़ी:  "भाई ! थे एक-दो होता,  तो काड देतो...

            80 तो म्हारै बाप से बी कोणी निकळै !"  पड्या रेओ !




मारवाडी सीख :
                              
           1.   चौखी संगत में उठणो बैठणो । 

            2.   काम स काम राखणो ।  
                  
            3.   ऊड़तो तीर नही पकडनो । 

            4.   घणो लालच कोनी करणो । 

            5. सोच समझकर पग राखणो ।

            6. रास्ते आणो, रास्ते जाणो ।   
 
            7. जितो हो सके उतो कम बोलणो ।

            8. छोटा-मोटा को कायदो राखणो।
 
            9.   जितो पचे उतो ई खाणो । (पेट खुदको होवे ।)
   
            10.  पूच्छ्या बीना सलाह नी देणो । 

            11.  पराई पंचायती नी करणी ।

            12.  आटा मे लूण समावे, लूण मे आटो कोनी ।

            13.  पगा बलती देखणी ढूंगा बलती कोणी । 

            14.  बीच में ही लाडे की भुवा नी बणनो ।

            15.  सुणनी सबकी करणी मन की ।



अठे हर कोई भरे बटका
घुमाबा नहीं ले जावां, तो घराळी भरे बटका ।
घराळी रो मान ज्यादा राखां, तो माँ भरे बटका ।
कोई काम कमाई नहीं करां, तो बाप भरे बटका ।
पॉकेट मनी नहीं देवां, तो बेटा भरे बटका ।
कोई खर्चो पाणी नहीं करां, तो दोस्त भरे बटका ।
थोड़ो सो कोई न क्यूं कह दयां, तो पड़ौसी भरे बटका ।
पंचायती में नहीं जावां, तो समाज भरे बटका ।
जनम मरण में नहीं जावां, तो सगा संबंधी भरे बटका ।
छोरा छोरी नहीं पढ़े, तो मास्टर भरे बटका ।

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पुरी फीस नहीं देवां, तो डॉक्टर भरे बटका ।
गाड़ी का कागज पानड़ा नहीं मिले, तो पुलिस भरे बटका ।
मांगी रिश्वत नहीं देवां, तो अफसर भरे बटका ।
टाइम सूं उधार नहीं चुकावां, तो सेठ भरे बटका ।
टेमूं टेम किश्त नहीं चुकावां, तो बैंक मैनेजर भरे बटका ।
नौकरी बराबर नहीं करां, तो बॉस भरे बटका ।
फेसबुक पर लाइक कमेंट नहीं करां, तो फ्रेंड भरे बटका ।
अब थे ही बताओ, जावां तो कठे जावां,
अठे हर कोई भरे बटका, अठे हर कोई भरे बटका।
 


शनिवार, 11 जनवरी 2020

मददगार...!

      सुबह जब में अपने घर से निकला, रास्ते के खंभे पर एक कागज चिपका देखकर जिज्ञासावश उसमें लिखा पढने रुका तो उसमें लिखा था, कल शाम अंधेरे की शुरुआत में मुझ गरीब का आखिरी 50/- रु. का नोट यहीं कहीं गिर गया है जिसे मैं नहीं ढूंढ पा रही हूँ । मेरे लिये वो कितना जरुरी था ये मैं किसी को बता भी नहीं सकती । यदि कभी आपको मेरा वो 50/- रु. का नोट मिल जावे तो कृपया अंदर की गली में खोली नं. 00 में लाकर दे दें, भगवान आपका भला करेंगें ।

      कुछ सोचते हुए मैंने अपनी जेब से 50/- रु. का नोट निकालकर अलग रखा और गली में इस खोली तक पहुँचा । वहाँ 75-80 वर्ष की एक कृषकाय अम्माजी दिखीं । मैंने उन्हें वो 50/- रु. का नोट देते हुए कहा कि आपका ये नोट मुझे मिला था और खम्भे पर आपका पत्र व पता देखकर मैं यहाँ आपको देने आया हूँ । मेरी बात सुनते ही वे अम्माजी रो पडीं और बोली- बाबूजी, न जाने कौन भला आदमी वहाँ ऐसा लिखकर टांग गया है, सुबह से कम से कम 10 लोग आकर मुझे जबरदस्ती 50/-, 50/-, रु. दे गये हैं । मेरे बहुत आग्रह करने पर उन्होंने मुश्किल से मुझसे वे 50/-, रु. ले लिये, लेकिन मुझसे बोली- बाबूजी आप मेहरबानी करके जाते-जाते वो चिट्ठी वहाँ से हटा देना । मैं उनको हाँ भरकर ही वहाँ से निकल पाया ।

