रविवार, 6 अक्टूबर 2019

अध्यात्म ज्ञान...


प्र.1-  वेद किसे कहते है ?
उत्तर- ईश्वरीय ज्ञान की पुस्तक को वेद कहते है।

प्र.2-  वेद-ज्ञान किसने दिया ?
उत्तर-  ईश्वर ने दिया।

प्र.3-  ईश्वर ने वेद-ज्ञान कब दिया ?
उत्तर-  ईश्वर ने सृष्टि के आरंभ में वेद-ज्ञान दिया।

प्र.4-  ईश्वर ने वेद ज्ञान क्यों दिया ?
उत्तर- मनुष्य-मात्र के कल्याण के लिए।

प्र.5-  वेद कितने है ?

उत्तर- चार प्रकार के ।
1-ऋग्वेद,  2 - यजुर्वेद,  3- सामवेद,  4 - अथर्ववेद  

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प्र.6-  वेदों के ब्राह्मण ।

        वेद         ब्राह्मण
1 - ऋग्वेद      -  ऐतरेय
2 - यजुर्वेद     -   शतपथ
3 - सामवेद     -   तांड्य
4 - अथर्ववेद    -   गोपथ

प्र.7-  वेदों के उपवेद कितने है।

उत्तर -  वेदों के चार उप वेद है ।
          वेद              उपवेद
    1- ऋग्वेद       -   आयुर्वेद
    2- यजुर्वेद       -   धनुर्वेद
    3 -सामवेद     -     गंधर्ववेद
    4- अथर्ववेद    -     अर्थवेद

प्र 8-  वेदों के अंग कितने होते है ?

उत्तर -  वेदों के छः अंग होते है ।
1 - शिक्षा,  2 - कल्प,  3 - निरूक्त,  4 - व्याकरण.  5 - छंद,  6 - ज्योतिष.

प्र.9- वेदों का ज्ञान ईश्वर ने किन किन ऋषियो को दिया ?

उत्तर- वेदों का ज्ञान चार ऋषियों को दिया ।
      वेद                 ऋषि
1- ऋग्वेद        -      अग्नि
2 - यजुर्वेद      -       वायु
3 - सामवेद      -      आदित्य
4 - अथर्ववेद     -     अंगिरा

प्र.10-  वेदों का ज्ञान ईश्वर ने ऋषियों को कैसे दिया ?

उत्तर- वेदों का ज्ञान ऋषियों को समाधि की अवस्था में दिया ।

प्र.11-  वेदों में कैसे ज्ञान है ?

उत्तर-  वेदों मै सब सत्य विद्याओं का ज्ञान-विज्ञान है ।

प्र.12-  वेदो के विषय कौन-कौन से हैं ?

उत्तर-   वेदों के चार विषय है।
       ऋषि        विषय
1-  ऋग्वेद    -    ज्ञान
2-  यजुर्वेद   -    कर्म
3-  सामवेद    -  उपासना
4-  अथर्ववेद -    विज्ञान

प्र.13-  किस वेद में क्या है  ?

     ऋग्वेद में।
1-  मंडल      -  10
2 - अष्टक     -  08
3 - सूक्त     -  1028
4 - अनुवाक  -    85
5 - ऋचाएं   -  10589

  यजुर्वेद में।
1- अध्याय    -  40
2- मंत्र      - 1975

         सामवेद में  
1-  आरचिक     -  06
2 - अध्याय     -   06
3-  ऋचाएं       -  1875

       अथर्ववेद में  
1- कांड      -    20
2- सूक्त     -   731
3 - मंत्र     -   5977
         
प्र.14- वेद पढ़ने का अधिकार किसको है ?

उत्तर- मनुष्य-मात्र को वेद पढ़ने का अधिकार है।

प्र.15-  क्या वेदों में मूर्तिपूजा का विधान है ?

उत्तर-  वेदों में मूर्ति पूजा का विधान बिलकुल भी नहीं ।

प्र.16-  क्या वेदों में अवतारवाद का प्रमाण है ?

