शनिवार, 14 मई 2016

आदत सुधारें - जीवन सुधरेगा...


           
          अगर आपको कहीं पर भी थूकने की आदत है तो यह निश्चित है कि आपको यश, सम्मान अगर मुश्किल से मिल भी जाता है तो कभी टिकेगा नहीं, यह काम वॉश-बेसिन में जाकर ही  करें ! इससे आपके यश,मान-सम्मान में अभिवृध्दि होगी।         

         जिन लोगों को अपनी जूठी थाली या बर्तन वहीं उसी जगह पर छोड़ने की आदत होती है उनको सफलता कभी भी स्थायी रूप से नहीं मिलती.! बहुत मेहनत करनी पड़ती है और ऐसे लोग अच्छा नाम नहीं कमा पाते.! अगर आप अपने जूठे बर्तनों को उठाकर उनकी सही जगह पर रख आते हैं तो चन्द्रमा और शनि का आप सम्मान करते हैं ! इससे मानसिक शांति बढ़ कर अड़चनें दूर होती हैं ।

          जब भी हमारे घर पर कोई भी बाहर से आये, चाहे मेहमान हो या कोई काम करने वाला, उसे स्वच्छ पानी ज़रुर पिलाएं ! ऐसा करने से हम राहु का सम्मान करते हैं.! जो लोग बाहर से आने वाले लोगों को हमेशा स्वच्छ पानी  पिलाते हैं उनके घर में कभी भी राहु का दुष्प्रभाव नहीं पड़ता.! अचानक आ पड़ने वाले कष्ट-संकट नहीं आते ।

          घर के पौधे भी आपके अपने परिवार के सदस्यों जैसे ही होते हैं,  उन्हें भी प्यार और थोड़ी देखभाल की जरुरत होती है.! जिस घर में सुबह-शाम पौधों को पानी दिया जाता है तो हम बुध, सूर्य और चन्द्रमा का सम्मान करते हुए परेशानियों का डटकर सामना कर पाने में  समर्थ हो पाते हैं ! परेशानियां दूर होकर सुकून आता है । जो लोग नियमित रूप से पौधों को पानी देते हैं, उन लोगों को डिप्रेशन जैसी परेशानियाँ नहीं पकड़ पातीं.!
 
          जो लोग बाहर से आकर अपने चप्पल, जूते, मोज़े इधर-उधर फैंक देते हैं, उन्हें उनके शत्रु बड़ा परेशान करते हैं.! इससे बचने के लिए अपने चप्पल-जूते करीने से लगाकर रखें, आपकी प्रतिष्ठा बनी रहेगी।
 
          उन लोगों का राहु और शनि खराब होगा, जो लोग जब भी अपना बिस्तर छोड़ेंगे तो उनका बिस्तर हमेशा फैला हुआ होगा, सिलवटें ज्यादा होंगी, चादर कहीं, तकिया कहीं, कम्बल कहीं । उस पर ऐसे लोग अपने पुराने पहने हुए कपडे़ तक फैला कर रखते हैं ! ऐसे लोगों की पूरी दिनचर्या कभी भी व्यवस्थित नहीं रहती, जिसकी वजह से वे खुद भी परेशान रहते हैं और दूसरों को भी परेशान करते हैं.! इससे बचने के लिए उठते ही स्वयं अपना बिस्तर समेट दें.! जीवन आश्चर्यजनक रूप से सुंदर होता चला जायेगा।

         
पैरों की सफाई पर हम लोगों को हर वक्त ख़ास ध्यान देना चाहिए, जो कि हम में से बहुत सारे लोग भूल जाते हैं ! नहाते समय अपने पैरों को अच्छी तरह से धोयें, कभी भी बाहर से आयें तो पांच मिनट रुक कर मुँह और पैर धोयें.! आप खुद यह पाएंगे कि आपका चिड़चिड़ापन कम होगा, दिमाग की शक्ति बढे़गी और क्रोध धीरे-धीरे कम होने लगेगा.! आनंद बढ़ेगा।

         
रोज़ खाली हाथ घर लौटने पर धीरे-धीरे उस घर से लक्ष्मी चली जाती है और उस घर के सदस्यों में नकारात्मक या निराशा के भाव आने लगते हैं.! इसके विपरीत घर लौटते समय कुछ न कुछ वस्तु लेकर आएं तो उससे घर में बरकत बनी रहती है.! घर में लक्ष्मी का वास होता जाता है.! हर रोज घर में कुछ न कुछ लेकर आना समृद्धि-वृद्धि का सूचक माना गया है.! ऐसे घर में सुख, समृद्धि और धन हमेशा बढ़ता जाता है और घर में रहने वाले सदस्यों की भी तरक्की होती है.!