     रोड पर आते हुए एक पल के लिये सोचा कि मैं वो चिट्ठी अब वहाँ से हटा दूं किंतु फिर यह सोचते हुए कि क्या मालूम किसने इनके लिये नेकी की ये राह चुनी है. मैं इसे यहाँ से हटाकर उसके इस नेक अभियान में क्यों बाधक बनूं । सोचते हुए मैं उस चिट्ठी को वहीं देखते हुए अपने रास्ते आगे बढ गया ।

अब इस मददगार फौज से मिलकर देखें कि ये गरीब ठंड से तो नहीं किंतु इन दानदाताओं के एहसान के बोझ से जरुर मर जाएगा-

और इस सुंदर से वीडिओ में देखिए मदद की इस उच्चतम भावना का 
पशु-पक्षियों तक में जीवंत प्रमाण...


बुधवार, 8 जनवरी 2020

ये पत्नियां...

       आज सुबह भाईसाहब, भाभीजी के साथ सुबह की सैर  पर निकले, बगीचे के आधे चक्कर के बाद भाभीजी बेंच पर बैठ गई । भाईसाहब कुछ आगे निकल गए थे.. भाभीजी ने उंगली से इशारा कर के भाईजी को बुलाया. भाईजी वापस लौटे, और पूछा- "क्या बात है ?"  तो  भाभीजी  बोली... "कुछ नही... बस यूं ही...!"

       भाभीजी,  वहीं बैठी रहीं... भाईजी, फिर टहलने के लिए आगे बढ़े... इस बार भाईजी, पिछली बार से कुछ और आगे बढ़े तभी भाभीजी ने फिर उँगली हिलाकर बुलाया... भाईजी, के लौटकर पूछने पर फिर वही जवाब.. इस बार भाईजी पहले से भी कुछ और अधिक आगे बढ़े कि भाभीजी ने फिर उंगली का इशारा किया... इसबार भाईजी ने लौटकर गुस्से से पुछा... "क्या बात है...? बार-बार उंगली के इशारे से क्यों बुला रही हो....?"


       तो भाभीजी, बड़ी इत्मिनान भरी मासूमियत से बोली..."कुछ खास नहीं, मैं तो बस उंगली की रेंज चैक कर रही थी कि अब इस उम्र में सिग्नल कितनी दूर तक काम कर रहा है..?     



प्रेग्नेंसी पर मिलने वाली शासकीय सब्सिडी का लाभ लेने जाती 
ये विदेशी पत्नियां...

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सोमवार, 6 जनवरी 2020

अद्भुत कलाकृतियां...

      एक अनुभवी चित्रकार ने अपनी समझ के अनुसार प्रकृति का एक अत्यंत खूबसूरत चित्र बनाया फिर यह सोचकर कि लोगों को इसमें क्या कमी दिख सकती है उस चित्र को एक तूलिका और रंगों की प्लेट के साथ यह नोट लगाकर रख दिया कि यदि आपको इसमें कोई कमी दिखे तो कृपया उसे सुधार दें । शाम को जब वह वापस अपने उस चित्र को देखने गया तो यह देखकर बहुत दःखी हुआ कि वह चित्र अलग-अलग रंगों से बीसीयों स्थान पर लोगों के द्वारा बिगाडा जा चुका था ।
            उसने जब अपने मित्र को लोगों द्वारा की गई अपने चित्र की दुर्दशा के बारे में बताया तो उस मित्र ने कहा कि लोगों की राय जानने का तुम्हारा तरीका ठीक नहीं था अब तुम एक दूसरा चित्र बनाओ और एक कलम व नोटबुक के साथ यह नोट लगाकर रखो कि यदि आपको इस चित्र में कोई कमी दिख रही हो तो कृपया इस नोटबुक में उसे लिख दें और उचित समझें तो अपना परिचय भी उसीमें लिखदें जिससे कि चित्रकार आपकी सलाह के मुताबिक चित्र में सुधार कर सके ।
            उस चित्रकार ने ऐसा ही किया और एक दूसरा सुन्दर चित्र बनाकर कलम व नोटबुक के साथ उसी जगह रखवा दिया । शाम को जब वह अपने चित्र पर लोगों की प्रतिक्रिया समझने वहाँ गया तो यह देखकर अचंभित रह गया कि वह डायरी खाली पडी थी और किसी भी ज्ञानी ने उस चित्र की किसी कमी का उल्लेख नहीं किया था ।  


यह चित्र भी देखिये - ढुली हुई चाय में बसी हुई बस्ती.