उत्तर- वेदों मै अवतारवाद का प्रमाण नहीं है ।

प्र.17-  सबसे बड़ा वेद कौन-सा है ?

उत्तर-  सबसे बड़ा वेद ऋग्वेद है ।

प्र.18-  वेदों की उत्पत्ति कब हुई ?

उत्तर-  वेदो की उत्पत्ति सृष्टि के आदि से परमात्मा द्वारा हुई । अर्थात अरब 96 करोड़ लाख 43 हजार वर्ष पूर्व ।

प्र.19-  वेद-ज्ञान के सहायक दर्शन-शास्त्र ( उपअंग ) कितने हैं और उनके लेखकों का क्या नाम है ?

उत्तर-
1-  न्याय दर्शन  - गौतम मुनि।
2- वैशेषिक दर्शन  - कणाद मुनि।
3- योगदर्शन  - पतंजलि मुनि।
4- मीमांसा दर्शन  - जैमिनी मुनि।
5- सांख्य दर्शन  - कपिल मुनि।
6- वेदांत दर्शन  - व्यास मुनि।

प्र.20-  शास्त्रों के विषय क्या है ?

उत्तर-  आत्मा,  परमात्माप्रकृतिजगत की उत्पत्ति,  मुक्ति अर्थात सब प्रकार का भौतिक व आध्यात्मिक  ज्ञान-विज्ञान आदि।

प्र.21-  प्रामाणिक उपनिषदे कितनी है ?

उत्तर-  प्रामाणिक उपनिषदे केवल ग्यारह है।

प्र.22-  उपनिषदों के नाम बतावे ?

उत्तर- 
1-ईश ( ईशावास्य ),  2- केन, 3-कठ, 4-प्रश्न, 5-मुंडक, 6-मांडू, 7-ऐतरेय, 8-तैत्तिरीय, 9- छांदोग्य, 10-वृहदारण्यक, 11- श्वेताश्वतर ।

प्र.23-  उपनिषदों के विषय कहाँ से लिए गए है ?

उत्तर- उपनिषदों के विषय वेदों से लिए गए है !

प्र.24- चार वर्ण कोन कोन से होते हैं  ?

उत्तर-
1- ब्राह्मण,  2- क्षत्रिय,  3- वैश्य,  4- शूद्र  

प्र.25- चार युग कौन-कौन से होते है और कितने वर्षों के ।

 उत्तर- 
1- सतयुग - 17,28000  वर्षों का नाम ( सतयुग ) रखा है।

2- त्रेतायुग- 12,96000  वर्षों का नाम ( त्रेतायुग ) रखा है।

3- द्वापरयुग- 8,64000  वर्षों का नाम है।

4- कलयुग- 4,32000  वर्षों का नाम है।

कलयुग के  4,976  वर्षों का भोग हो चुका है अभी 4,27,024 वर्षों का भोग होना बाकी है।

प्र.  पंच महायज्ञ कोन -कोन से होते है !     
उत्तर-        
       1- ब्रह्मयज्ञ,  2- देवयज्ञ,  3- पितृयज्ञ,  4- बलिवैश्वदेवयज्ञ, 5- अतिथियज्ञ ।

स्वर्ग  -  जहाँ सुख है ।
नरक  -  जहाँ दुःख है ।

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नवग्रहों की अशुभता दूर करने के उपाय... 


           सूर्य- सूर्य की अशुभता को दूर करने के लिए किसी शुभ मुहूर्त में बेल की जड़ को खोदकर तत्पश्चात उसे सूर्य मन्त्र से अभिमन्त्रित करके लाल कपड़े में लपेट कर दाहिनी भुजा में बांधने से सूर्य अच्छा फल देने लगता है।

            
चन्द्र- चन्द्र को बलवान करने के लिए किसी शुभ मुहूर्त में खिरनी की जड़ खोदकर तत्पश्चात उसे अभिमन्त्रित करके सफेद कपड़े में लपेटकर दिन सोमवार को लाकेट में भरकर गले में धारण करने से चन्द्र अशुभता में कमी आती है।