     जूठन बिल्कुल न छोड़ें । ठान लें । एकदम तय कर लें। पैसों की कभी कमी नहीं होगी।  अन्यथा नौ के नौ गृहों के खराब होने का खतरा सदैव मंडराता रहेगा। कभी कुछ कभी कुछ । करने के काम पड़े रह जायेंगे और समय व पैसा कहां जायेगा पता ही नहीं चलेगा।

       अच्छी बातें बाँटने से दोगुनी तो होती ही हैं साथ ही अच्छी बातों का महत्त्व समझने वालों में आपकी इज़्जत भी बढ़ती है ।

गुरुवार, 5 मई 2016

हम-तुम और वो...

बेचारे मर्द...

जन्म लेते है, तो बधाइयां माँ को मिलती है..।
शादी होती है, तो तारीफ़ और उपहार दुल्हन को मिलते है......
और जब मर जाते है, तो बीमा की रकम भी बीबी ले जाती है.......
हद तो तब हो गयी जब एक आदमी ने सौ बार "रक्तदान" करके ‘रिकार्ड बनाया । मगर ब्लड बैंक वालो ने यह कहते हुए पुरस्कार उसकी पत्नी को  दिया:-
“
धन्यवाद मेडमजी............ "
"
आपने नही पिया, तभी तो हमने  लिया। "

हेलमेट  और  पत्नी  दोनों  का  स्वभाव
एक  जैसा  है .....
सिर  पर  बिठाकर  रखो  तो
जान  बची  रहेगी...

मां - बेटा एपल खाओगे?
पप्पू - नही...
मां - बेटा आम खाओगे?
पप्पू - नही...
मां - बेटा ऑरेंज खाओगे?
पप्पू - नही...
मां - "बिल्कुल बाप पर गया है,चप्पल ही खाएगा."

बाप- बेटा लस्सी पीयेगा?
पप्पू - नही...
बाप - बेटा दूध पीयेगा?
पप्पू - नही...
बाप - बेटा जूस पीयेगा?
पप्पू - नही...
बाप - "बिल्कुल माँ पर गया है, लगता खून ही पीयेगा." 
  
बीवी से झगडे करने के फायदे...

          
नींद में कोई व्यवधान नहीं आता : सुन रहे हो क्या, लाइट बंद करो, पंखा बंद करो, चादर इधर दो, इधर मुह करो, टाइप कुछ भी बाते नहीं होती..

          
पैसों की बचत : जब बीवी से झगड़ा हुआ रहता है इस दौरान बीवी पैसे नहीं मांगती..

          
तनाव से मुक्ति : झगड़े के दैरान बातचीत बंद होती है जिससे किचकिच कम होती है और पति तनाव से मुक्त रहता है..

          
आत्मनिर्भरता आती है : जो अपना काम आप कर सकते हैं वो इसलिए नहीं करते कि बीवी कर देती है, झगड़े के बाद वो छोटे मोटे काम (खुद ले कर पानी पीना, नहाने के बाद अपने कपडे खुद निकालना, अपने लिए खुद चाय बनाना) खुद कर के आदमी आत्मनिर्भर हो जाता है..

          
काम में व्यवधान नहीं होता : झगडे के दौरान काम के समय आपको बीवी के फ़ालतू कॉल (जानू क्या कर रहे हो, मन नहीं लग रहा है, आज बहुत गर्मी है, इस प्रकार के) नहीं आते, जिससे आप अपने काम में ध्यान केंद्रित कर सकते है..