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पुतलों में निर्मित हँसता-खेलता पूरा जीवंत ग्रामीण जीवन सैकडों मनुष्यों व पशुओं के रुप में इस वीडिओ में देखें...



शनिवार, 4 जनवरी 2020

कर्मफल


            भीष्म पितामह रणभूमि में शरशैया पर पड़े थे । हल्का सा भी हिलते तो शरीर में घुसे हुए बाण भारी वेदना के साथ रक्त की पिचकारी सी छोड़ देते। ऐसी दशा में उनसे मिलने सभी आ जा रहे थे। श्री कृष्ण भी दर्शनार्थ आये। उनको देखकर भीष्म जोर से हँसे और कहा... आइयें जगन्नाथ ! आप तो सर्व ज्ञाता हैं । सभी कुछ जानते हैं, बताइए मैंने ऐसा कौनसा पाप किया था जिसका दंड इतना भयावह मिला...?

            कृष्ण : पितामह ! आपके पास वह शक्ति है, जिससे आप अपने पूर्व जन्म देख सकते हैं, आप स्वयं ही देख लेते ।

             भीष्म : देवकी नंदन ! मैं यहाँ अकेला पड़ा और कर ही क्या रहा हूँ..? मैंने सब देख लिया ...अभी तक 100 जन्म देख चुका हूँ ।  मैंने उन 100 जन्मों में एक भी कर्म ऐसा नहीं किया जिसका परिणाम ये हो कि मेरा पूरा शरीर बिंधा पड़ा है,  हर आने वाला क्षण... ओर पीड़ा लेकर आता है ।
 
            कृष्ण : पितामह ! आप एक भव और पीछे जाएँ, आपको उत्तर मिल जायेगा ।

             भीष्म ने ध्यान लगाया और देखा कि 101 भव पूर्व वो एक नगर के राजा थे ।  एक मार्ग से अपनी सैनिकों की एक टुकड़ी के साथ कहीं जा रहे थे । एक सैनिक दौड़ता हुआ आया और बोला - राजन ! मार्ग में एक सर्प पड़ा है, यदि हमारी टुकड़ी उसके ऊपर से गुजरी तो वह मर जायेगा ।

             भीष्म ने कहा... एक काम करो... उसे किसी लकड़ी में लपेट कर झाड़ियों में फेंक दो ।
 
             सैनिक ने वैसा ही किया... उस सांप को एक लकड़ी में लपेटकर झाड़ियों में फेंक दिया । दुर्भाग्य से झाडी कंटीली थी, सांप उनमें फंस गया, जितना प्रयास उनसे निकलने का करता और अधिक फंस जाता । कांटे उसकी देह में गड गए, खून रिसने लगा। धीरे धीरे वह मृत्यु के मुंह में जाने लगा । 5-6 दिन की तड़प के बाद ही उसके प्राण निकल पाए ।
 
             भीष्म : हे त्रिलोकी नाथ ! आप जानते हैं कि मैंने जानबूझ कर ऐसा नहीं किया,  अपितु मेरा उद्देश्य उस सर्प की रक्षा का था, तब ये परिणाम क्यों...?
  
            कृष्ण: तात श्री ! हम जान बूझ कर क्रिया करें या अनजाने में ...किन्तु क्रिया तो हुई न... उसके प्राण तो गए ना... ये तो विधि का विधान है कि जो क्रिया हम करते हैं उसका फल  हमें भोगना ही पड़ता है... आपका पुण्य इतना प्रबल था कि 101 भव उस पाप फल को उदित होने में लग गए ।  किन्तु  अंततः वह  हुआ ।

            किसी भी जीव को लोग जान बूझ कर मार रहे हैं... उसने जितनी पीड़ा सहन की.. वह उस जीव (आत्मा) को इसी जन्मअथवा अन्य किसी जन्म में अवश्य भोगनी होगी ।

            अतः अपनी हर दैनिक क्रिया सावधानीपूर्वक ही करें । क्योंकि कर्मों का फल देर-सवेर  भुगतना तो अवश्यमेव  पडता ही है ।

         

ठंड प्रचंड...!