            
मंगल- मंगल ग्रह को मजबूत करने के लिए अनन्तमूल या खेर की जड़ को शुद्ध करके लाल कपड़े में लपेटकर दिन मंगलवार को दाहिने भुजा में बांधने से मंगल ग्रह मजबूत होकर शुभ फल देने लगता है।

            
बुध- बुध ग्रह बलवान करने के लिए किसी शुभ मुहूर्त में विधारा की जड़ खोदकर तत्पश्चात उसे शुद्ध करके हरे रंग के धागे में लपेट कर गले में धारण करने से बुध ग्रह से सम्बन्धित अच्छा फल प्राप्त होने लगता है।

            
गुरू- गुरू ग्रह को मजबूत करने के लिए किसी अच्छे मुहूर्त में केले की जड़ को खोदकर तत्पश्चात उसे अभिमन्त्रित करके पीले कपड़े में बांधकर दिन गुरूवार को दाहिने भुजा में बाॅधने से गुरू ग्रह की अशुभता में कमी आती है।

            
शुक्र- शुक्र ग्रह को स्ट्रांग करने के लिए गूलर की जड़ को शुद्ध करके दिन शुक्रवार किसी लाकेट में डालकर पहनने से शुक्र ग्रह बलवान होकर अच्छे फल देने लगता है।

            
शनि- शनि देव को खुश करने के लिए शमी पेड़ की जड़ को किसी अच्छे मूहूर्त में शुद्ध करके नीले कपड़े में बाॅधकर धारण करने से शनि देव कृपा बरसने लगती है।

            
राहु- राहु की अच्छी कृपा पाने के लिए सफेद चन्दन का टुकड़ा नीले धागे में बांधने से राहु की अशुभता में आती है और लाभ होने लगता है।

            
केतु- केतु की अशुभता दूर करने के लिए अश्वंगधा पेड़ की जड़ को किसी शुभ मुहूर्त में अभिमन्त्रित करके नीले धागे में लपेट कर गले में धारण करने से केतु का शुभ फल मिलने लगता है ।

शुक्रवार, 4 अक्टूबर 2019

प्रवृति आम आदमी की.

         
      
      इन दिनों WhatsApp पर भारत के आम इन्सान की सोच व समस्या से मिलती-जुलती एक पोस्ट देखने में आ रही है । पसन्द आने पर मैं इसे अपने इस ब्लॉग पर भी शेअर कर रहा हूँ, उम्मीद है यदि आपने पहले इसे न देखा होगा तो आपको भी पढने में शायद अच्छी लगेगी...

यह नदियों का मुल्क है, पानी भी भरपूर है ।
बोतल में बिकता है, पन्द्रह रू शुल्क है ।

यह गरीबों का मुल्क है, जनसंख्या भी भरपूर है ।
परिवार नियोजन मानते नहीं, नसबन्दी नि:शुल्क है ।

यह अजीब मुल्क हैनिर्बलों पर हर शुल्क है ।
अगर आप हों बाहुबली, हर सुविधा नि:शुल्क है।

यह अपना ही मुल्क है, कर कुछ सकते नहीं।
कह कुछ सकते नहीं, बोलना नि:शुल्क है।

यह शादियों का मुल्क है, दान दहेज भी खूब है ।
शादी को पैसा नहीं तो, कोर्ट मैरिज नि:शुल्क हैं ।

यह पर्यटन का मुल्क है, रेलें भी खूब हैं ।
बिना टिकट पकड़े गए तो, रोटी कपड़ा नि:शुल्क है ।

यह अजीब मुल्क है, हर जरूरत पर शुल्क है ।
ढूंढ कर देते हैं लोग, सलाह नि:शुल्क है ।

यह आवाम का मुल्क है, चुनने का हक है ।
वोट देने जाते नहीं, मतदान नि:शुल्क है ।

यह शिक्षकों का मुल्क है, पाठशालाएं भी खूब है,
शिक्षकों को वेतन के पैसे नहीं, पढ़ना, खाना, निःशुल्क है ।