          
घर जल्दी जाने की चिंता से मुक्ति : ( अधिकांश पतियो को काम के बाद जल्दी घर आने के लिए घर से बारम्बार फ़ोन आते है मगर एक बार झगड़ा हो जाने के बाद आप कुछ दिन तक इस चिंता से दूर रह सकते है..

          
आप का मूल्य बढ़ता है : ये इंसान का मनोविज्ञान है कि जो चीज नहीं होती उसके मूल्य का अहसास तभी होता है, झगडे के दौरान बीवी को आपकी मूल्य का अहसास होता है..

          
प्यार बढ़ता है : आपस में झगडे से प्यार बढ़ता है, क्योकि अक्सर देखा गया है एक बार बारिश हो जाए तो मौसम सुहाना हो जाता है..

         
फायदे तो और भी बहुत हैं,  मगर समयाभाव के कारण लिखना मुश्किल है..

         
तो आइये प्रण लें कि आज के बाद हम सभी पति महीने में एक न एक बार अपनी बीवी से झगड़ा जरूर करेंगे (बीवी तो हमेशा तैयार रहती है) ताकि महीने में कुछ दिन पति लोग भी कुछ शांति से गुजार सकें..

अलोकिक  यह ज्ञान पतिहित में जारी... 

मंगलवार, 19 अप्रैल 2016

जीवन का रंगमंच...!

        एक चित्रकार था, जो अद्धभुत चित्र बनाता था । लोग उसकी चित्रकारी की काफी तारीफ़ करते थे । एक दिन कृष्ण मंदिर के भक्तों ने उनसे कृष्ण और कंस का एक चित्र बनाने की इच्छा प्रगट की । चित्रकार इसके लिये तैयार हो गया, आखिर भगवान् का काम था, किंतु उस चित्र के लिये उसने कुछ शर्ते रखी । उसने कहा मुझे योग्य पात्र चाहिए, अगर वे मिल जाए तो में आसानी से चित्र बना दूंगा।

        मुझे आप कृष्ण के चित्र लिए एक योग्य व नटखट बालक और कंस के लिए एक क्रूरतम भाव वाला व्यक्ति लाकर दे फिर मैं आपका वांछित चित्र अवश्य बना दूंगा ।

Click & Read Also-
भ्रष्टाचार की जड
भलाई में भी सोचें...

        कृष्ण मंदिर के भक्त एक सुंदर, चंचल व अबोध बालक को तत्काल ले आये, चित्रकार को भी वह बालक पसंद आया और उस बालक को सामने रख उसने बालकृष्ण का एक सुंदर चित्र बनाया ।


             अब बारी कंस की थी पर क्रूर भाव वाले व्यक्ति को ढूंढना थोडा मुश्किल था । जो व्यक्ति कृष्ण मंदिर वालो को पसंद आता वो चित्रकार को पसंद नहीं आता, उसे उसमें क्रूरता के वो भाव मिल नहीं रहे थे जो उसे उस व्यक्ति में चाहिये थे ।

           
एक-एक दिन कर वक्त महिनों व सालों की सीमा रेखा को पार कर गया । यहाँ तक कि वह युवा चित्रकार वृद्धावस्था की देहलीज पार कर गया ।

       
आखिर थक-हार कर उस कृष्ण मंदिर के भक्त विशेष अनुमति प्राप्त कर उस चित्रकार को जेल में ले गये जहाँ उम्रकैद की सजा काट रहे अपराधियों में से एक को उस चित्रकार ने कंस की छबि को साकार करने लायक चुना  और उसे सामने रखकर ही उसने कंस का भी चित्र बनाया ।

        कृष्ण और कंस की वो तस्वीर आज सालों के बाद पूर्ण हुई । कृष्ण मंदिर के भक्त उस तस्वीर को देखकर मंत्रमुग्ध हो गए ।

       
तब उस अपराधी ने भी वह तस्वीर देखने की इच्छा व्यक्त की । किंतु जैसे ही उस दुर्दांत अपराधी ने वो तस्वीर देखी तो वो फुट-फुटकर रोने लगा ।  इस स्थिति को देख वहाँ मौजूद सभी लोग अचंभित हो गए ।