        निरंतर बढ रही ठंड के कारण मोबाईल प्रेमी धर्मसंकट में हैं, हाथ के मौजे पहनें तो मोबाईल स्क्रीन काम ना करे और यदि मौजे उतार दें तो उंगलियां काम नहीं करें, बैचारे समझ ही नहीं पा रहे हैं कि क्या करें ?  कोहरा इतना जबर्दस्त चल रहा है कि रास्ते चलते लोग एक-दूसरे से भिडते-टकराते चल रहे हैं । अकड कर चलने वाले भाई लोग सिकुडकर बैठे हैं ।

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प्रदूषण से त्वचा की सुरक्षा व सौंदर्यरक्षा...
समस्याग्रस्त जीवन.

        सुबह नहाना भी जरुरी है ऐसे में इस सर्दी नहाने के पहले साईलेंट मोड पर, नहाते हुए लाऊड मोड पर और नहाने के बाद वाईलैंट मोड पर चलते हुए दिन की शुरुआत हो रही है । गर्मागर्म भोजन के शौकीनों को ठंडे भोजन के साथ ही रजाई में दुबककर काम चलाना पड रहा है । सूरज देवता भी जैसे रजाई में आराम करते दिख रहे हैं और कोढ में खाज ये कि ऐसे माहौल में बारिश भी अपने को पीछे रखने को तैयार नहीं दिख रही है । और तो और इस तेज सर्दी में नाक बहने की बढती घटनाओं के कारण लडकियों की सोते-खाते सेल्फी खींचते रहने की गतिविधियां भी संकट में पड रही है ।

        ठंड की इसी प्रचंडता को आप नीचे के चित्रों व छोटे से वीडिओ में मनोरंजन के साथ ही चिंतनरुप में भी देखिये..
डांस की प्रेक्टिस भी नहीं छूटना चाहिये-


और इसीके साथ देखिये दिगम्बर जैन मुनियों की कठिनतम धर्मसाधना...




गुरुवार, 2 जनवरी 2020

मुफ्तिया सलाहकार...

        शादी में दो दोस्त बहुत समय के बाद मिले,  संयोग से एक की शादी थी और दुसरा बाराती ।

        दुल्हा बोला- "यार ऐसा कोई ज्ञान दे जो जिंदगी में काम आए"

        बाराती दोस्त - "तुम पहले तो नहीं पीते थे, अब पीते हो क्या ? "

        दुल्हा -  "नहीं"

        बाराती दोस्त - "गुड... तो फिर एक काम करो, पहली रात को एक पूरी ब्रांडेड बॉटल अपने साथ ले जाना । स्वाभाविक है कि तुम्हारी बीबी उसे देखते ही भड़क जाएगी,  नसीहतें देगी । तब तुम उससे कह देना कि अगर तुम्हें पसंद नहीं तो आज से और अभी से बंद । तुम्हारे इस त्याग पर वो फिदा हो जाएगी, अपने घरवालों व सहेलियों से तुम्हारी ही चर्चा करेगी और इस प्रकार तुम एक सुखी विवाहित जिंदगी जी सकोगे ।


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इंटरनेट के खुलेपन से बंद - जिंदगी की लयबद्दता...

        दुल्हे को सलाह पसंद आई और उसने वैसा ही किया ।

        उसके हाथ में बोतल देखते ही दुल्हन कुछ बुदबुदाई जो दुल्हे को समझ नहीं आया तो उसने पुछा– क्या तुमने कुछ कहा ?

        दुल्हन बोली- "हाँ, मेरे लिए भी लॉर्ज पेग ही बनाना ।"




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सलाहकार की एक किस्म यह भी देखें-



ऐतिहासिक शख्सियत...

पागी            फोटो में दिखाई देने वाला जो वृद्ध गड़रिया है    वास्तव में ये एक विलक्षण प्रतिभा का जानकार रहा है जिसे उपनाम मिला था...