विसंगतियों में आम आदमी-

सर के बाल उडे तो दवाई ढूँढता है..,
जब उग जावे तो नाई ढूँढता है..,
काले रहते हैं तो लुगाई ढूँढता है
सफ़ेद हो जाएँ तो डाई ढूँढता है ।

मंगलवार, 1 अक्टूबर 2019

कर्म एक सीख



          एक भिखारी रोज एक दरवाजें पर जाता और भीख के लिए आवाज लगाता, जब घर मालिक बाहर आता तो उसे गालिया और ताने देता- मर जाओ, काम क्यूं नही करते, जीवन भर भीख मांगतें रहोगे, कभी-कभी गुस्सें में उसे धकेल भी देता, पर भिखारी बस इतना ही कहता, ईश्वर तुम्हारें पापों को क्षमा करें,

         एक दिन सेठ बड़े गुस्सें में था, शायद व्यापार में घाटा हुआ था, वो भिखारी उसी वक्त भीख मांगने आ गया, सेठ ने आव देखा ना ताव, सीधा उसे पत्थर से दे मारा, भिखारी के सर से खून बहने लगा।  फिर भी उसने सेठ से कहा- ईश्वर तुम्हारें पापों को क्षमा करें और वहां से जाने लगा । इधर खून देखकर सेठ का गुस्सा काफूर हो गया । वह सोचने लगा- मैंने उसे पत्थर से भी मारा पर उसने बस दुआ ही दी, इसके पीछे क्या रहस्य है जानना पड़ेगा, और वह भिखारी के पीछे लग गया ।

       भिखारी जहाँ भी जाता सेठ उसके पीछे जाता, कही कोई उस भिखारी को भीख दे देता तो कोई उसे जलिल करता, गालियाँ देता, पर भिखारी इतना ही कहता- ईश्वर तुम्हारे पापों को क्षमा करें । अब अंधेरा हो चला था, भिखारी अपने घर लौट रहा था, सेठ भी उसके पीछे था, भिखारी जैसे ही अपने घर लौटा, एक टूटी फूटी खाट पे, एक बुढिया सोई थी, जो भिखारी की पत्नी थी, जैसे ही उसने अपने पति को देखा उठ खड़ी हुई और भीख का कटोरा देखने लगी, उस भीख के कटोरे मे मात्र एक आधी बासी रोटी थी, उसे देखते ही बुढिया बोली बस इतना ही और कुछ नही, और ये आपका सर कैसे फूट गया ?

       भिखारी बोला, हाँ बस इतना ही । किसी ने कुछ नहीं दिया, सबने गालिया दी, पत्थर मारे, इसलिए ये सर फूट गया । फिर भिखारी ने कहा- सब अपने ही पापों का परिणाम है, याद है ना तुम्हेंकुछ वर्षो पहले हम कितने रईस हुआ करते थे । क्या नही था हमारे पास, पर हमने कभी दान नही दिया । याद है तुम्हें वो अंधा भिखारी, बुढिया की ऑखों में ऑसू आ गये और उसने कहा हाँ, कैसे हम उस अंधे भिखारी का मजाक उडाते थे, कैसे उसे रोटियों की जगह खाली कागज रख देते थे, कभी जालिल करते थे, कभी मार व धकेल देते थे । तब बुढिया ने कहा- हाँ सब याद है मुझे । कैसे मैंने भी उसे राह नही दिखाते हुए घर के बनें नालें में गिरा दिया था, जब भी वह रोटी मांगता मैंने बस उसे गालियाँ दी, एक बार तो उसका कटोरा तक फेंक दिया था और वो अंधा भिखारी हमेशा कहता था, तुम्हारे पापों का हिसाब ईश्वर करेंगे, मैं नही देखलो अब उसी भिखारी की हाय और बद्दुआ हमें ले डूबी।