Click & Read Also-
बेशकीमती प्याज...
CFL - लापरवाही के खतरनाक परिणाम...
केल्शियम युक्त – आंवले का मुरब्बा 

       
चित्रकार ने तब बड़े प्यार से उससे रोने का कारण पूछा । तब वह अपराधी बोला "शायद आपने मुझे पहचाना नहीं, मैं ही वो बच्चा हुँ जिसे सालों पहले आपने बालकृष्ण के चित्र के लिए पसंद किया था ।" अपने साथ घटने वाले एक छोटे से अन्याय को मैं सहन नहीं कर पाया और बदला लेते-लेते आज यहाँ  उम्रकैदी बनकर कंस रुप में भी मैं ही आपके सामने मौजूद हूँ । काश उन अन्यायियों को मैं क्षमा कर पाता । किंतु नहीं कर पाया और मेरे कुकर्मो से आज में ही कंस भी बन गया । और अब इस तस्वीर में कृष्ण भी मैं ही हूँ और कंस भी मैं ही हूँ ।

       
जीवन के रंगमंच में हमारे कर्म ही हमे कृष्ण बनाते हैं और वही हमें कंस भी बना देते हैं ।

बुधवार, 25 मार्च 2015

जिन्दगी का सफर



ऐ दोस्त तू जिन्दगी को जी,
उसे समझने की कोशिश न कर.

सुन्दर सपनों के ताने-बाने बुन,
उसमें उलझने की कोशिश न कर.

चलते वक्त के साथ तू भी चल,
उसमें सिमटने की कोशिश न कर.

अपने हाथों को फैला, खुलकर सांस ले,
अंदर ही अंदर घुटने की कोशिश न कर.

मन में चलते .युद्ध को विराम दे,
खामखां खुदसे लडने की कोशिश न कर.

कुछ बातें भगवान पर छोड दे,
सब-कुछ खुद सुलझाने की कोशिश न कर.

जो मिल गया उसी में खुश रह,
जो सकून छीन ले, उसे पाने की कोशिश न कर.

रास्ते की सुंदरता का लुत्फ उठा,
मंजिल तक जल्दी पहुँचने की कोशिश न कर.

सोमवार, 23 मार्च 2015

अकल बडी या भैंस...


महामूर्ख दरबार में, लगा अनोखा केस
फँसा हुआ है मामला, अकल बडी या भैंस.
अकल बडी या भैंस, दलीलें बहुत सी आई
महामूर्ख दरबार की, देखो अब सुनवाई.

मंगल भवन अमंगल हारी, भैंस सदा ही अकल पे भारी.
भैंस मेरी जब चर आये चारा, पांच सेर हम दूध निकारा.
कोई अकल ना यह कर पाये, चारा खाकर दूध बनावे.
अकल घास जब चरने जावे, हार जावे नर, अति दुःख पावे.

भैंस का चारा लालू खायो, बीबी को सी.एम. बनवायो.
मोटी अकल मन्दमति होई, मोटी भैंस दूध अति होई.
अकल इश्क कर-करके रोये, भैंस का कोई बायफ्रेंड न होये.
अकल तो ले मोबाईल घूमे, एस.एम.एस. पा-पा के झूमे.

भैंस मेरी डायरेक्ट पुकारे, कबहुँ मिस्ड काल ना मारे.
भैंस कभी सिगरेट ना पीती, भैंस बिना दारु के जीती.
भैंस कभी ना पान चबाय, ना ही इसको ड्रग्स सुहाय.
शक्तिशाली, शाकाहारी, भैंस हमारी कितनी प्यारी.

अकलमंद को कोई ना जाने, भैंस को सारा जग पहचाने.
जाकि अकल में गोबर होये, सो इन्सान पटक सर रोये.
मंगल भवन अमंगल हारी, भैंस का गोबर अकल पे भारी.
भैंस मरे तो बनते जूते, अकल मरे तो पडते जूते.


WhatsApp  प्रसारण  से साभार...

ऐतिहासिक शख्सियत...

पागी            फोटो में दिखाई देने वाला जो वृद्ध गड़रिया है    वास्तव में ये एक विलक्षण प्रतिभा का जानकार रहा है जिसे उपनाम मिला था...