      फिर भिखारी ने कहा- पर मैं किसी को बद्दुआ नही देता, चाहे मेरे साथ कितनी भी ज्यादत्ती क्यूं ना हो जाए । मेरे लब पर हमेशा दुआ रहती है, अब मैं ये नहीं चाहता कि कोई और इतने बुरे दिन देखे । इसीलिये मेरे साथ अन्याय करने वालों को भी मैं दुआ देता हूँ, क्योंकि उन्हें मालूम ही नही, वो क्या पाप कर रहें है, जो सीधा ईश्वर देख रहा हैं । जैसी हमने भुगती है कोई और ना भुगते इसलिए मेरे दिल से बस अपना हाल देख दुआ ही निकलती है ।
     
        सेठ चुपके-चुपके सब सुन रहा था उसे अब सारी बात समझ आ गयी थी ।  बुढे-बुढिया ने आधी रोटी मिलकर खाई और प्रभु की महिमा है बोल कर सो गयें ।

     अगले दिन वह भिखारी फिर भीख मांगने गया । सेठ ने पहले से ही रोटियां निकल के रखी थी । उसने भिखारी को देते हुए हल्की से मुस्कान भरे स्वर में कहा- माफ करना बाबा कल गलती हो गयी । भिखारी ने कहा- ईश्वर तुम्हारा भला करे और वो वहाँ से चला गया ।

       सेठ को एक बात समझ आ गयी थी, इंसान तो बस दुआ-बद्दुआ देते हैं पर पूरी वो ईश्वर कर्मो के हिसाब से स्वयं ही करता है । इसलिये हो सके तो बस अच्छा करें, वो दिखता नही है तो क्या हुआ, सब का हिसाब पक्का रहता है उसके पास ।

शुक्रवार, 27 सितंबर 2019

सदा-सर्वदा पवित्र {व्यंग}

                 
          एक पण्डितजी एक दिन शास्त्राथ की जिद में  अपने बच्चे से उलझ गये । बच्चे ने भी एक प्रश्न दाग दिया कि अच्छा बताओ- "वो कौन सी वस्तु है, जो कभी अपवित्र नहीं होती......?"

          पण्डितजी उत्तर तलाशते पसीने-पसीने हो गये, मगर बच्चे के प्रश्न का जवाब नहीं दे पाये । आखिर हार मान कर बोले, चल तू ही बता ।

          बच्चे ने कहा कि कभी न अपवित्र होने वाली वस्तु  है,  टैन्ट हाउस के गद्दे, जिसे......हिन्दू,-मुसलमान से ले कर पण्डित, मौलवी,  हरिजन, कुम्हार , डोम और बाल्मीकि सभी धर्म के लोग इस्तेमाल करते हैं ।

         ये गद्दे मैयत से लेकर पूजा पण्डाल तक और धार्मिक कथा से ले कर उठावने तक हर मौके पर बिछते हैं । इनको कोई सुतक भी नहीं लगता बाराती भी इन गद्दों पर सोम-रस पीने के बाद वमन करते हैं ।

          छोटे बच्चों को सुविधानुसार इन पर पेशाब करा दिया जाता है ।  इतना ही नहीं,  इन पर बिछी चादरों से जूते भी चमका लियेे जाते हैं ।  हद तो तब होती है, जब हलवाई इन चादरों में पनीर का चक्का लटका देता है । उसी  पनीर से क्या मस्त मटर-पनीर बनता है....

          पण्डितजी चारों खाने चित थे और बच्चा पण्डितजी के चेहरे पर पानी के छींटे मार रहा था ।

          यह ऐसी  सत्यता है,  जिसे हम सब जानते  तो हैं पर मानते नहीं है और इन्हीं पर बैठकर पूजा-पाठ का दिखावा करते हैं ।

व्हॉट्सएप से साभार...

ऐतिहासिक शख्सियत...

पागी            फोटो में दिखाई देने वाला जो वृद्ध गड़रिया है    वास्तव में ये एक विलक्षण प्रतिभा का जानकार रहा है जिसे उपनाम मिला था...